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संतालपरगना के 6 जिलों में DMO की मिलीभगत से गिट्टी रॉयल्टी में भारी घोटाला, सरकारी खजाने को अरबों का चूना

खान उपनिदेशक की चिट्ठी से हुआ खुलासा- प्रति घनमीटर 118 रुपये की कम वसूली, रेलवे ने भी बिना चालान खनिजों की ढुलाई कर लगायी करोड़ों की चपत

Anand Kumar

Sanjeevani

वित्तीय संकट झेल रहे झारखंड के लिए बुरी खबर है. संतालपरगना में पिछले दो साल से पत्थर का खनन करने वाले पट्टाधारियों और क्रशर मालिकों ने खनन विभाग के पदाधिकारियों और रेलवे की मिलीभगत से सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है. दो साल से गिट्टी की रॉयल्टी में प्रति घन मीटर 118 रुपये का चूना सरकारी खजाने को लगाया जा रहा है. संताल के सभी छह जिलों से पिछले दो साल में निकाली गयी प्रति घनमीटर गिट्टी को 118 से गुणा करें, तो यह राशि अरबों में जा सकती है. यह सारा खेल जिला खनन कार्यालयों द्वारा किया जा रहा है. मजे की बात यह है कि इस मामले का खुलासा खुद संतालपरगना के खान उपनिदेशक ने जिला खनन पदाधिकारियों को लिखे पत्र में किया है. उन्होंने सरकारी राजस्व को करोड़ों-करोड़ों की क्षति की बात कहते हुए इसमें साफ तौर पर खनन पदाधिकारियों को संलिप्त बतायी है. यही नहीं, उपनिदेशक के अनुसार रेलवे भी राज्य के राजस्व को चूना लगाने में पीछे नहीं है. रेलवे द्वारा बिना परिवहन चालान के खनिजों की ढुलाई करने से सरकार को करोड़ों की राजस्व क्षति हुई है. उन्होंने रेलवे से पिछले 3 साल में ढोये गये खनिजों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बता दें कि संतालपरगना राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनमके भाई बसंत सोरेन और भाभी सीता सोरेन के अलावा स्पीकर रविंद्रनाथ महतो भी संतालपरगना का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में पट्टाधारियों और खनन विभाग की मिलीभगत से जारी इस गड़बड़ी को दुस्साहस की पराकाष्ठा कहा जा सकता है.

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उपायुक्त होते हैं जिलास्तरीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष

अवैध खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन एवं व्यापार पर रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा जिलास्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है. जिलों के उपायुक्त इस टास्क फोर्स के अध्यक्ष होते हैं. उनके द्वारा समय-समय पर वैध खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन एवं व्यापार के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और समय-समय पर इन कार्रवाई की समीक्षा भी की जाती है. ऐसे में दो साल से चल रही इस गड़बड़ी की ओर छह जिलों के किसी भी टास्क फोर्स का इस मामले पर ध्यान नहीं जाना कई सवाल खड़े करता है.

बन रही गिट्टी मगर रॉयल्टी ले रहे बोल्डर का

दरअसल खनन के बाद पत्थर को या तो बोल्डर का रूप दिया जाता है अथवा स्टोन चिप्स यानी गिट्टी का. 16 सितंबर 2019 के पहले बोल्डर और गिट्टी दोनोंं के लिए 105 रुपये प्रति घन मीटर की दर से रॉयल्टी वसूली जाती थी. लेकिन  6 सितंबर 2019 के बाद सरकार ने इस दर को संशोधित करते हुए बोल्डर की दर 132 रुपया और प्रति घन मीटर और गिट्टी यानी स्टोन चिप्स के लिए 250 रुपया कर दिया. लेकिन संताल परगना के सभी 6 जिलों – दुमका, देवघर, पाकुड़., साहिबगंज, जामताड़ा और गोड्डा में खनन किये गये सभी पत्थरों को बोल्डर बताकर रॉयल्टी ली जा रही है, जबकि बोल्डर और गिट्टी की दर में 118 रुपये का अंतर है. खान उपनिदेशक ने सभी 6 जिलों के जिला खनन पदाधिकारियों को पत्र लिखकर सरकार को हो रही राजस्व की क्षति की ओर ध्यान दिलाया है.

