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कैसे बनेगा वीजा? नहीं मिल रहा है येल्लो फीवर का टीका

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Dhanbad: धनबाद में पीत ज्वर का टीका किसी भी अस्पताल में नहीं मिल रहा है. जिससे अफ्रीकी और अमेरिका के देशों में जाने का अरमान रखने वाले लोगों को डर समा रहा है कि उनका वीजा कैसे बनेगा? धनबाद के सबसे बड़े और सरकारी अस्पताल पीएमसीएच तक में येल्लो फीवर का टीका नहीं मिलता है. हैरान करने वाली बात तो यह है कि इस टीका के बारे में तो जिले के स्वास्थ्य विभाग में किसी को कोई जानकारी तक नहीं है. इसकी जानकारी एक जरूरतमंद ने दी.

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उन्होंने ने बताया कि पीएमसीएच में जब इस टीका के बारे में पूछा तो वहां के किसी भी डॉक्टर या स्टाफ से इसकी जानकारी नहीं मिली. उनसे कहा गया कि हमने इसके बारे में सुना तक नहीं है. इसके बाद पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक कार्यालय में पता करने पर बताया गया कि हमारे अस्पताल ये टीका उपलब्ध नहीं है. सिविल सर्जन ऑफ़िस में पता कीजिये. वहां सिविल सर्जन कार्यालय में भी लोग कुछ बता पाने में असमर्थ थे. सिविल सर्जन कार्यालय के ही बैठनेवाले संदीप तिरयार पूरे जिले में हर प्रकार के टीके का काम देखते हैं. उन्होंने भी पीत ज्वर टीके की जानकारी होने से मना कर दिया. कहा कि डब्ल्यूएचओ के कार्यालय में शायद कुछ जानकारी मिल जाये.

कहां लगेगा पीत ज्वर का टीका ?

जिले में पीत ज्वर टीके से जुड़ी जानकारी नहीं मिल पाने से ये सवाल खड़ा होना लाजमी है कि टीका कहां लगेगा? पूरे जिले में क्या किसी भी अस्पताल को यह टीका लगाने की मान्यता नहीं मिली है? ऐसे में क्या जिले के लोगों को नहीं मिलेगा पीतज्वर का टीका? विदेश जाने की सोच रखने वाले को कैसे मिलेगा वीजा और पीतज्वर(येल्लो फीवर) टीका का प्रमाणपत्र?

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अफ्रीकन देश जाने के लिये जरूरी है पीत ज्वर का टीका

रांची, कोलकाता जैसी जगह में वीजा प्राप्ति के लिये पीतज्वर(येल्लो फीवर) का टीका लेने का प्रमाणपत्र होना जरूरी है. बिना प्रमाणपत्र के आपको अफ्रीका और अमेरिका के कुछ देशों में जाने के लिये वीजा नहीं मिलता है. नियमानुसार यह टीका केवल सरकार के गिने- चुने अस्पतालों में ही उपलब्ध है. यह टीका लगाने का कुल अनुमानित खर्च 2500 रुपये तक है.

क्या है पीत ज्वर टीका? और यह क्यों है जरूरी?

पीत ज्वर संक्रमित मच्छरों से फैलने वाला एक गंभीर वायरल रक्तस्रावी रोग है. इसके नाम में ‘पीत’ पीलिया के लिए आया है, जो कुछ रोगियों को प्रभावित करता है. पीत ज्वर से गंभीर रूप से प्रभावित जिन व्यक्तियों का इलाज नहीं किया जाता उनमें से 50 प्रतिशत की मृत्यु हो जाती है. यह वायरस अफ्रीका और लेटिन अमेरिका के कटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक फैलता है. यहां की कुल जनसंख्या 900 मिलियन से अधिक है.

पीत ज्वर का वायरस फ्लेविवायरस जीनस का एक अर्बोवायरस है और इसका प्राथमिक विषाणु मच्छर होता है. यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायरस को ले जाता है. प्रथमतः बंदरों के बीच, बंदरों से मनुष्यों में और फिर मनुष्यों से मनुष्यों में. अनेक अलग-अलग प्रकार के एडीज और हिमोगोगस प्रजाति के मच्छर वायरस को फैलाते हैं. मच्छर या तो घरों के आस-पास (घरेलू), जंगल में (जंगली) अथवा दोनों जगहों पर (अर्ध-घरेलू)पनपते हैं.

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भारत में नहीं होता पीत ज्वर

पीत ज्वर भारत में नहीं होता. भारत में पीत ज्वर के फैलने की परिस्थितियां बहुत अनुकूल, बहुत अधिक संख्या में मच्छर विषाणुओं की मौजूदगी और ग्रहणशील जनसंख्या के कारण नहीं है.

पीत ज्वर को रोकने के लिये भारत सरकार एक कठोर पीत ज्वर टीकाकरण कार्यक्रम का अनुसरण कर रहा है. भारत आने वाले सभी यात्रियों अथवा भारत से पीत ज्वर से प्रभावित देशों में जाने वाले यात्रियों के पास पीत ज्वर के लिए एक वैध अंतरराष्ट्रीय टीकाकरण कार्ड होना चाहिए अथवा उन्हें 6 दिन की अवधि के लिए अथवा पीत ज्वर टीकाकरण के वैध होने तक के लिए (जो भी पहले हो) संगरुद्ध किया जाएगा.

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भारत में पीत ज्वर के प्रवेश को रोकने के लिए भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम 1969 और 2005 और वायुयान स्वास्थ्य नियमावली 1954 और पत्तन स्वास्थ्य नियमावली 1955 के अनुपालन में, सभी प्रवेश बिंदुओ पर पीत ज्वर रोग से बचाव के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच करने की कार्यनीति अपनाई हुई है. वर्षों से स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर में 27 पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्र स्थापित किए हैं. इन केन्द्रों में टीकाकरण में वृद्धि हुई है और पीत ज्वर टीकाकरण की मांग वर्ष 2008 की 90000 से बढ़ कर लगभग 1,32,000 हो गई है.

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