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2012 से 2017 तक झारखंड के 218 NGO का FCRA लाइसेंस रद्द कर चुका है गृह मंत्रालय

Pravin Kumar

Ranchi : वर्ष 2012 से वर्ष 2017 के बीच झारखंड के 218 एनजीओ (गैर सरकारी संगठनों) का लाइसेंस गृह मंत्रालय रद्द कर चुका है. इसके पीछे एनजीओ द्वारा अपने लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं करना, विदेशों से मिले अनुदान का दुरुपयोग करना, समय पर कानूनी गाइडलाइन का अनुपालन नहीं करना, बैंक खाता में परिवर्तन की सूचना गृह मंत्रालय को नहीं देना, समय पर रिटर्न फाइल नहीं करना एवं रिटर्न, रिपोर्ट, दान की सूचना नहीं देना प्रमुख कारण रहा है. वैसे एनजीओ, जो निबंधन के बाद अपने उद्देश्य के अनुरूप अनुदान प्राप्त नहीं कर सके, उनमें वर्ष 2017 में 95, वर्ष 2015 में 113, वर्ष 2014 में 02, वर्ष 2012 में 07 एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया गया है. वहीं, 75 एनजीओ ने अपना लाइसेंस रिन्यूअल नहीं कराया.

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क्या है विदेशों से अनुदान प्राप्त करने के कानून का इतिहास

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1974 में देश में पहली बार विदेशों से अनुदान प्राप्त करने के लिए कानून बना. उस दौर में सिर्फ गृह मंत्रालय को विदेशों से अनुदान प्राप्त करने की सूचना देनी होती थी और उद्देश्य बताना पड़ता था. लेकिन, इमरजेंसी के दौर में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के समय एफसीआरए कानून में कई तरह के नियम जोड़े गये. विदेशों से अनुदान प्राप्त करनेवाले एनजीओ पर  गृह मंत्रालय नजर रखने लगा. तर्क यह दिया गया था कि विदेशों से अनुदान प्राप्त करके देशविरोधी गतिविधियों में एनजीओ सक्रिय हैं. उस समय पंजाब में खालिस्तान की मांग जोरों पर थी. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में एनजीओ पर और शिकंजा कसना शुरू हुआ. इस वक्त विस्थापन विरोधी आंदोलनों में एनजीओ की भगीदारी समाने आयी थी और कानून को 2010-11 में और कड़ा किया गया, जिसके तहत एनजीओ को विदेशों से मिल रही अनुदान की राशि को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में प्रयोग नहीं किया जा सकता है.

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क्या कहते हैं एफसीआरए कानून के जानकार अनिल चौधरी 

एफसीआरए कानून के जानकार अनिल चौधरी का कहना है कि कोई भी एनजीओ, जिसका निबंधन कराया जा चुका है, सरकार उसकी जांच कर सकती है. वर्तमान समय में एनजीओ, जिनके बोर्ड मेंबर पर मुकदमा है, उनका भी निबंधन सरकार द्वारा पेंडिंग कर दिया जा रहा है. राजनीतिक दलों ने एफसीआरए कानून में अपनी सुविधा के अनुसार कुछ बदलाव कर लिये हैं. इसमें मेदांता और स्टोलाइट कंपनी से कांग्रेस और बीजेपी ने चंदा लिया था, तो दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगायी थी. लेकिन, इन दोनों राजनीतिक दलों ने वैसी कंपनियां, जिनका निबंधन देश में हुआ है, उनसे चंदा लेने की स्वतंत्रता कानून में परिभाषित की.

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झारखंड के एनजीओ पर कसा जा रहा शिकंजा

फिलहाल झारखंड के एनजीओ पर सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है. विदेशों से अनुदान प्राप्त करनेवाले चर्च से जुड़े 88 एनजीओ की जांच जारी है. इन एनजीओ से सीआईडी ने विदेशों से मिले फंड का लेखा-जोखा और कागजात मांगे हैं. सीआईडी ने एफसीआरए रजिस्ट्रेशन पेपर, एफसीआरए बैंक अकाउंट एवं सब अकाउंट, विदेशी फंड के एमओयू पेपर, डोनेशन पर्चा, वार्षिक रिपोर्ट, रजिस्ट्रेशन का बायलॉज, पैन कार्ड, ऑडिट रिपोर्ट, इनकम टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, कैश बुक, लेजर, पेटी कैश बुक, परचेज कमिटी फाइल, कार्यकारिणी समिति के रजिस्टर की मांग की है. फिलहाल 37 एनजीओ की जांच चल रही है.

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चर्च से जुड़े संस्थानों ने किया है विरोध

इस मसले पर चर्च से जुड़े मिशनरीज एनजीओ द्वारा विरोध दर्ज कराया जा चुका है. मिशनरीज एनजीओ से जुड़े पदाधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सरकार आखिर क्यों सिर्फ चर्च से जुड़े एनजीओ की जांच करा रही है. सरकार को यह अधिकार है कि कभी भी किसी भी एनजीओ के कागजात की जांच कर सकती है, लेकिन सिर्फ चर्च के एनजीओ की जांच कर सरकार मिशनरियों के खिलाफ पूर्वाग्रह से कार्य कर रही है, जो गलत है. चर्च संस्थान का कहना है कि जब हम गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुरूप सभी तरह के नियम और शर्तों का अनुपालन कर रहे हैं, तो आखिर चर्च संस्थानों की ही जांच क्यों, बाकी सभी एनजीओ की भी जांच होनी चाहिए.

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