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तीन दिवसीय वन मेला के अंतिम दिन स्टॉलधारकों को किया गया सम्मानित

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Ranchi: वन विभाग और फॉरेस्ट ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय वन मेला का समापन सोमवार को किया गया. मेले में 44 स्टॉल लगाए गए थे. ये सभी राज्य के अलग-अलग ग्रामीण इलाके से आये थे. पूछने पर इन दुकानदारों ने बताया कि वन मेला में उनका अनुभव सुखद रहा. जामताड़ा से आये गोपीनाथ मंडल ने बताया कि पहली बार किसी मेले में उन्होंने स्टॉल लगाया है. यहां वन उत्पादों के लिए लोगों में उत्साह देखकर उनको अच्छा लगा. उन्होंने बताया कि जंगली क्षेत्र में काम करते हुए कभी ऐसा नहीं लगा कि इन चीजों को लोग समझेंगे और उपयोग भी करेंगे. इनके स्टॉल से महुआ तेल और महुआ केक की खूब बिक्री हुई. वहीं एसोसिएशन की अध्यक्ष सबिता मिश्रा ने जानकारी दी कि वन विभाग और एसोसिएशन की ओर से पहली बार इस तरह का आयोजन किया गया. इसमें लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. कहा कि वन मेला का मकसद जंगली उत्पादों को आम आदमी के समक्ष लाना था.

मच्छर मारने के हर्बल परफ्यूम को लोगों ने सराहा

जमशेदपुर से आयी शिखा जैन ने कहा कि उनके स्टॉल में जंगली उत्पादों से बनाये सौंदर्य प्रसाधन समेत घरेलू इस्तेमाल की कई चीजें हैं. लेकिन सबसे ज्यादा मांग मच्छर मारने के हर्बल परफ्यूम की हुई. शिखा ने बताया कि वो इस परफ्यूम का सीमित स्टॉक ही लेकर आई थीं. उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस परफ्यूम की इतनी मांग होगी.

स्टोन पाउडर के रंग से बनी पेंटिंग ने मोहा मन

चाकुलिया से आए विजय चित्रकार की पेंटिंग को लोगों ने खूब पसंद किया. विजय ने बताया कि स्थानीय पत्थरों के पाउडर से रंग बनाकर पेंटिंग बनायी गयी है. अधिकतर पेंटिंग में जंगल  से संबंधित जनसाधारण का जीवन दिखाया गया था. बताया कि मेले में आकर काफी अच्छा लगा. लोगों ने पेंटिंग तो खरीदी है, साथ ही इस बात को जानने के इच्छुक भी थे कि किस तरह के पत्थर से किस विधि से रंग बनाया जाता है.

स्टॉल लगानेवालों को किया गया सम्मानित

मेले के अंतिम दिन बेस्ट स्टॉल धारकों को सम्मानित किया गया. इसमें पहला स्थान गोंद के पत्तों सो सामग्री बनानेवाले अंबालिका समूह, दूसरा स्थान विजय चित्रकार और तीसरा स्थान जामताड़ा के झार मधु समूह को दिया गया. इसके साथ ही अन्य स्टॉल वालों को प्रोत्साहन पत्र देकर सम्मानित किया गया. इस मौके पर लीना रस्तोगी, पूनम रंजन और संजय कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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