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अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक,औषधालय, पैथ लैब को प्रदूषण पर्षद से संचालन सहमति लेनी होगी

Ranchi : झारखंड में चल रहे अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, औषधालय, ब्लड बैंक, पैथ लैब सहित एक दर्जन से अधिक वर्गीकृत संस्थानों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से संचालन सहमति लेनी होगी. ऐसे संस्थानों को 31 अगस्त तक की मियाद पर्षद की तरफ से दी गयी है.

राज्य सरकार का मानना है कि इन संस्थानों की ओर से बायो मेडिकल वेस्ट का उत्पादन ही नहीं, बल्कि उसका संग्रहण, भंडारण और परिवहन भी किया जाता है. बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 के तहत संचालन सहमति (अथोराइजेशन) के बिना इन संस्थानों को ऑपरेट करने पर रोक लगायी जायेगी.

पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बख्शी ने ऐसे सभी संस्थानों से उपरोक्त प्रमाण पत्र लेने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा है कि संस्थानों द्वारा जल प्रदूषण के अलावा वायु प्रदूषण भी किया जाता है. जो जल प्रदूषण अधिनियम की धारा 25 और वायु प्रदूषण अधिनियम की धारा 21 का उल्लंघन भी है. संस्थानों के लिए बायो मेडिकल क्यूआर कोड जेनरेट किया जायेगा. इसी आधार पर उनकी ट्रैकिंग भी की जायेगी.

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क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट एक्ट 2010 के अंतर्गत लाइसेंस भी होगा रद्द

पर्षद की ओर से संचालन सहमति नहीं लेने पर ऐसे संस्थानों का क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट एक्ट 2010 के तहत लाइसेंस भी रद्द करने की अनुशंसा की जायेगी. पर्षद स्वास्थ्य विभाग के पास लाइसेंस रद्द करने की औपचारिकताएं संबंधी अनुरोध पत्र भेजेगा.  झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड की सूची में जिन संस्थानों को वर्गीकृत किया गया है.

उनमें निजी और सरकारी अस्पताल, नर्सिंग होम, सभी तरह के क्लीनिक, औषधालय, पशु चिकित्सा संस्थान, पैथोलोजिकल प्रयोगशालाएं, ब्लड बैंक, आयुष अस्पताल, अनुसंधान और शैक्षिक संस्थान, स्वास्थ्य शिविर, चिकित्सा कैंप और अन्य शामिल हैं.

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