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2019 झारखंड विधानसभा चुनाव : जानें वो हॉट और विवादित सीट जिसपर जीत तय करेगा सरकार का मुस्तकबिल

Akshay Kumar Jha

Ranchi: 2019 का विधानसभा चुनाव झारखंड में नतीजों से पहले होने वाले हर विधानसभा चुनाव के मुकाबले खास रहा. खासियत की कई वजहे हैं. उनमें सबसे पहले बीजेपी की तरफ से टिकट का बंटवारा रहा. चुनाव में बीजेपी का आजसू के साथ गठबंधन ना होना रहा. आजसू का बीजेपी के खिलाफ खुलकर सामने आना रहा. बीजेपी के कई नेताओं का बागी हो जाना काफी दिलचस्प रहा.

वहीं सामंजस्य बैठा कर जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी का मिलकर चुनाव लड़ना भी कई मायनों में खास रहा. साथ ही साथ बीजेपी का हर चुनावी चरण में स्टार प्रचारकों की तरफ से धुआंधार प्रचार करना भी काफी खास रहा. झारखंड के लोगों ने इस चुनाव में जितने हेलीकॉप्टर देखें, शायद ही उतने चॉपर उन्होंने कभी देखी हो.

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आज शाम से चुनाव के आखिरी चरण का शोर भी शांत हो जाएगा. अब सबकी निगाहें 23 दिसंबर को आने वाले नतीजों पर होंगी. उस बीच चर्चा उन विधानसभा सीटों की हो रही है, जहां चुनाव किसी ना किसी वजह से खास रहा. जानते हैं उन विधानसभा सीटों को.

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पूर्वी जमशेदपुर – एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र जिसके नतीजों पर झारखंड ही नहीं देशभर की नजरे हैं. झारखंड बीजेपी की राजनीति की दिशा और दशा आने वाले दिनों में यहां का नतीजा तय कर सकता है. झारखंड बीजेपी सरकार के मुखिया रघुवर दास को यहां बीजेपी से टिकट कटने के बाद उन्हीं के कैबिनेट के मंत्री सरयू राय ने चैलेंज किया. धुआंधार प्रचार हुआ.

पीएम मोदी तक को इस विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करने के लिए आना पड़ा. रघुवर दास की हार या जीत उनके निजी राजनीतिक जीवन को तो तय करेगा. साथ ही झारखंड में सरकार किसकी बनेगी और उसका मुखिया कौन होगा, यह भी तय होगा. लिहाजा 2019 विधानसभा चुनाव का सबसे हॉट सीट पूर्वी जमशेदपुर रहा.

पश्चिमी जमशेदपुर – इस सीट को भी खास बनाने वाली सीट पूर्वी जमशेदपुर ही है. सरयू राय इससे पहले पश्चिमी जमशेदपुर सीट से जीतते आए हैं. लेकिन इस बार वो पास वाले विधानसभा सीट पर शिफ्ट हो गए. उनके यहां से चुनाव नहीं लड़ने का फायदा सीधे तौर पर विरोधी पार्टी को हुआ.

बोकारो – बोकारो विधानसभा बीजेपी के लिए इस बार एक सुरक्षित सीट माना जा रहा था. पिछले चुनाव में यहां से बिरंची नारयण झारखंड में सबसे ज्यादा वोट से जीते थे. लेकिन टिकट बंटवारे के ऐन पहले बिरंची नारायण का एक वीडियो वायरल हुआ. जिसके बाद यह विधानसभा सीट चर्चे में आया.

भीतरघात का सामना कर रहे बिरंची नारायण को बीजेपी से टिकट तो मिल गया. लेकिन उनकी चुनौतियां काफी बढ़ गयीं. कांग्रेस की तरफ से भी यह सीट खास रहा. संजय कुमार को टिकट मिलने के बाद उनसे टिकट वापस ले लिया गया.

कांग्रेस ने पूर्व मंत्री समरेश सिंह की बहु श्वेता सिंह को दोबारा टिकट जारी किया. बताया जा रहा है कि यहां का चुनाव काफी दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला रहा.

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दुमका – जेएमएम का गढ़ माना जाने वाला यह सीट पिछली बार हाथ से फिसल गया था. बीजेपी की लुईस मरांडी को जीत के इनाम के तौर पर मंत्री पद तक से नवाजा गया. लेकिन इस बार जेएमएम के उम्मीदवार किसी भी हाल में इस सीट को वापस चाह रहे हैं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सुनील सोरेन ने दुमका से दिशोम गुरू शिबू सोरेन को पटखनी दे दी थी. जेएमएम और बीजेपी दोनों के लिए यह नाक बचाने वाली सीट है.

बरहेट – जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन का यहां से चुनाव लड़ना ही अपने आप में खास बात है. बीजेपी से सीमान माल्टो हेमंत के सामने हैं. खास इसलिए भी कि खुद पीएम मोदी यहां सभा कर बीजेपी की उम्मीदवार को वोट देने की अपील कर चुके हैं.

झरिया – इस सीट पर राजनीतिक समीकरण कम और पारिवारिक फाइट की कहानी ज्यादा पसंद की जाती है. कभी चचेरे भाई के बीच चुनावी जंग हुई तो इस बार देवरानी और जेठानी आमने सामने हैं. सिंह मेंशन और रघुकुल की लड़ाई यहां साफ तौर से देखी जा सकती है. कांग्रेस से मरहूम नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह और बीजेपी से नीरज सिंह के हत्या के आरोपी संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह चुनावी मैदान में है. नतीजों पर सबकी नजर है.

