न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

इंसानों ने 20 सालों  में धरती से 1500 करोड़ पेड़ काट डाले, चेत जायें नहीं तो…

नेचर मैगजीन के अनुसार  विभिन्न उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पृथ्वी पर करीब तीन से चार लाख करोड़ पेड़ हैं. इनमें से सबसे ज्यादा पेड़ 64,800 करोड़ पेड़ रूस में है.

38

 NewDelhi : पिछले 20 सालों  में इंसानों ने धरती से 1500 करोड़ पेड़ काट दिये है.. नतीजतन क्लाइमेट चेंज करने वाली CO2 गैस का उत्सर्जन बढ़ा है. . इस कारण पूरी दुनिया में तापमान बढ़ रहा है.  बता दें कि दुनिया में पिछले पांच वर्षों में प्रदूषणआठ फीसदी बढ़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के तीन हजार शहर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं.

eidbanner

मध्य-पूर्व एशिया के शहरों में जहां तेजी से विकास हो रहा है, वहां प्रदूषण की मात्रा 10 गुना ज्यादा है. प्रदूषण की वजह से हो रहे क्लाइमेट चेंज का असर दुनिया की कुछ बेहद खूबसूरत जगहों पर पड़ रही है. ऐसी आशंकाएं हैं कि अगले 100 सालों में दुनिया से 10 जगहों का नामोनिशान मिट जायेगा.

इसे भी पढ़ेंःचुनावी बॉन्ड : EC को BJP, कांग्रेस सहित अन्य दलों ने अब तक नहीं दिया चंदे का ब्यौरा

सुंदरबन प्रदूषण और जंगल के कटाव से खत्म हो रहा है

इन 10 जगहों में सेशेल्स शामिल है. यह खूबसूरत पर्यटन स्थल हिंद महासागर में मैडागास्कर के तट के पास है. यहां के तट अब कट रहे हैं. इसके अलावा तंजानिया के माउंट किलिमंजारो की बर्फ पिघल रही है. 1912 से अब तक 85% बर्फ पिघल चुकी है.   ग्वाटेमाला का मिराडोर बेसिन और तिकाल नेशनल पार्क लूटपाट और जंगल जलाने से बर्बाद हो रहा है. यहां माया सभ्यता के अवशेष हैं.  गंगा की डेल्टा पर मौजूद सुंदरबन प्रदूषण और जंगल के कटाव से खत्म हो रहा है. यहां समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है.  अर्जेंटीना के ग्लेशियर्स कम बारिश और तेजी से बढ़ते तापमान की वजह से पिघल रहा है.

स्पेन के अंडालुसिया पहाड़ पर स्थित जारा-डे-ला-सियेरा के जंगल, वन्यजीव और हरियाली बढ़ते तापमान और कम बारिश से खत्म हो रहे हैं. मोंटाना ग्लेशियर नेशनल पार्क में कभी 150 ग्लेशियर थे जो अब घटकर 25 बचे हैं. अगले 15 सालों में यहां एक भी नहीं बचेगा. माचू-पीचू पेरू स्थित  विश्व धरोहर लगातार हो रहे भूस्खलन से यह खत्म हो रही है. इटली का खूबसूरत शहर वेनिसः   पिछले कुछ सालों से बाढ़ का शिकार हो रहा है.   जॉर्डन और इजरायल की सीमा पर स्थित मृत सागर (डेड सी) 40 सालों में 80 फीट घट गया है. लोग जिस तरह से जॉर्डन नदी के पानी का उपयोग कर रहे हैं, मृत सागर 50 सालों में खत्म हो जायेगा.

इसे भी पढ़ेंः वायुसेना के लापता विमान का अबतक नहीं कोई सुराग, खराब मौसम के कारण सर्च ऑपरेशन प्रभावित

Related Posts

लोकसभा में जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश

विधेयक के कानून बनने पर अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में रहनेवालों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों के समान आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.

mi banner add

 पृथ्वी पर करीब तीन से चार लाख करोड़ पेड़ हैं

पिछले 20 साल में इंसानों ने धरती से 1500 करोड़ पेड़ों को काट डाले. नेचर मैगजीन के अनुसार  विभिन्न उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पृथ्वी पर करीब तीन से चार लाख करोड़ पेड़ हैं. इनमें से सबसे ज्यादा पेड़ 64,800 करोड़ पेड़ रूस में है. कनाडा में 31,800 करोड़, अमेरिका में 22,200 करोड़ और चीन में 17,800 करोड़ पेड़ हैं. पेड़ों का सबसे ज्यादा घनत्व फिनलैंड में 72 हजार पेड़ प्रति वर्ग किमी है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले 30 सालों में 23,716 औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए 15 हजार वर्ग किमी के जंगल काट दिए गए. देश में करीब 250 वर्ग किमी के जंगल हर साल ढांचागत विकास के भेंट चढ़ जाते हैं.

पूरी दुनिया में 1999 से 2019 तक करीब 7.87 करोड़ कारें सड़कों पर उतरीं. अकेले अमेरिका में 75% कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन गाड़ियों की वजह से होता है. हालांकि, अब गाड़ियों में किये गये  तकनीकी बदलावों के कारण प्रदूषण कम हो रहा है. डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं की वजह से दुनिया में करीब 3.85 लाख लोगों की मौत हो रही है. गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार- चीन, भारत, यूरोपीय देश और अमेरिका हैं. डीजल के धुएं से मरने वालों में 70% सिर्फ इन्हीं चारों देशों में हैं.

इसे भी पढ़ेंः ममता बनर्जी भाजपा पर लाल, कहा-जो हमसे टकरायेगा,  वह चूर-चूर हो जायेगा…

पृथ्वी पर 188 करोड़ घर, 2041 तक चाहिए 43 करोड़ घर

पृथ्वी पर अभी करीब 188 करोड़ घर हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार अगले 22 साल में पूरी दुनिया को बढ़ती हुई आबादी के मुताबिक 43 करोड़ और मकानों की जरूरत होगी. इन मकानों को बनाने के लिए जंगल कटेंगे. मकानों के आसपास ढांचागत विकास होगा. ऐसे में पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. शहरों की हवाओं में धूल के कण बढ़ेंगे. इनसे प्रदूषण में कमी लाने की मुहिम पर असर पड़ेगा.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: