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भूखे पेट भजन नहीं होता

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Rajesh Das

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देश की हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में मंगलवार को हुई भाजपा की हार में एक प्रमुख वजह छोटे व्यापारियों की नाराजगी को भी माना जा रहा है. इसमें कोई शक नहीं कि छोटे व्यापारी ना सिर्फ सरकारी कायदों से परेशान हैं, बल्कि उनके व्यवसाय में इन कायदों की वजह से एक मन्दी भी छा गयी है. छोटे व्यापारी और उनके संगठन ई कॉमर्स के तेजी से बढ़ते प्रचलन की वजह से  भी सड़कों पर उतरे हुए हैं, और उनकी बात कोई सुन भी नहीं रहा है. जहां 4 वर्षों में आर्थिक आंकड़ों को उपर की ओर जाना चाहिए था, वहीं पॉलिसी पैरालिसिस की वजह से देश का ग्रोथ थमा हुआ सा प्रतीत हो रहा है.

सरकार की गलत नीतियों की वजह से खस्ता हुए आर्थिक हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दशहरे के वक़्त, जो हिंदी पट्टी का एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहार है, व्यापारी GSTR3B रिटर्न्स फ़ाइल कर रहे थे और सरकार ने तय समय तक कोई समय सीमा नहीं बढ़ाई और तय सीमा के समाप्ति के बाद और यह देख लेने के बाद कि कितना राजस्व प्राप्त हो गया, इसे फ़ाइल करने की मियाद 5 दिनों के लिए बढ़ा दी.

जनता सहित छोटे व्यापारियों की टीस भी यही है, जो तकनीक, संचार और मोबाइल के दौर में सभी बातों को तुरंत समझ ले रहे हैं, आपस में साझा भी कर रहे हैं और चुनावों में अपनी बात वोटों के जरिये बयान भी कर दे रहे हैं. भूखे पेट कोई भजन नहीं होता, सरकार समेत देश के राजनीतिज्ञ इस बात को जितना जल्द समझें उतना ही अच्छा है. अगर आप विश्व के विकसित देशों जैसे अमेरिका, इंग्लैंड, नार्वे, स्विट्ज़रलैंड, सिंगापुर आदि की आर्थिक स्थिति पर गौर करें तो पाएंगे कि यहां ना सिर्फ लोगों के पास खर्च करने के लिए डिस्पोजेबल इनकम है, बल्कि उन देशों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी काफी बढ़िया है, उच्च दरजे का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, टूरिज्म विकसित है, तो जनता भी मालामाल है.

सरकार को इस जरूरी विषय पर बिना देर किए एक टास्क फोर्स बनाना चाहिए, जो 10 दिन में अपनी रिपोर्ट दे, जिसे चर्चा के उपरांत अगले 2 सप्ताह में लागू भी किया जाय तो इन छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए देश की आर्थिक ग्रोथ को आगे की ओर बढ़ाया जा सकता है.  इस विषय पर निम्नलिखित सुझावों के प्रकाश में सरकार आगे की ओर बढ़ सकती है-

  1. जबकि GST एक क्रांतिकारी आर्थिक बदलाव है, परंतु इसी दौर में जीएसटी नियमों के त्रुटिपूर्ण स्वभाव की वजह से श्रीमान मुकेश अम्बानी या रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और B2B सेगमेंट में डील कर रहा छोटे से छोटा व्यापारी भी एक ही तराजू में तौल दिया गया है, जो कहीं से भी सही नहीं है. दोनों के लिए जीएसटी कंप्लायंस की प्रणाली एक जैसी है, जिसे तुरंत बदलने की आवश्यकता है.

जैसे, B2B सेगमेंट के छोटे व्यापारी से इनपुट क्रेडिट को आगे बढ़ाने के लिए तीन महीने में एक सरल ब्यौरा लिया जा सकता है और सीधे जीएसटी पोर्टल में उन्हें आउटपुट टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने के लिए सिर्फ एक लाइन का ब्यौरा मांगा जा सकता है- कुल टैक्सेबल सेल्स, कुल टैक्स और पेमेंट का ऑप्शन बस, इससे ज्यादा और क्या चाहिए.  इसके साथ लगातार समय पर और सही रिटर्न फ़ाइल करने वाले व्यापारियों को कुछ छूट भी जरूर प्राप्त होनी चाहिए.

