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इंसानों ने धरती को खतरे में डाला, चौथाई हिस्से में ही जंगल बचे, एक सदी पूर्व 85 प्रतिशत थे जंगल

पृथ्वी पर मौजूद सूनसान जंगल का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महज पांच देशों की सीमाओं में है

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Nw Desk : जीवाश्म इंधन, लकड़ी और मांस के भारी इस्तेमाल के साथ ही तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण पृथ्वी की महज 23 प्रतिशत  जमीन ही अब ऐसी बची है जो कृषि और उद्योगों के असर से अछूती है. एक सदी पूर्व ऐसी जमीन का हिस्सा लगभग 85 प्रतिशत था. बता दें कि साल 1993 से 2009 के बीच लगभग भारत के आकार का बियाबान जंगल इंसानी बस्तियों, खेतों और खदानों में बदल गया. जान लें कि संरक्षणवादी गुट डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने चेतावनी दी है कि पिछले 40 सालो में मछलियों, चिड़ियों और उभयचरों, सरीसृपों और स्तनधारियों की आबादी औसतन 60 फीसदी कम हो गयी है. बता दें कि पृथ्वी पर मौजूद सूनसान बीहड़ों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महज पांच देशों की सीमाओं में है. इन जंगली इलाकों में हजारों ऐसे जीवों को आश्रय मिला है जो जंगलों की कटाई या जरूरत से ज्यादा मछली के शिकार की वजह से लुप्त होने की कगार पर हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली मौसमी घटनाओं के खिलाफ यह सबसे अच्छी सुरक्षा दे रहे हैं.

साइंस जर्नल नेचर में छपी क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी में संरक्षण विज्ञान के प्रोफेसर जेम्स वाटसन की रिपोर्ट के अनुसार इस अनछुए जंगल का दो तिहाई हिस्सा ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, रूस और अमेरिका में है. जेम्स वाटसन कहते हैं कि पहली बार हमने जमीनी और समुद्री दोनों बीहड़ों का नक्शा तैयार किया है जो बताता है कि अब ज्यादा कुछ बचा नहीं है. महज कुछ ही देश हैं जो इस अनछुई जमीन के मालिक हैं

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वाटसन का कहना है कि इन जंगलों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है

ज्यादातर देशों में पर्यावरणवादी सरकारों पर जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में सुस्त रहने के आरोप लगते हैं. रिपोर्ट ऐसे वक्त में आयी है जब वैज्ञानिक ज्यादा उपभोग के कारण जीवों के लुप्त होने की चेतावनी दे रहे हैं. रूस के विशाल टाइगा जंगल में ऐसे पेड़ों की तादाद खरबों में है जो वातावरण से कार्बन सोख कर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के असर को कम कर देते हैं. हालांकि बीते साल राष्ट्रपति पुतिन ने यह कह कर इनके संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता को कमजोर कर दिया कि जलवायु परिवर्तन के लिए इंसान जिम्मेदार नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पेरिस की ऐतिहासिक डील से अमेरिका को बाहर ले जा चुके हैं और ब्राजील ने एक दक्षिणपंथी और सेना के ऐसे पूर्व कैप्टेन को राष्ट्रपति चुना है जिसने अमेजन के वर्षावनों की सुरक्षा के मौजूदा कानूनों को कमजोर करने की शपथ ली है. वाटसन का कहना है कि इन जंगलों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है, लेकिन अब व्यवहार को बदलने और नेतृत्व दिखाने की जरूरत है क्योंकि इन बीहड़ों को बचाने के लिए उद्योगों और लोगों को यहां पहुंचने से रोकना होगा.

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