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एंबुलेंस चालकों की हड़ताल और रिम्स प्रबंधन की जिद के आगे फिर शर्मसार हुई मानवता

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  • पोस्टमॉर्टम यूनिट के बाहर मृतकों के शव लेकर ठंड में खड़े रहे परिजन
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Ranchi : रिम्स में एक बार फिर मानवता शर्मसार होती दिखी. फिर से एक बार राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में मरीजों के परिजनों को प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा उठाना पड़ा. रिम्स की पोस्टमॉर्टम यूनिट के बाहर डेडबॉडी निकालकर यूं ही छोड़ दिया गया. दूर-दराज से आये लोग अपने मरीज की डेडबॉडी को ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन एंबुलेंस चालकों की हड़ताल के कारण परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिली. ठंड के मौसम में देर शाम तक डेडबॉडी यूं ही बाहर पड़ी रही और बेबस व लाचार परिजन डेडबॉडी के पास ही बैठकर एंबुलेंस का इंतजार करते रहे. दरअसल रिम्स के निजी एंबुलेंस चालक मंगलवार को अचानक हड़ताल पर चले गये. एंबुलेंस चालक पार्किंग के लिए स्थायी स्थान देने की मांग कर रहे थे, लेकिन एंबुलेंस चालकों की हड़ताल और रिम्स प्रबंधन की जिद के आगे बेबस और लाचार मरीजों व उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. हड़ताल पर जाने से लगभग 100 निजी एंबुलेंस को बंद कर दिया गया. इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ा.

प्रबंधन ने खड़े किये हाथ

मृतकों के परिजनों ने जब निदेशक डॉ डीके सिंह से मिलकर अपनी समस्या बतानी चाही, तो परिजनों को निदेशक के मीटिंग में होने की बात कहकर टाल दिया गया. इसके बाद जब परिजनों ने अन्य प्रभारियों से मिलकर अपना दुखड़ा बताया, तो उनसे कहा गया कि हमारा काम था पोस्टमॉर्टम करना, हमने कर दिया, बाकी अब तुमलोग समझो. वहीं, जब मीडिया ने निदेशक से मिलकर स्थिति की जानकारी दी, तो डॉ डीके सिंह ने कहा कि एंबुलेंस चालक मनमानी कर रहे हैं. उन्हें पार्किंग की जगह अलग से दी गयी है. वे वहीं पार्किंग करें और टोकन सिस्टम से काम करें.

शव ले जाने के इंतजार में खड़े रहे परिजन

एंबुलेंस चालकों की हड़ताल के कारण परिजन अपने मरीज की डेडबॉडी को ले नहीं जा सके. सुबह से लेकर शाम तक परिजन पोस्टमॉर्टम विंग के बाहर खड़े रहे. रिम्स के निजी एंबुलेंस चालाक दूसरे हॉस्पिटल से भी एंबुलेंस को अंदर आने नहीं दे रहे थे. कोई परिजन अगर अपने संपर्क से बाहर की एंबुलेंस बुलाना भी चाह रहे थे, तो उन्हें लाने नहीं दिया गया, कई बार हाथापाई की भी नौबत आ गयी.

रिम्स के पास सिर्फ आठ सरकारी एंबुलेंस

रिम्स के पास सिर्फ आठ सरकारी एंबुलेंस ही हैं, जिनमें चार कार्डियाक एंबुलेंस, एक शव वाहन, एक टाटा सूमो एंबुलेंस और दो बड़ी एंबुलेंस मरीजों को ले जाने के लिए उपलब्ध है. शव वाहन पिछले करीब ढाई माह से खराब पड़ा हुआ है, जिस कारण रिम्स में इलाज कराने आये मरीजों की मौत होने के बाद उनके शव को परिजनों को अपने घर ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है. वहीं, रिम्स की टाटा सूमो एंबुलेंस भी करीब एक वर्ष से खराब पड़ी हुई है. जबकि, अस्पताल की क्षमता 1500 है और प्रतिदिन 300 से 400 मरीज इस हॉस्पिटल में इलाज कराने आते हैं. ऐसे में निजी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल समाप्त नहीं हुई, तो स्थिति और भयावह हो सकती है.

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