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IAS पूजा सिंघल को मनरेगा घोटाले में कैसे मिली क्लीन चिट, जांच करा रही सरकार

Nikhil Kumar

Ranchi: ईडी के घेरे में फंसी आईएएस पूजा सिंघल को क्लीनचिट देने वाली संचिका का हेमंत सोरेन सरकार अध्ययन करा रही है. मनरेगा योजना में चतरा व खूंटी जिले में डीसी के पद पर रहते हुए उनके उपर लगे आरोपों और इन आरोपों से क्लीन चिट मिलने की पूरी कार्यवाही की जांच की जा रही है. कार्मिक विभाग की सचिव वंदना दादेल ने इस संबंध में फाइल मंगवा कर समीक्षा की है. यह देखा है कि आखिर किन परिस्थिति में आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को आरोप मुक्त किया गया था. यह भी देखा गया कि इस पूरी कार्यवाही में विभाग की कोई गलती तो नहीं हैं. दरअसल, मनरेगा योजना में करोड़ों की गड़बड़ी मामले में 10 साल पहले पूजा सिंघल पर गंभीर आरोप लगे थे. पूरे मामले में ग्रामीण विकास विभाग ने कार्रवाई की अनुशंसा की थी. इस मामले में कई इंजीनियर व एनजीओ पर कार्रवाई की गयी. पूजा सिंघल पर भी विभागीय कार्रवाई चल रही थी.

एपी सिंह की रिपोर्ट के बाद संचिकास्त की गयी थी

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तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार में पूरे मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी एपी सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी. एपी सिंह की कमेटी ने पूरी मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट कार्मिक विभाग को सौंपी. एपी सिंह की रिपोर्ट में मनरेगा योजना के तहत की गयी गड़बड़ी से पूजा सिंघल को क्लीन चिट दे दी गयी. रिपोर्ट में कहा गया की डीसी सीधे तौर पर जिम्मेवार नहीं हो सकते हैं. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही 2017 में कार्मिक विभाग में पूजा सिंघल पर लगे आरोपों की संचिका को अस्त कर दिया गया.

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इसके बाद पूजा सिंघल को प्रमोशन भी मिला. कई पदों पर रहते हुए उन्हें हेमंत सरकार में खान सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया. इसी बीच हाल में प्रवर्तन निदेशालय ने पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापा मारा. 19 करोड़ से अधिक राशि बरामदगी हुई. पूजा सिंघल पूरे मामले में गिरफ्तार हुई. कार्मिक विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया. अब विभाग यह देख रहा है कि कैसे उन्हें आरोपों से मुक्त किया गया. सूत्रों के अनुसार विभाग इसमें क्लीयर होना चाहता है. क्लीनचिट देने के मामले में सारी कार्यवाही के पीछे एपी सिंह की रिपोर्ट को ही आधार बनायेगा. क्योंकि उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही पूजा सिंघल को विभाग ने क्लीन चिट दिया था. सूत्रों के अनुसार इस मामले में सरकार एपी सिंह से फिर से जानकारी हासिल करेगी.

इन वजहों से विवादो में पूजा सिंघल

पूजा सिंघल पहले से ही विवादों में रहीं हैं. कहा जाता है कि पूर्व की रघुवर की सरकार के समय “उड़ने वाले हाथी” की खोज में इनकी खास भूमिका रही है. आईएएस पूजा सिंघल जहां भी रहीं आरोप के साथ इनका चोली-दामन का साथ रहा. इन पर चतरा, खूंटी और पलामू जिले में उपायुक्त रहने के दौरान वित्तीय अनियमितता के कई गंभीर आरोप लगे हैं.

83 एकड़ भूमि एक निजी कंपनी को खनन के लिए कर दिया था ट्रांसफर

खूंटी में मनरेगा में 18.06 करोड़ रुपये के घोटाले के वक्त पूजा सिंघल ही वहां उपायुक्त थीं. जबकि, चतरा में भी अगस्त 2007 से 2008 तक पूजा सिंघल उपायुक्त थी और वहां भी उनपर गड़बड़ी का आरोप लगा था. जबकि पलामू में उपायुक्त रहने के दौरान पूजा सिंघल पर करीब 83 एकड़ भूमि एक निजी कंपनी को खनन के लिए ट्रांसफर करने का आरोप लगा है.

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