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दुश्मनों को दहलाने स्वदेशी धनुष तोप भारतीय सेना में शामिल हुई

NewDelhi : पहाड़ और रेगिस्तान में दुश्मनों को ध्वस्त करने में सक्षम स्वदेशी तोप धनुष  सोमवार को भारतीय सेना में शामिल हो गयी.  इसकी मारक क्षमता बोफोर्स तोप से भी ज्यादा है. धनुष तोप भारतीय सेना की ताकत में इजाफा करेंगी.  समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार  स्वदेशी धनुष तोप जबलपुर के ऑर्डिनेंस डिपो में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम में आज सेना के हवाले की गयी. बता दें कि पहली खेप में छह धनुष तोप सेना के हवाले की गयी हैं.   जान लें कि  धनुष स्वीडिश तोप बोफोर्स का स्वदेशी संस्करण है.  इसके 95 फीसदी से अधिक कलपुर्जे स्वदेशी हैं.  सेना की ओर से हर मौसम के अनुसार किये गये परीक्षण में यह तोप खरी उतरी है.  

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 2022-23 तक 114 धनुष तोप सेना को सौंप दी जायेगी.

इसका फील्ड गन फैक्टरी में बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो गया है.  इस संबंध में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने 19 फरवरी को हरी झंडी दी थी.  जानकारी के अनुसार 2022-23 तक 114 धनुष तोप सेना को सौंप दी जायेगी. 45 कैलिबर की 155 मिलीमीटर की ये तोप पुरानी बोफोर्स की तकनीक पर जबलपुर के ऑर्डिनेस फैक्ट्री बोर्ड ने बनाई है. सेना को 6 धनुष के बाद दिसंबर तक 18 और तोप मिलने की उम्मीद है.  धनुष तोप को सभी प्रकार के इलाकों में नियोजित किया जा सकता है. ये तोप हर मौसम और हालात में पूरी तरह कारगार है.  यह दिन और रात दोनों वक्त सटीक निशाना लगा सकती है. यह पुरानी बोर्फोस से कई मायने में बेहतर है. पुरानी बोर्फोस की रेंज 29 किलोमीटर थी, जबकि धनुष की रेंज 38 किलोमीटर है.

इसके अलावा भी धनुष में एक और खासियत है. इस तोप में कंप्यूटर लगा हुआ है जो खुद ही गोला लोड कर उसे फायर कर सकता है. जबकि पुरानी बोफोर्स ऑटोमेटिक नहीं थी. लगातार कई घंटों तक फायरिंग के बाद भी धनुष का बैरल गरम नहीं होता. एक धनुष का वजन 13 टन के करीब है और एक तोप की कीमत करीब 14.50 करोड़ रुपये है

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