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इंसानियत : चेन्नई एक्सप्रेस बन चुके है खैराचातर के रफीक

पिछले करीब एक दशक से रफीक इस कार्य में लगे हुए हैं.

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Bokaro : जिले के खैराचातर ही नहीं बल्कि अब सुदूर इलाके से बीमार लोगों को चेन्नई तक पहुंचाने के लिए एक्सप्रेस सेवा वर्षो से रफीक अंसारी चला रहें है. जिस कारण लोग इन्हें चेन्नई एक्सप्रेस सेवा कहते नहीं थकते. गांवों के जरूरतमंदों, खासकर हार्ट और कैंसर के मरीजों के लिए रफीक अंसारी ही चेन्नई एक्सप्रेस बने हुए हैं. रफीक अंसारी चेन्नई समेत दक्षिण के अन्य बड़े अस्पतालों तक हार्ट, कैंसर आदि के मरीजों को न केवल पहुंचाने का काम करते हैं. बल्कि उनके साथ रह कर उनकी सेवा, देखभाल भी पूरी जतन के साथ करते हैं. पिछले करीब एक दशक से रफीक इस कार्य में लगे हुए हैं.

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लगभग एक सौ से अधिक मरीजों को चेन्नई, बेंगलुर समेत दक्षिण भारत के अन्य बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने का काम कर चुके हैं. कई बार तो उन्हें मरीज के साथ महीना दो महीना तक वहीं रह जाना पड़ता है. इसके एवज में उन्हें मरीज के परिजनों से जो भी मामूली पैसा मिलता है, उसी से संतुष्ट होते हैं. रफीक बताते हैं कि इसे वह सेवा भाव के तौर पर करते हैं और इसमें उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है. पैसा तो वह अपने गांव में रह कर इससे कई गुणा अधिक कमा सकते है.

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मरीजों के सेवा के लिए छोड़ा व्यवसाय

रफीक अंसारी पेशा से टेलर मास्टर के साथ-साथ क्षेत्र का कुशल बिजली मिस्त्री है. करीब एक दशक पहले अपनी आंख का इलाज कराने के लिए उन्हें पहली बार दक्षिण जाने का मौका मिला. उन्हें शंकर नेत्रालय जाना था, पर जानकारी के अभाव में दूसरे अस्पताल पहुंच गये. हालांकि उन्होंने सही जगह पहुंच कर अपना इलाज करा लिया, पर इस क्रम में उन्हें काफी कुछ सहना पड़ा और इसी क्रम में वहां इलाज के बारे में जानकारी भी हासिल हुई. वहां से लौटने के कुछ दिनों बाद ही एक बैंककर्मी को कैंसर का इलाज के लिए चेन्नई ले जाने की जरूरत पड़ी. परिजनों ने रफीक की मदद ली और उन्हें लेकर चेन्नई गये. कई दिनों तक वहां रहकर इलाज कराने के बाद वह लौटे. इसके बाद तो सिलसिला ही चल पड़ा. खैराचातर समेत आसपास के गांवों के लोगों को जब भी चेन्नई या दक्षिण के अन्य किसी अस्पताल में किसी का इलाज कराने की जरूरत पड़ी, रफीक की सेवा ली गयी. बार-बार आने-जाने से रफीक को वहां की अच्छी-खासी जानकारी हो गयी. वह मरीज को पहुंचाने के साथ-साथ हर तरह की मदद करते है. क्षेत्र में लोग उन्हें चेन्नई एक्सप्रेस के उपनाम से भी पुकारने लगे हैं.

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रफीक ने बताया कि इस कार्य में उन्हें काफी संतुष्टि मिलती है और जब तक संभव होगा वह लोगों की मदद करते रहेंगे.

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