NEWSWING
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बेघर चेरो आदिवासी परिवार को नहीं मिल रही है प्रशासन से मदद, पूरा परिवार लिए हुए है बेतला पंचायत भवन में शरण

परिवार को प्रशासन से नहीं मिली सहायता, ग्रामीणों में आक्रोश

730

Pravin Kumar

Latehar: प्राकृतिक आपदा का शिकर हुआ चेरो परिवार पैसे के अभाव के कारण उपचार से भी वंचित है. बिस्तर पर पड़ी 60 साल की मानमति कुंवर आज भी सरकारी सहायता की बाट जोह रही रही है. मानमति कुंवर बेतला पंचायत भवन में असहाय लेटी हुई हैं. पूर्व सीएम हेमंत सोरेन भी परिवार की मदद करने का आग्रह प्रशासन से कर चुके हैं. जबकि आज तक किसी तरह की सरकारी सहायता परिवार को नहीं मिल सकी है. 29 जुलाई को उनके घर के ऊपर बरगद का विशाल पेड़ गिर गया, जिससे घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है. परिवार बेघर हो गया है.

इसे भी पढ़ें-एचईसी आयी, तो एससी-एसटी को पैसा मिला और उनलोगों ने दारू पीकर उड़ा दिया : सांसद रामटहल चौधरी

कब हुई थी घटना ?

श्रीराम सिंह चेरो बताते हैं कि 29 जुलाई को घर के ऊपर पेड़ गिरने से परिवार के 8 सदस्यों को चोटें आई, जिसमें 2 लोगों की हालात गंभीर बनी हुई है. मेरे भाई अर्जुन सिंह का इलाज रिम्स में हो रहा है, वहीं हमारी मां मानमति कुंवर की रीढ़ ती हड्डी टूट गई है. रिम्स के डॉक्टरों ने कहा है कि उन्हे बेहतर ईलाज के लिए बाहर ले जाना होगा.

बरगद का पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त घर
बरगद का पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त घर

इसे भी पढ़ें- आखिर कब होगा 14 हजार करोड़ का एक्शन प्लान, अब तक बिजली की मांग नहीं हो पायी है पूरी

परिवार की आर्थिक दशा ऐसी नहीं कि हम ईलाज के लिए बाहर ले जाएं -श्रीराम सिंह

मानमति कुंवर अपने तीन बेटों और बहुओं के साथ पंचायत भवन में शरण लिए हुए है. सबसे छोटा बेटा अर्जुन सिंह (उम्र 18 वर्ष) का इलाज रिम्स में चल रहा है. घर पर पेड़ गिरने के बाद मां के साथ वो भी घायल हो गया था. उसके दोनों जांघ की हड्डी टूट गयी है. मानमति कुंवर के सबसे बड़े बेटे श्रीराम सिंह बतलाते हैं कि रिम्स में कुछ दिन ईलाज करने के बाद रिम्स ने उन्हे वेल्लोर जाने को कहा. श्रीराम सिंह का कहना है कि वेल्लोर में ईलाज करवाने के लिए वे सक्षम नहीं हैं, क्योंकि वहां दो ढाई लाख रूपये लग जायेंगे. इसलिए मां को वापस गांव ले आये.

इसे भी पढ़ें- अब उप नगर आयुक्त ने संभाला सफाई अभियान, वसूला जुर्माना

घर से बेघर हुए परिवार का अशियाना बना पंचायत भवन

श्रीराम सिंह चेरो कहते हैं कि घर टूट जाने के कारण परिवार सड़क पर आ गया है. परिवार की आर्थिक अवस्था ऐसी नही है कि सभी कुछ तुरंत कुछ जुगाड़ कर सकें. गांव के लोगों और सरकारी अधिकारियों से कुछ आर्थिक मदद मिली है जिससे किसी तरह गुजर बसर हो रहा है.

इसे भी पढ़ें-इमाम कोठी के ट्रस्ट्री को भी पता नहीं और बेच दी गयी मजार की जमीन !

परिवार के समक्ष भोजन और रोजगार का भी संकट है. थोड़ा बहुत जो खाने के सामान ते वे भी घर के साथ ही मिट्टी में मिल गए. सिर्फ एक ही वक्त भोजन का जुगाड़ हो पाता है. अभी धान रोपा में गांव में कुछ काम मिल जा रहा है, जिससे 5-6 किलो अनाज मिल जाता है. परिवार में 15 सदस्य हैं, लेकिन राशन कार्ड में सिर्फ 7 सदस्यों के नाम हैं. परिवार को प्रति महीने 32 किलो अनाज ही मिलता है. घर में खाने की कमी के कारण मानमति कुंवर की एक बहू जो गर्भवति है, उसे परिवार वाले उसके मायके लेस्लीगंज भेजने की सोच रहे हैं.

madhuranjan_add
पीड़ित परिवार की ओर से बीडीओ को दिया गया आवेदन
पीड़ित परिवार की ओर से बीडीओ को दिया गया आवेदन

इसे भी पढ़ें- रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स चुकाने को बाध्य नहीं हैं ग्राहक, जबरन लिये जाने पर जा सकते हैं उपभोक्ता फोरम

परिवार को आर्थिक सहायता के लिए ग्रामीणों ने 30 जुलाई को चक्का जाम किया

परिवार लगातार प्राशासन से आर्थिक मदद और घर बनवाने की मांग कर रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से परिवार को मदद नहीं मिल सकी है. मकान टूटने के अगले दिन 30 जुलाई को परिवार वालों को सरकारी सहायता देने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने चक्का जाम भी किया था. तब प्रशासन ने उन्हें बेतला पंचायत भवन में जगह दी. वहां मौजूद बरवाडीह बीडीओ ने परिवार को सरकारी सहयोग देने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन 13 दिन से ज्यादा हो गए प्राशासन की ओर से कोई मदद नहीं दी गयी है. इस संबंध में परिवार वालों ने 7 अगस्त को बरवाडीह बीडीओ को आवेदन दे कर उनके द्वारा दिए गए आश्वासन की याद दिलाई एवं ईलाज के लिए खर्चा, रहने के लिए घर एवं एक सरकारी नौकरी की मांग की है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गयी है.

इसे भी पढ़ें- डीवीसी में स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति का साक्षात्कार स्थगित, मंत्री ने दिया जांच का आदेश

क्या कहते है अंचल अधिकारी बरवाडीह ?

हम लोगो ने परिवार के साथ हुई दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद जायजा लिया. परिवार को व्यक्तिगत तौर पर सहयोग किया गया है. लेकिन वह पर्याप्त नही है .परिवार का रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है. इसे कल्याण विभाग में भेजा जा रहा है. साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग में भी रिकॉर्ड भेजा जा रहा है. हम लोगों का प्रयास है कि जल्द से जल्द परिवार को ईलाज और आवास के लिए सहायता मिले.

इसे भी पढ़ें-ट्रेन से गिरकर यात्री के दोनों पैर कटे, रेलवे की लापरवाही से आधे घंटे तक तड़पता रहा युवक

क्या कहते हैं राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आप्त सचिव संजय श्रीवास्तव ?

राज्य के सभी जिलों में फौरी तौर पर आपदा राहत के लिए 1 करोड़ रुपए का विशेष फंड रखा गया है. जिससे आपदा के शिकार हुए परिवार को फौरी मदद मिले. तात्कालिक मदद के बाद पीड़ित परिवारों को विभाग से मदद दी जाती है. आपदा के शिकार परिवार को राहत देने की कार्यवाही जिला के उपायुक्त को करनी है.

फोटो एवं वीडियो (साभार)- धीरज कुमार

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Averon

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: