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पति ने थाने में की थी आत्महत्याः डर से नहीं किया केस, एक साल बाद शुरू हुआ विधवा पेंशन, आवास देने का वादा भी नहीं हुआ पूरा

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Ranchi : सरकार और प्रशासन के खोखले दांवों की असलियत गरीबों के बीच जाकर ही होती है. आश्वासन लंबे-लंबे दिए जाते हैं. और जमीनी हकीकत सालों बाद भी शून्य रहती है. साहेबगंज बढ़हरवा प्रखंड के महाराजपुर गांव निवासी सरजीना बीबी की वर्तमान स्थिति भी कुछ इसी तरह के दर्द को बयान करती है. दरअसल, लगभग डेढ़ साल पहले  सरजीना बीबी के पति ने थाने में आत्महत्या कर ली थी. जेसके बाद सरजीना को विधवा पेंशन व आवास देने का आश्वासन दिया गया था. पति को मौत के डेढ़ साल बाद सरजीना को विधवा पेंशन मिलना शुरू हुआ लेकिन उसे जिस आवास का आश्वासन दिया गया था वह अभी तक नहीं मिल पाया है.

क्या है मामला

गौरतलब है कि सरजीना के पति अब्दूल गब्बार को स्थानीय पुलिस 12.9.2017 को घर से उठाकर थाना ले गई थी. परिजनों ने जानकारी दी कि पुलिस ने अब्दुल गब्बार को मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में पूछताछ करने के लिए ले गई थी. पूछताछ के नाम पर अब्दुल को पुलिस ने उठाया था. जिसके बाद 13.9.2017 को परिवार वालों को थाने की ओर से यह जानकारी दी गई कि अबदुल की स्थिति ठीक नहीं है. लेकि जब  परिजन थाना पहुंचे तो उन्हें जानकारी दी गयी कि अब्दुल ने थाने में आत्महत्या कर ली है.

नहीं मिला है इंदिरा आवास

घटना को लगभग डेढ़ साल हो गए हैं. सरजीना बीबी ने मामले के बारे में बताया कि जिला प्रशासन की ओर से कहा गया था कि इंदिरा आवास दिया जाएगा. लेकिन घटना के डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी इस मामले में किसी भी प्राकार की कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. सरजीना ने बताया कि इस संबध में उसने फाॅर्म भी भर कर जमा किया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हो पाया है. घर के छह सदस्यों के नाम से परिवार का राशन कार्ड बना हुआ है. लेकिन राशन भी तीन किलो कम दिया जाता है. उसने बताया कि 30 किलो आटे की जगह 27 किलो राशन ही दिया जाता है.

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अब बीड़ी बांधने का काम करते हैं बच्चे

सरजीना ने जानकारी दी कि अब्दुल ही परिवार चलाता था. ऐसे में उसके जाने के बाद परिवार को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है. उसने कहा कि जिला प्रशासन के आश्वासन के लगभग एक साल बाद विधवा पेंशन शुरू हुआ. लेकिन यह इतना नहीं है कि परिवार का गुजारा हो सके. सरजीना ने बताया कि उसका परिवार अब बीड़ी बांधने का काम करता है. सरजीना के साथ उसकी चार बेटियां और एक छोटा बेटा है. जो स्थानीय सरकारी उत्क्रमित विद्यालय में पढ़ते हैं.

पुलिस के भय से नहीं किया था केस

इस क्षेत्र में काम कर रही यूनाइटेड मिल्ली फोरम ने जब अब्दुल गब्बार के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की तो. परिवार ने बताया कि पुलिस के भय से परिवार ने थाना पर केस दायर नहीं किया था. फोरम के अफजल अनीस ने कहा कि परिवार की स्थिति काफी खराब है. गरीबी और पुलिस के भय से लोगों ने केस दायर नहीं किया. उन्होंने कहा कि बड़ी बात है कि थाना में कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है. और इसपर सरकार व प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं.

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