  1. दूसरे, सरकार को जीएसटी दरों को सही कंप्लायंस के लिए नीचे लाने की जरूरत है, वर्तमान में सबसे ज्यादा वस्तु और सेवा कर 18% के दर पर काबिज हैं, जो बहुत ज्यादा है. इसे 0-5-8-18% पर लाते हुए देश के शिक्षा-स्वास्थ्य संस्थानों और तेल उत्पादों आदि को जीएसटी के दायरे में लाने की जरूरत है, ताकि कम दरों की वजह से सही कंप्लायंस की परिपाटी शुरू हो सके और कोई टैक्स इवेजन ना कर सके.
  2. छोटे व्यापारियों को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने श्रेणीवार मुद्रा लोन उपलब्ध कराये हैं, परंतु उनकी पूंजी कहीं अटक ना जाए और फिर से ऋण के रूप में पूंजी प्राप्ति के लिए बैंकों पर कोई दबाव भी ना पड़े, इसके लिए कोई भी सरकारी पहल नहीं हो रही है. सरकार को चाहिए कि छोटे व्यापारियों के द्वारा दिये गए उधार या काम का पैसा 30 दिनों में निश्चित रूप से प्राप्त हों, और उसके उपर अगले 30 दिनों में व्यापारी सूद भी ले सके और अगर 60 दिनों में पूरे पैसे ना मिले फिर चाहे उनके ग्राहक सरकारी ही क्यों ना हो, उन्हें 15 दिनों में एक सहायता ट्रिब्यूनल के माध्यम से उनके पैसे वापस दिलाये जाने चाहिए और दोषियों पर कारवाई भी की जानी चाहिए. इससे बैंकों पर भी पूंजी उपलब्ध कराने का दबाव कम होगा और व्यापारियों के पास अच्छी लिक्विडिटी की वजह से देश में अच्छा आर्थिक ग्रोथ भी दिखाई पड़ेगा.
  3. सही समय पर पूंजी की उपलब्धता किसी भी व्यापार की सफलता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है अतः सरकार को चाहिये कि व्यापारी के रिटर्न और उसके विश्लेषण के पश्चात दिए गए अंकों के आधार पर व्यापारियों को बिजनेस क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं जिससे बिना किसी कागजी खानापूर्ति के व्यापारियों को समय पर लिक्विडिटी उपलब्ध हो सके. इस कार्ड की सीमा और क्रेडिट दर व्यापारी के परफॉर्मेन्स के आधार पर घटाई या बढ़ाई भी जा सकती है.
  4. इसके साथ सरकार को चाहिए कि वे ई कॉमर्स के प्रसार से छोटे व्यापारियों को हो रहे नुकसान की तुरंत समीक्षा करें और करेक्टिव एक्शन लें अन्यथा छोटे व्यापारी स्वतः समाप्त हो जाएंगे और देश में बेरोजगारी सहित अपराध भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा, लोगों के पास डिस्पोसेबल इनकम भी नहीं रहेगा और फिर ई कॉमर्स भी खत्म हो जाएगा.
  5. सरकार को छोटे बिजनेस को लाभ पहुंचाने के लिए नॉर्वे के आर्थिक मॉडल का अध्ययन करना चाहिए, जहां व्यापारी और सरकार के बीच इंस्पेक्टर राज खत्म करने के लिए सबकुछ ऑनलाइन है, उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बढ़िया प्रणाली विकसित की है, जिससे व्यापार बढ़ा है, और लोगों को काम और व्यापार के लिए खासी सहूलियत हो गयी गई है, तेल की खपत कम होने से CAD ( करेंट एकाउंट डेफिसिट) नियंत्रित है और इसका क्षेत्रवार सीधा आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है.चुनाव के नतीजों का यही मूल संदेश है, अगर छोटे व्यापारियों के मनोबल को उठाया जाए, देश तुरंत आगे बढ़ जाएगा!!

श्रेष्ठ भारत के निर्माण के निमित्त और न्यू इंडिया की कामना सहित,

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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