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इस चार्ली चैपलिन को कितना जानते हैं आप

चार्ली चैपलिन ने हिटलर की मज़ाक उड़ाने के लिए दी ग्रेट डिक्टेटर बनाई थी, इस फिल्म के बहाने चार्ली ने वो बयान दिया, जिसे बोला उस समय जरूरी था. और शायद आज भी जरूरी है. यहां प्रस्तुत है उस ऐतिहासिक बयान का हिंदी अनुवाद. अनुवाद किया है Himanshu Kumar ने. ये पोस्ट उनकी फेसबुक वाल से लिया गया है:

मुझे माफ़ कीजियेगा लेकिन मैं कोई शासक नहीं बनना चाहता, वो मेरा काम नहीं है, मैं किसी पर फतह हासिल कर के उस पर हुकूमत नहीं करना चाहता. अगर मुमकिन हो सके तो मैं हर एक की मदद करना चाहता हूं यहूदियो, गैर यहूदियों, गोरों की कालों की सबकी मदद.

हम सब एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं. यह इंसान की फिरत है सभी इंसान ऐसा ही करना चाहते हैं. हम सभी एक दूसरे को खुश देखना चाहते हैं, इंसान किसी को दुःख देना नहीं चाहता. हम एक दूसरे से नफरत करना और एक दूसरे को नीचा दिखाना नहीं चाहते. इस दुनिया में सभी के रहने के लिए लिए भरपूर जगह है.

यह अच्छी धरती बहुत अमीर है और यह हम सबकी ज़रूरत पूरी कर सकती है. हमारी ज़िन्दगी आजादी और ख़ूबसूरती से भरपूर हो सकती है ,लेकिन हम रास्ता भूल गये.

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लालच ने इंसान की आत्मा को ज़हरीला बना दिया; इसने दुनिया में नफरत की दीवारें खडी कर दीं, यह हमें दुःख और खून खराबे तक ले आया है. हमने रफ़्तार तो हासिल कर ली है, लेकिन हमने अपने-आप को इसमें कैद कर लिया है.

मशीनें जो हमें भरपूर सामान तो देती हैं उन्होंने हमें हमारी ज़रूरतों का गुलाम बना दिया है. हमारे ज्ञान ने हमें निराशावादी बना दिया है. हमारी चालाकी ने हमें सख्त और दुष्ट बना दिया है.

हम सोचते तो बहुत ज्यादा हैं लेकिन महसूस बहुत थोडा करते हैं. हमें इंसानियत की ज्यादा ज़रूरत है चालाकी की कम, हमें दयालुता और शराफत की ज़रूरत है. इन चीज़ों के बगैर ज़िन्दगी बहुत हिंसक बन जायेगी और सब कुछ खत्म हो जाएगा. हवाई जहाज़ और रेडियो हमें एक दूसरे के करीब ले आये हैं.

इस तरह की खोज चीख चीख कर इंसान की भीतरी अच्छाई को आवाज़ दे रही है, दुनिया भर के इंसानों के भाईचारे को आवाज़ दे रही है, हम सब की एकता की ज़रुरत को आवाज़ दे रही है.

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इस वख्त भी जब की मेरी आवाज़ सारी दुनिया के लाखों लोगों तक पहुंच रही है, लाखों मर्द, औरतें और बच्चे नाउम्मीदी में डूबे हुए हैं. ये सब ऐसी व्यवस्था के शिकार हैं जो लोगों पर ज़ुल्म करती है और बेगुनाहों को जेलों में कैद करती है.
जो लोग मुझे सुन पा रहे हैं, मेरा उनके लिए सन्देश है, निराश मत होइए.

आज हम जिस दुःख से घिरे हुए हैं वो लालच की उपज है. लेकिन जिस तरफ इंसानी सभ्यता जा रही है उसे देख कर डरिये मत. इंसानी नफरत का खात्मा होगा, तानाशाह खत्म हो जायेंगे. इंसानों की जो शक्ति तानाशाहों ने छीन ली है वो इंसानों को फिर से वापिस मिल जायेगी. और जब तक इंसान जिंदा है इंसान की आजादी जिंदा रहेगी.

सिपाहयों खुद को इन क्रूर लोगों के हाथों में मत सौंपों. वो लोग जो तम्हें निराशा में डाल देते हैं और गुलाम बना लेते हैं, जो तम्हारी ज़िन्दगी को फौजी टुकड़ी में बदल देते हैं, वो तुम्हें बताते हैं की तुम क्या करोगे.

क्या सोचोगे, क्या महसूस करोगे, वो तुमसे अभ्यास करवाते हैं, तुम्हारा खाना निर्धारित करते हैं, तुम्हें जानवर समझते हैं. तुम्हें ईंधन की तरह इस्तेमाल करते हैं.

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खुदको इन बनावटी लोगों के हवाले मत करो, इनका शरीर भी मशीन है. इनका दिमाग भी मशीन है. इनका दिल भी मशीनी है. तुम मशीन नहीं हो, तुम जानवर नहीं हो, तुम इंसान हो, तुम्हारे दिलों के भीतर इंसानियत के लिए प्यार है, तुम नफरत नहीं करना चाहते.

जिन्हें प्यार नहीं मिला सिर्फ वही नफरत कर सकते हैं, प्यार से वंचित और अप्राकृतिक लोग नफरत कर सकते हैं. सिपाहियों गुलामी के लिए संघर्ष मत करो, आज़ादी के लिए लड़ो.

बाइबिल में कहा गया है ईश्वर का राज्य इंसान के दिल में ही है. किसी एक इंसान के दिल में नहीं, किसी एक समूह के लोगों के दिल में नहीं, बल्कि हर इंसान के दिल में. आपके दिल में भी.

आप जो इंसान हैं, आपमें वो ताकत है, आप मशीनें बना सकते हैं. आप खुशियां ला सकते हैं. आपके भीतर ज़िदगी को आज़ाद और और खूबसूरत बनाने की ताकत है. आप इस ज़िन्दगी को मजेदार खोज बना सकते हैं. तो लोकतंत्र के नाम पर, आइये उस ताकत का इस्तेमाल करें. आइये हम सब एक हो जाएं.

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आइये एक नई दुनिया बनाने के लिए संघर्ष करें. एक सुंदर दुनिया जिसमे इंसानों को काम करने का मौका मिलेगा, जिसमे नौजवानों को भविष्य बनाने के मौके और बुजुर्गों को सुरक्षा मिलेगी.

इन बातों का वादा कर के क्रूर तानाशाह सत्ता प्राप्त कर लेते हैं. वो झूठे वादे करते हैं. वो अपने वादे कभी पूरे नहीं करते. वो कभी भी इन वादों को पूरा नहीं करेंगे. तानशाह खुद को आज़ाद कर लेता है लेकिन आपको गुलाम बना लेता है.

आइये उस वादे को पूरा करने के लिए संघर्ष करें, आइये दुनिया को आज़ाद बनाएं. आओ राष्ट्रों की सीमाओं को मिटा दो, आओ अपने लालच, नफरत और असहनशीलता को मिटा दो.

आओ एक ऐसी दुनिया के लिए संघर्ष करें जहां तर्क चले, जहां विज्ञान और तरक्की इंसानी खुशियों को रास्ता दिखायेगी. सिपाहियों आओ लोकतंत्र के नाम पर हम सब एक होकर संघर्ष करें.

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