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एसीपी व एमएसीपी का लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी, जाने हाइकोर्ट का क्या है निर्णय

Ranchi : राज्य के विश्वविद्यालयों के तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मियों को एसीपी एवं एमएसीपी का लाभ दिलाने को लेकर हाइकोर्ट ने विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को 12 सप्ताह में  समानांतर स्कीम तैयार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय इस स्कीम को उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजे. राज्य सरकार अगर इस समानांतर स्कीम पर सहमत होती है तो विश्वविद्यालय कर्मियों को एसीपी और एमएसीपी का लाभ दिलाये. कोर्ट ने कहा कि कि जिस तरह से राज्य सरकार के कर्मियों को एसीपी एवं एमएसीपी लाभ दिया जाता हा उसी तरह  विश्वविद्यालय कर्मियों के लिये यह समानांतर स्कीम तैयार की जाये. मामले को लेकर हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने मामले का निष्पादित कर दिया.

क्या था मामला

झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ ने इसे लेकर हाइकोर्ट में वर्ष 2017 में रिट याचिका दायर की थी. इसमें उनकी ओर से बताया गया था कि राज्य सरकार एवं महासंघ के बीच 10 अगस्त 2007 को समझौता हुआ था. इसका अनुपालन नहीं किया गया, इसके बाद वर्ष 2010 में 20 प्वाइंट पर समझौता हुआ. इसमें से एक समझौता में राज्य सरकार के कर्मियों की तरह राज्य के विश्वविद्यालय के तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मियों को भी एसीपी और एमएसीपी का लाभ दिलाना था. समझौते में उस समय राज्य सरकार ने कहा था कि वह विश्वविद्यालय कर्मियों को एसीपी और एमएसीपी का लाभ दिलाने पर विचार करेंगी.

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इधर, राज्य सरकार की ओर से 27 दिसंबर 2018 को हाइकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर बताया गया कि समझौते के 20 प्वाइंट में से 17 प्वाइंट का अनुपालन कर लिया गया है. विश्वविद्यालय के तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मियों के एसीपी एवं एमएसीपी दिलाने के संबंध में  राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को पत्र लिखा गया है. इसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार एसीपी एवं एमएसीपी के लिये समानांतर स्कीम बनाकर उच्च शिक्षा निदेशक को भेजें. लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर स्कीम नहीं भेजा गया है. मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार ने पैरवी की.

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