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कैसे आयुष्मान होगा भारत, दिल में छेद वाली बबीता का गोल्डेन कार्ड वैल्यूलेस, पीएम की चिट्ठी की भी अहमियत नहीं

गोल्डेन कार्ड होते हुए भी इलाज  नहीं करा पा रही है बबीता

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Ranchi : आयुष्मान भारत योजना की किस प्रकार धज्जियां उड़ रही हैं, इसका अंदाजा रिम्स में अपनी बहन का इलाज कराने आये मुकेश बैठा से मिलने पर सहज ही लगाया जा सकता है. आयुष्मान भारत योजना की लाभुक होने के साथ-साथ मरीज के नाम से गोल्डेन कार्ड बनने के बाबजूद मरीज को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि मरीज के परिजनों को प्रधानमंत्री का पत्र भी मिला है, लेकिन यह सिर्फ एक कागज के सिवा कुछ और साबित नहीं हो रहा. तीन माह से मरीज एक हॅस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल भटक रही है, लेकिन इलाज कहीं नहीं हो रहा है.

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क्या है मामला

मुकेश बैठा अपनी बहन बबीता का इलाज कराने के लिए पिछले तीन माह से रिम्स एवं अन्य अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं. बबीता कभी अपनी मां के साथ, कभी अपने भाई के साथ हॉस्पिटल इस उम्मीद से आती है कि उसका इलाज हो जायेगा, लेकिन हर बार उसे निराश होकर ही लौटना पड़ता है. गुरुवार को भी फिर एक बार ऐसा ही हुआ,  बबीता अपने भाई मुकेश और मां के साथ अपना इलाज कराने रिम्स आयी थी. लेकिन हर बार की तरह उसे फिर निराश ही लौटना पड़ा.

मेडिका और मेदांता ने भी लौटाया

बबीता की मां ने बताया कि वह मेडिका और मेदांता में भी दौड़ लगा चुकी हैं, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने गोल्डेन कार्ड के आधार पर इलाज करने से साफ इनकार कर दिया. बबीता की मां ने बताया कि वह अपनी बेटी को 15 दिनों पहले ही मेडिका में इलाज कराने ले गयी थीं, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन के लिए पैसे लगेंगे, गोल्डेन कार्ड से इलाज नहीं हो पायेगा. ऐसा ही जवाब मेदांता से भी मिला था.

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बबीता के दिल में है छेद

18 वर्षीय बबीता कुमारी के दिल में 7 एमएम का छेद है. यह बात भी उसे और उसके परिवार को दो माह पहले ही मालूम हुई, जिसके बाद से पूरा परिवार बबीता का इलाज कराने के लिए प्रयास कर रहा है. बबीता के भाई मुकेश ने बताया कि रिम्स में तीन माह पहले ही इलाज कराने आये थे. उस वक्त सभी जांच करायी गयी, जिसमें दिल में छेद होने की बात सामने आयी. डॉ राकेश कुमार ने ओपन हार्ट सर्जरी करने की बात कही थी, लेकिन रिम्स में इस ऑपरेशन के लिए मशीन नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पायेगा, ऐसा बताया गया. कहा गया कि जब मशीन आयेगी, तब ही ऑपरेशन संभव है.

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आयुष्मान भारत योजना की लाभुक है बबीता, गोल्डेन कार्ड भी बन चुका है

बबीता बहुत ही गरीब परिवार से है. उसके पिता रिक्शा चलाते हैं और भाई पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी भी करता है. किसी तरह से अपनी बहन का इलाज कराना चाहता है. सबसे बड़ी बात यह है कि बबीता प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) की लाभुक है और उसके नाम से गोल्डेन कार्ड भी जारी किया गया है. इसके बाबजूद उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है.

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मशीन नहीं है : डॉ अंशुल

कार्डियो सर्जरी के एचओडी डॉ. अंशुल कुमार ने बताया कि ओपन हार्ट सर्जरी की मशीन रिम्स में अभी नहीं है. इसके लिए टेंडर निकाला गया था, जिसमें नौ लोगों ने टेंडर भरा है. इस महीने के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर मशीन की खरीदारी की जायेगी. इसके बाद ऑपरेशन शुरू होगा. डॉ अंशुल ने बताया कि अभी सभी मरीज को मेडिसीन देकर रखा गया है. जब सर्जरी शुरू होगी, तो सभी को एक-एक कर बुलाया जायेगा और सर्जरी की जायेगी.

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