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Jamshedpur : हनी ट्रैप और सेक्सटॉर्शन बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, यहां रोजाना आ रहे हैं 10-15 मामले

सोशल मीडिया पर अनजान का फ्रेंड रिक्वेस्ट आए तो हो जाएं सावाधन, अपराधियों के जाल मं फंसकर हो सकते हैं ब्लैकमेलिंग के शिकार

Raj kishor
Jamshedpur : लौहनगरी जमशेदपुर में साइबर अपराधी आए दिन नये-नये कारनामों को अंजाम दे रहे हैं. कभी बैंक अधिकारी, आर्मी अफसर और बीएसएनएल अधिकारी बनकर लोगों के खाते से रुपये उड़ाने के तो मामले तो सामने आते ही रहते हैं. इस बीच हनी ट्रैप और सेक्सटॉर्शन के मामलों में भी बढ़ोत्तरी आई है. साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों पर पैनी नजर रखनेवालों की मानें तो अपराधियों का एक वर्चुअल गिरोह काम करता है. बात जमशेदपुर की करें तो हर दिन लगभग 10-15 लोग इस गिरोह का शिकार बन रहे हैं. इसमें युवा तो हैं ही, अधिक उम्र के शादी-शुदा के लोग भी शामिल हैं. हालांकि लोक-लाज के भय से 20 से प्रतिशत मामले ही साइबर थाना तक पहुंच पाता है. वह भी तब जब साइबर अपराधियों के जाल में फंसे लोग ब्लैकमेलिंग का शिकार होते-होते उब जाते हैं. तब वे साइबर पुलिस की शरण में जाते हैं.
ऐसे फंसते हैं लोग जाल में
बात हनी ट्रैप की करें या सेक्सटॉर्शन की, इस तरह के मामलों में लोगों को फांसने के लिए साइबर अपराधियों का वर्चुअल गिरोह लगभग एक ही तरह के तरीके का इस्तेमाल करता है. इसके लिए साइबर ठग फेसबुक पर किसी खूबसूरत लड़की का फोटो लगाकर सुनने में मॉर्डन लगने वाले किसी नाम से प्रोफाइल बना देते हैं. फिर शुरू हो जाता है लोगों का प्रोफाइल रिसर्च कर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने का सिलसिला. कई लोगों को इस तरह का प्रोफाइल लुभावना लगता है और वे बगैर जांचे-परखे फ्रेंड रिक्वेस्ट भी एसेप्ट कर लेते हैं. उसके बाद रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करनेवाले को मैसेज भेजा जाता है. जैसे ही दोनों ओर से बातचीत का सिलसिला बढ़ता है. उसी बीच साइबर ठग गिरोह उस व्यक्ति को अपनी बातों में फंसाकर उसका उसका वाट्सएप नंबर मांग लेता है. उसके बाद वाट्सएप पर बात करते-करते वीडियो कॉल करने की इच्छा जाहिर कर दी जाती है. जैसे ही इसके लिए कोई व्यक्ति तैयार होता है, तभी गिरोह की खूबसूरत सी दिखनेवाली कोई महिला सदस्य उसे विडियो कॉल करता है. वह तरह-तरह से उस व्यक्ति को लुभाते हुए उसे न्यूड (नग्न) तक होने पर मजबूर कर देती है. इस बीच सारी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग भी होती रहती है. फिर क्या-जैसे ही कोई न्यूड हुआ उसका सारा खेल रिकॉर्ड होकर साइबर गिरोह के हाथ में पहुंच गया. उसके बाद शुरु होता है उस रिकॉर्डिग को वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने का खेल. इस दौरान अधिकांश लोग लोक-लाज के भय से बैल्कमेलिंग के शिकार होने लगते हैं. साइबर अपराधियों के इस पूरे खेल को अब हनी ट्रैप का नाम दें या सेक्सटॉर्शन का, उसमें कुछ खास अंतर नहीं माना जाता है.
स्क्रीन रिकॉर्डिंग एडिट कर भी किया जाता है ब्लैकमेलिंग
कई मामलों में हनी ट्रैप या सेक्सटॉर्शन के लोग पूरी तरह से शिकार बनने से पहले ही संभल जाते हैं. फिर भी साइबर गिरोह के झांसे में फंसकर थोड़ी बहुत भी गलती करते है तो भी गिरोह के सदस्य उसे फांसकर ब्लैकमेलिंग करने के प्रयास से नहीं चूकते हैं. इस तरह के मामलो में स्क्रीन रिकॉर्डिंग तक एडिट कर दिया जाता है. ताकि साइबर अपराधी किसी तरह उस व्यक्ति को अपने जाल में फांसकर रुयपे ऐंठ सके. इतना ही नहीं, कई मामले फोटो एडिट करने के भी सामने आते हैं.
राजस्थान और गुड़गांव से ऑपरेट होता है गिरोह
साइबर अपराध से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह से लोगों को ठगी का शिकार बनाकर ब्लैकमेलिंग करनेवाला गिरोह ज्यादा राजस्थान और गुड़गांव से ऑपरेट होता है. इस गिरोह का काम ही है लोगों को सोशल मीडिया के जरिए किसी तरह लुभाकर उन्हें गलत हरकत करने पर मजबूर करते हुए उसकी रिकॉर्डिंग कर लेना और उसके बाद ब्लैकमेलिंग करना. यह अलग बात है कि लोकलज्जा के भय से अधिकांश लोग जल्द साइबर थाने में जाकर मामले की शिकायत नहीं करते हैं, लेकिन इस तरह के कई मामलों के निपटारे में जमशेदपुर साइबर पुलिस को सफलता मिल चुकी है. ऐसे में साइबर गिरोह के जाल में फंसे लोगों को साइबर पुलिस के पास जल्द से जल्द बेहिचक जाकर मामले को निपटाने की कोशिश करनी चाहिए. इससे वे कम से कम ब्लैकमेलिंग के शिकार होने से तो बच ही सकते हैं.

जमशेदपुर साइबर थाना में इस तरह इस तरह की कई शिकायतें आ चुकी है. कुछ मामलों में पुलिस को सफलता भी मिली है. बावजूद इसके लोग साइबर अपराधियं के हथकंडो के प्रति जागरुक रहकर इस तरह के मामलों में फंसने से बच सकते हैं. साइबर अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस तेज गति से काम कर रही है. साथ ही इससे बचने के लिए बड़े पैमाने पर जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है. ताकि लोगों को साइबर अपरधियों के जाल में फंसने से बचाया जा सके.

-उपेंद्र मंडल, थाना प्रभारी, जमशेदपुर साइबर थाना

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