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राज्य के युवा उद्यमियों को स्टार्ट अप का कैसे मिलेगा लाभ, अगर इसकी वेबसाइट ही अपडेट न हो

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21 और 22 जून को आइटी विभाग की ओर से झारखंड स्टार्टअप हैकेथॉन का होगा आयोजन

झारखंड इन्नोवेशन लैब के वेबसाइट में नहीं है साल 2018-19 की प्रोग्रेस रिपोर्ट

हर चार माह में तैयार करनी होती है प्रोग्रेस रिपोर्ट

चयनित 49 उद्यमियों को नहीं मिली है कोई राशि, अब सरकार कहती है 23 जून तक एक साथ स्टाइपेंड

Ranchi: जिन वायदों के साथ राज्य में स्टार्ट अप पॉलिसी लागू की गयी, उतना पॉलिसी पर काम नहीं किया जा रहा. केंद्रीय पॉलिसी के बाद राज्य में साल 2016 में स्टार्ट अप पॉलिसी लागू की गयी. लेकिन पॉलिसी में जितने नियम-कानून बनाये गये हैं, उतना इस पर काम नहीं हो पा रहा.

वेबसाइट पर नहीं 2018-19 की प्रोग्रेस रिपोर्ट

स्टार्ट अप पॉलिसी 2016 के तहत राज्य में झारखंड इन्नोवेशन लैब या अटल बिहारी वाजपेयी इन्नोवेशन लैब बनाया गया. जिसे राज्य सरकार और आइआइएम अहमदाबाद के सहयोग से संचालित किया जा रहा है. लैब में जहां स्टार्ट अप उद्यमियों को बेहतर आइडिया क्रिएशन के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करानी थी.

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वहीं इन स्टार्ट अप उद्यमियों और राज्य में स्टार्ट अप के लिए कितने प्रयास किए गए. इसके लिए प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार करनी थी. लेकिन वित्तिय वर्ष 2018-19 की प्रोग्रेस रिपोर्ट इन्नोवेशन लैब की ओर से तैयार नहीं की गयी है. झारखंड इन्नोवेशन लैब के वेबसाइट में मात्र साल 2017-18 की ही प्रोग्रेस रिपोर्ट है.

लैब को हर चार माह में बनानी है प्रोग्रेस रिपोर्ट

पॉलिसी के अनुसार, हर चार माह में स्टार्ट अप की प्रोग्रेस रिर्पोट तैयार करनी है. साल 2017-18 के लिए हर चार माह की रिपोर्ट है भी. लेकिन साल 2018-19 के लिए ये रिपोर्ट तैयार नहीं है. जबकि वित्तिय वर्ष पूरे हुए तीन माह बीत चुके हैं.

इस प्रोग्रेस रिपोर्ट के जरिये स्टार्ट पॉलिसी में राज्य में क्या क्या काम हो रहे हैं और सरकार किन-किन कंपनियों के साथ समझौते कर रही है इसकी जानकारी मिलती है.

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इन्नोवेशन लैब के ही सूत्रों से जानकारी मिली की अटल बिहारी वाजपेयी इन्नोवेशन लैब के नाम से विभाग की ओर से अलग से वेबसाइट तैयार की जा रही है. जो प्रोसेस में है. इसके बाद उस वेबसाइट में सब कुछ अपडेट किया जायेगा.

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बता दें कि आइटी विभाग के अंतर्गत राज्य में स्टार्ट अप पॉलिसी चलायी जा रही है. जिसके लिए पूर्व से वेबसाइट तैयार है, लेकिन वर्तमान में विभाग की ओर से फिर से वेबसाइट तैयार की जा रही है.

नियमित नहीं होती बैठक, हर चार माह में होनी चाहिए मीटिंग

राज्य में उद्यमियों के चयन के लिए स्टेट इवॉल्यूशन बोर्ड का गठन किया गया है. जिसका मुख्य कार्य उद्यमियों का चयन करना है. लेकिन राज्य में अब तक मात्र दो ही बार बोर्ड की बैठक हुई. जिसमें 49 उद्यमी चयनित हुए.

विगत दिनों एक बोर्ड की बैठक हुई थी. लेकिन इसमें उद्यमियों का चयन नहीं किया गया. पहली बोर्ड की मीटिंग में 19 उद्यमी और दूसरी स्टेटे इवॉल्यूशन में 30 उद्यमियों का चयन किया गया. कुल 49 उद्यमी. जबकि स्टार्ट अप पॉलिसी के नियमों के अनुसार, प्रत्येक चार माह में स्टेट इवॉल्यूशन बोर्ड की बैठक की जानी चाहिए.

एकबार में स्टाइपेंड और प्रोटोटाइप ग्रांट देगी सरकार

चयनित 49 स्टार्ट अप उद्यमियों को ही सरकार चयनित की है. जो साल 2017 और 2018 में चयनित हुए है. लेकिन पूर्व से चयनित उद्यमियों को अब तक स्टार्ट अप बढ़ाने के लिए मिलने वाली प्रति माह 8500 स्टाइपेंड की राशि तक नहीं मिली है. जो एक साल तक प्रति माह दी जाती है.

दिव्यांग और महिलाओं के लिए ये राशि दस हजार हेाती है. इस राशि के बाद ही उद्यमियों को प्रोटोटाइप ग्रांट दी जाती है. ऐसे में जो उद्यमी साल 2017 में चयनित हुए उन्हें भी अब तक सरकार ने कोई राशि नहीं दी है.

जबकि साल 2015-16 के लिए 50 करोड़ राशि आवंटित की गयी थी. अब 21 और 22 मई को आइटी विभाग की ओर से आयोजित होने वाली हैकेथॉन कार्यक्रम के बाद 23 जून को सरकार ने इसे उद्यमियों को ग्रांट देने की बात की है. जिसके लिए तीन जून से आवेदन भरे जायेंगे.

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