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गृह सचिव ने डीजीपी से कहा आपराधिक मामलों की जांच समय पर करें पूरा

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  • राजनगर कांड संख्या 33/2000 में 18 वर्ष बाद भी अनुसंधान पूरी नहीं होने पर जतायी चिंता
  • 24 घंटे में पूरा करें अनुसंधान, सभी जिलों से मांगी जाये रिपोर्ट
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Deepak

Ranchi: राज्य के गृह सचिव एसकेजी रहाटे ने पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय से कहा है कि सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुसार आपराधिक मामलों का अनुसंधान एक समय सीमा में पूरा करें. उन्होंने कहा है कि झारखंड में आपराधिक कांडों का निबटारा काफी समय तक लंबित रहता है, जिससे सरकार की बदनामी होती है.

उन्होंने राजनगर कांड संख्या 33 /2000 का अनुसंधान 18 वर्ष बाद भी पूरा नहीं होने पर चिंता जतायी है. मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र दायर करते हुए त्वरित निबटारा करने की बातें कही थीं.

इस पर सरकार के खिलाफ यह भी कहा गया था कि तीन वर्ष से अधिक समय पूरा होने के बाद भी चार्ज शीट दाखिल नहीं की गयी. उन्होंने कहा है कि झारखंड उच्च न्यायालय के पारित आदेश से ऐसा प्रतीत होता है कि उपरोक्त मामले में अनुसंधान कार्य में घोर लापरवाही और शिथिलता बरती गयी. जो काफी चिंताजनक है.

ऐसे मामलों से पुलिस की छवि और अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार की भी बदनामी होती है. उन्होंने कहा है कि पूरे प्रकरण में किसी वरीय पुलिस महानिरीक्षक, अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के स्तर से जांच कराये जाने की आवश्यकता है. यहां यह भी जरूरी है कि कांड को लंबित रखने में कौन-कौन अनुसंधान पदाधिकारी, एसपी, डीआइजी जिम्मेवार हैं.

24 घंटे के अंदर अनुसंधान पूरा करें

गृह सचिव ने कहा है कि आपराधिक कांडों का अनुसंधान 24 घंटे के अंदर पूरा करने का प्रावधान सीआरपीसी में है. परंतु सीआरपीसी की धारा-57 में यह कहा गया है कि बहुत सारे मामलों में अनुसंधान का कार्य 24 घंटे में पूरा नहीं किया जा सकता है. सीआरपीसी की धारा 167 (2) में यह नियम है कि दस वर्ष की सजा वाले मामलों में 60 दिन और 10 वर्ष से अधिक की सजा के मामले में 90 दिनों में अनुसंधान जरूरी है. यदि गिरफ्तारी हुई हो, तो आरोप पत्र समर्पित नहीं किये जाने की स्थिति में जमानत देने की बातें कही गयी हैं. इन नियमों के अनुपालन के संबंध में पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों के एसपी, अपराध अनुसंधान विभागों को भेजा जाना चाहिए.

दो से लेकर 10 वर्षों तक के लंबित मामलों की रिपोर्ट जिलों से मंगाएं

गृह सचिव ने कहा है कि सभी आपराधिक मामलों का ब्योरा जिलों से मंगाया जाये. दो वर्ष या अधिक, पांच वर्ष से अधिक तथा 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित आपराधिक कांडों की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय में मंगायी जाये. इन सभी कांडों की समीक्षा पुलिस मुख्यालय के स्तर से करते हुए लंबित मामलों के लिए एक टाइम लाइन निर्धारित की जाये.

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