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एजी ने भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में उठाई उंगली 

जिला खनन पदाधिकारियों को लिखे पत्र में खान उपनिदेशक ने कहा है कि सभी जिला खनन कार्यालयों में क्रशर में चिप्स बनाने के लिए भेजे जानेवाले पत्थरों पर 250 रुपये प्रति घनमीटर के बजाय 132 रुपये प्रति घन मीटर की दर से वसूली की जा रही है. यह विधिसम्मत नहीं है. इसकी जानकारी रहने के बाद भी जिला खनन पदाधिकारियों ने 118 रुपये प्रति घन मीटर की दर से कम वसूली की. इससे सरकारी राजस्व में कमी आयी है और इसमें खनन पदाधिकारियों की सहभागिता भी दिखाई देती है. उपनिदेशक ने लिखा है कि खनन पदाधिकारियों को 16 सितंबर 2019 के बाद से की गयी राजस्व वसूली की विस्तृत मांगी गयी थी, लेकिन अभी तक किसी खनन पदाधिकारी ने यह जानकारी नहीं दी है. उपनिदेशक ने कहा है कि यह बताता है कि पट्टाधारियों से संशोधित घर पर रॉयल्टी की वसूली नहीं करने में खनन पदाधिकारियों की सहभागिता है. उपनिदेशक ने लिखा है कि महालेखाकार ने भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में इस पर आपत्ति उठाई है, जिसपर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. उपनिदेशक ने जिला खनन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पट्टेधारियों से सरकारी अधिसूचना दिनांक 16,09.2019 के आलोक में नियमानुसार अद्यतन शतप्रतिशत बकाया राशि की वसूली  करने के लिए नियमानुसार कार्यवाही करें और सात दिनों के अंदर इसकी पूरी सूचना उपनिदेशक कार्यालय को उपलब्ध करायें.

रेलवे से मांगा तीन साल की खनिज ढुलाई का ब्योरा

खान उपनिदेशक ने पूर्वी रेलवे के मालगोदाम अधीक्षक को पत्र लिखकर कहा है कि संतालपरगना के सभी 6 जिलों में स्थित रेलवे साइडिंग से कोयला, स्टोन और स्टोन चिप्स आदि का रेल परिवहन बिना परिवहन चालान लिये ही किया जा रहा है. रेलवे द्वारा माल ढुलाई किये जाने के बाद विलंब से परिवहन चालान दिया जाता है. पत्र में कहा गया है कि रेलवे का यह कार्य झारखंड मिनरल (प्रिवेंशन ऑफ इल्लीगल माइनिंग ट्रांसपोर्टेशन एंड स्टोरेज) रूल्स-2017 के विरुद्ध है. उपनिदेशक ने कहा है इस नियम के तहत कोई भी खनिज का जिम्स पोर्टल से निर्गत चालान के बिना न तो खदान से कहीं परिवहन किया जा सकता है और न ही उसका स्थान परिवर्तन किया जा सकता है. लेकिन रेलवे के स्थानीय मुख्य यार्ड मास्टर, माल गोदाम अधीक्षकों और स्टेशन मैनेजरों द्वारा बिना जिम्स पोर्टल से निर्गत चालान के ही जिलों के माइनिंग डीलर और डिस्पैचर को आरआर (RR) निर्गत किया जा रहा है. उन्होंने कहा है कि नियम विरुद्ध खनिजों के परिवहन से सरकार को करोड़ों के राजस्व की क्षति हो रही हैॉ. उपनिदेशक ने रेलवे से भी पिछले 3 वर्षों में परिवहन किये गये खनिजों के विस्तृत विवरण की मांग की है.

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