धनवार – लेफ्ट के राजकुमार यादव फिलहाल यहां के विधायक है. बीजेपी की तरफ से यहां पूर्व आईपीएस लक्ष्मण सिंह मैदान में हैं. लेकिन इस सीट को खास जेवीएम के बाबूलाल मरांडी बना रहे हैं.

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चक्रधरपुर – यह वही सीट है, जिसने आजसू और बीजेपी के लड़ाई को सबके सामने ला दिया. यहां से बीजेपी की तरफ से खुद प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ मैदान में उतरे तो आजसू ने अपनी पहली ही लिस्ट में अपने उम्मीदवार रामलाल मुंडा को उतार दिया.

जेएमएम ने भी सीट पर एक प्रयोग करते हुए अपने सीटिंग एमएलए शशिभूषण समद का टिकट काटकर सुखराम उरांव को उम्मीदवार बनाया है.

सिल्ली – इस सीट से अपनी राजनीतिक ईबारत गढ़ने वाले आजसू के सुप्रीमो लगातार तीन बार जेएमएम से हार का सामना कर चुके हैं. इस बार का चुनाव अगर वो हार जाते हैं, तो आजसू झारखंड में बैकफुट पर भी जा सकता है. इस सीट को सुदेश महतो इस बार काफी खास बना रहे हैं.

पांकी – यूं तो पांकी सीट पर इससे पहले किसी तरह का कोई विवाद नहीं था. उपचुनाव में विदेश सिंह के बेटे बिट्टु सिंह ने जीत हासिल की. लेकिन बीजेपी की तरफ से शशिभूषण मेहता को टिकट दिया गया, तो सुचित्रा मिश्रा हत्याकांड के मुख्य आरोपी है.

20 दिसंबर को उनके केस की सुनवाई भी है. अगर उन्हें इस दिन दो साल से ज्यादा की सजा सुना दी जाती है, तो चुनाव जीतने की संभावना से पहले ही उनकी विधायकी रद्द हो जाएगी.

भवनाथपुर – बीजेपी की 130 करोड़ के दवा घोटाले के आरोपी भानू प्रताप शाही को टिकट देना इस सीट को चर्चा का विषय बना रहा है. साथ ही पीएम मोदी का इस उम्मीदवार के लिए प्रचार करना भी चर्चा का विषय बना था.

भानू प्रताप को निर्दलीय उम्मीदवार अनंत प्रताप देव से टक्कर मिल रही है. बीजेपी ने इन्हीं का टिकट काट कर भानू पर भरोसा जताया था.

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बरहागोड़ा – डॉ. दिनेश षाड़ंगी परिवार का इतिहास यूं तो बीजेपी से ही जुड़ा हुआ है. लेकिन उनके बेटे कुणाल षाड़ंगी पहली बार विधायक जेएमएम की टिकट पर बने. लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने अपनी राजनीतिक घर वापसी कर ली.

उनकी सीधी टक्कर पिछली बार जेवीएम से चुनाव लड़ चुके और बीजेपी में टिकट कटने के बाद जेएमएम से चुनाव लड़ रहे समीर मोहंती से है.

बरही – यहां कांग्रेस और बीजेपी ने अपना उम्मीदवार स्वैप कर लिया है. जो उमाशंकर अकेला पिछली बार बीजेपी से चुनाव लड़ रहे थे. वो इस बार कांग्रेस से हैं.

वहीं कांग्रेस के पिछली बार के उम्मीदवार मनोज यादव इस बार बीजेपी के उम्मीदवार हैं. फैसला अब इस बात पर निर्भर करता है कि किस पार्टी के कार्यकर्ता भीतरघात करते हैं.

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लोहरदगा – कांग्रेस का एक बड़ा आदिवासी चेहरा जिसने कभी प्रदेश कांग्रेस की कुर्सी संभाली हो. वो सुखदेव भगत इस बार बीजेपी की तरफ से मैदान में हैं. लेकिन उनका सामना अभी भी आजसू के केके भगत से ही है. केके भगत की पत्नी नीरू शांति भगत चुनाव लड़ रही हैं.

रामगढ़ – इस सीट पर इस बार विधायक से सांसद बने सीपी चौधरी इस सीट को खास बना रही है. यह सीट परिवार से बाहर ना जाए, इसके लिए आजसू ने एड़ी चोटी की जोर लगा दी है. तो वहीं कांग्रेस की ममता देवी भी पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं.

मांडू – इस विधानसभा सीट की लड़ाई की सबसे खास बात यह है कि यहां तीन पटेल भाई मैदान में हैं. जेएमएम के सीटिंग विधायक जय प्रकाश भाई पटेल ने बीजेपी का दामन थामा, तो बड़े भाई राम प्रकाश भाई पटेल ने पिता की राजनीतिक विरासत को देखते देते हुए जेएमएम से टिकट ले लिया.

वहीं चचेरे भाई चंद्रनाथ भाई पटेल जेवीएम की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे हैं. इस बीच कांग्रेस के महेश सिंह भी मजबूती से चुनाव प्रचार में जुटे हैं.

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