HEALTH

ये कैसा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, जहां हैं मात्र 22 नर्सें

  • 80 मरीज कम से कम प्रतिदिन भर्ती रहते हैं, ओपीडी में आनेवाले मरीजों की संख्या लगभग 300
  • नर्सों के लिए स्वीकृत पद है 90

Chhaya

Jharkhand Rai

Ranchi: सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नाम पर रांची स्थित सदर अस्पताल के नये भवन को बनाया गया. जहां मरीजों को हर अत्याधुनिक सुविधाएं देने की घोषणा सूबे के मुख्यमंत्री ने की थी. लेकिन इस नये भवन में इलाज कैसे बेहतर हो इसकी व्यवस्था नहीं की गयी. साल 2017 से सदर अस्पताल का यह नया भवन मरीजों को सेवा दे रहा है, लेकिन न ही यहां पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही पर्याप्त नर्स. जबकि प्रतिदिन अस्पताल के ओपीडी में 250 से 300 मरीज आते हैं. वहीं नये भवन में एक साथ लगभग 200 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है. कम से कम 80 मरीज भर्ती रहते हैं. ऐसे में यहां मात्र 22 स्थायी नर्सें हैं. जबकि यहां नर्सों का स्वीकृत पद 90 है. इमरजेंसी वार्ड की बात की जाये, तो यहां मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है. ऐसे में मात्र एक डॉक्टर और एक नर्स और दो संविदा कर्मियों के भरोसे अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड चलाया जा रहा है.

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Samford

स्थायी 22 नर्सें ही प्रशिक्षुओं को भी प्रशिक्षित कर रही हैं

अस्पताल की कई नर्सों से जानकारी मिली कि अस्पताल में नर्सों की कमी है. वहीं जो नर्सें हैं वही ट्रेनिंग में आने वाली प्रशिक्षु नर्सों को प्रशिक्षित करती हैं. थोड़ा अनुभव हो जाने से इन्हीं प्रशिक्षु नर्सों से ये नर्सें काम लेती हैं. इन नर्सों ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी कि तीन शिफ्ट में नर्सों को बांटना चाहिए. लेकिन नर्सों की कम संख्या होने के कारण संविदा में कार्यरत कर्मचारियों से काम लिया जाता है. हालांकि अस्पाल प्रबंधन की ओर से इस समस्या से जूझने के लिए जी अर्लट नामक क्षेत्रीय एजेंसी के कर्मचारियों को पारा मेडिकल स्टाफ के तौर पर नियुक्त किया गया है. प्रतिदिन आनेवाले मरीजों की संख्या को देखा जाये तो भी इन कर्मचारियों की संख्या काफी कम है. इन कर्मचारियों की संख्या मात्र 60 है. यहां डॉक्टरों के लिए 25 पद स्वीकृत हैं, जिनमें वर्तमान में सभी पद भरे हुए है. वहीं एक डिप्टी सुपरिडेंटेंड का पद पिछले दो माह से रिक्त है.

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बच्चा वार्ड, टीकाकरण और आइसीटीसी जांच केंद्र में नौ बजे से लगती है लाइन

नर्सों की कमी का आलम यह है कि लोगों को यहां इलाज कराने के लिए सुबह नौ बजे से लाइन लगनी पड़ती है. यहां के बच्चा वार्ड, टीकाकरण वार्ड, आइसीटीसी केंद्र समेत ईएनटी डॉक्टरों के कमरे के बाहर लंबी कतार देखी गयी. पूछने पर जांच के लिए आये लोगों से जानकारी मिली कि सुबह नौ बजे से लाइन में लगे हैं. तब जाकर 12 बजे इलाज हुआ. अस्पताल में टीकाकरण के लिए हमेशा लोगों की लंबी लाइन लगी रहती है. जबकि मात्र एक नर्स और दो प्रशिक्षुओं के भरोसे बच्चों का टीकाकरण किया जाता है. अस्पताल भवन में स्थित ब्लड बैंक में मात्र एक डॉक्टर रहते हैं. जबकि यहां ब्लड लेने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती है.

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जेएसएसी की ओर से की जाती है नियुक्ति

इस संबध में जिला कार्यक्रम प्रबंधक महेश कुमार ने जानकारी दी कि अस्पताल प्रबंधन को जानकारी है कि कर्मचारियों की काफी कमी है. जेएसएससी की ओर से नर्सों की नियुक्ति अस्पताल में की जानी है. विभाग को भी इसकी जानकारी है. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर से संविदाकर्मियों को नियुक्त किया है. ताकि मरीजों को परेशानी न हो. वहीं सिविल सर्जन ने कहा कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग और कार्मिक विभाग की ओर से ही नर्सों की नियुक्ति की जाती है. ट्रासंफर पोस्टिंग के माध्यम से भी नर्सें यहां आयी हैं. अस्पताल अपने स्तर से भी प्रयासरत है.

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