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पीएलएफआई के संरक्षण में हो रही है झारखंड में मानव तस्‍करी

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Ranchi: झारखंड राज्‍य के गठन हुए 18 साल हो चुके हैं. इसके बाबजूद भी राज्य सरकार मानव तस्करी रोक पाने में नाकाम रही है. रांची, खूंटी, सिमडेगा और पश्चिम सिंहभूम जिलों से बड़ी तादाद में लड़कियां बाहर भेजी जा रही हैं. झारखंड से मानव तस्करी कोई नयी बात नहीं है. मानव तस्करी में एक नया बात सामने आयी है. मिली जानकारी के अनुसार प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीएलएफआई अब मानव तस्करों के साथ मिलकर मानव तस्करी धंधा शुरू किया है.

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पीएलएफआई के संरक्षण में बच्चों का अपहरण

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हाल के दिनों में खूंटी, सिमडेगा, गुमला जैसे जिलों से बच्चे गायब हो गये थे. गायब बच्चों की जब जांच की गयी तो पता चला कि प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई के सरंक्षण में बच्चों अपहरण किया गया है. मिली जानकारी के अनुसार पीएलएफआई और मानव तस्करों के बीच मिलीभगत के चलते अब झारखंड की बेटियों को बाजार में बेच रहे हैं. इसके बदले में पीएलएफआई को मानव तस्करों के द्वारा कमाई का हिस्‍सा दिया जा रहा है.

परिजनों को धमकाते हैं पीएलएफआई

झारखंड में मानव तस्कर और पीएलएफआई के बीच हुई मिलीभगत के कारण लड़कियों की तस्करी ज्यादा बढ़ गयी है. गांव में पीएलएफआई संगठन के लोग बच्चियों के परिजनों को धमकाते हैं और तस्कर लड़कियों को ले जाते हैं. झारखंड में मानव तस्करी पहले भी बड़ी समस्या थी और अब भी है. पिछले कुछ वर्षों से युवक-युवतियों के अलावा बच्चों की भी तस्करी की सूचनाएं मिल रही हैं.  इनमें से अधिकतर आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक शोषण के शिकार हो कर बंधुआ मजदूर का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं.

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हर साल 30 से 35 हजार युवक-युवतियों की तस्करी

जानकारी के मुताबिक 30 से 35 हजार युवक-युवतियों की तस्करी हो रही है. पुलिस की नजर में मानव तस्करी का मामला भले ही कम हुआ है. लेकिन, हकीकत में मानव तस्करी कम नहीं हुआ है. अब मानव तस्करी से ज्यादा मामले नवजात की तस्करी के आ रहे हैं. पहले इसका केंद्र दिल्ली था, अब मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, राजस्थान व गुजरात भी हो रहा है.

तस्‍करी के लिए दी जाती है शादी का झांसा

युवतियों की तस्करी के मामले में फेक मैरेज का मामला भी सामने आ रहा है. यहां की लड़कियों को शादी के नाम पर हरियाणा व राजस्थान में ले जाया जा रहा है. राज्य में ट्रैफिकिंग का कोई डाटाबेस नहीं है. कोई मानव तस्कर का आरोपी पकड़ाता भी है तो पुलिस उसे सजा नहीं दिला पाती है.

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1114 बच्चों में किसी का नहीं मिला सुराग

झारखंड में मानव तस्करी को रोकने के लिए अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है. यही कारण है कि अब भी राज्य से लापता 1114 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. एक आंकड़े के अनुसार राज्य में 2489 बच्चों के मिसिंग का मामला ही दर्ज हुआ है, जिसमें 1405 बच्चे रेस्क्यू कराये जा चुके हैं.

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क्या कहते हैं झारखंड पुलिस के आईजी

झारखंड पुलिस के आईजी आशीष बत्रा का कहना है कि कुछ मामले में पता चला है कि पीएलएफआई द्वारा कुछ लड़के और लड़कियों को बहला फुसलाकर कर अपने साथ में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है. कुछ लोगों को काम कराने के लिए बाहर ले जाया जा रहा है. इस पर अनुसंधान किया जा रहा है.

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