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होम आइसोलेशन के मरीज जा रहे डिप्रेशन में, मांग रहे साइकियाट्रिस्ट से मदद

  • घर में रहते-रहते हो रहे डिप्रेशन के शिकार
  • सबसे ज्यादा आनलाइन सर्च कर रहे कोरोना के बारे में

Ranchi: कोरोना कि सेकेंड वेव का कहर जारी है. रांची शहर में हर दिन हजार के करीब कोरोना संक्रमण के नये मामले मिल रहे हैं. वही पूरे राज्य की बात करें तो यह आंकड़ा छह हजार के करीब है.

सीरियस मरीजों को छोड़ दिया जाए तो माइल्ड सिम्पटम्स और एसिंप्टोमेटिक मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है. इलाज के दौरान घर में बंद कोरोना के मरीज डिप्रेशन में जा रहे हैं. कोरोना का डर उनपर हावी हो चुका है.

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ऐसे मरीज साईकियाट्रिस्ट को कॉल कर मदद मांग रहे है. साथ ही सवाल पूछ रहे हैं कि कोरोना खत्म होगा या नहीं, हम सब बचेंगे कि नहीं.

सेहत पर पड़ रहा असर

कोरोना से ग्रसित मरीज घरों में रहते हुए इलाज तो करा रहे हैं, दवा लेने और खाना के अलावा उनके पास काफी समय होता है. इस खाली समय में वे अपने मोबाइल पर सबसे ज्यादा कोरोना से जुड़े मैटेरियल ढूंढ रहे हैं. यह बातें मरीजों की काउंसिलिंग के दौरान सामने आई है.

साइकियाट्रिस्ट ने बताया कि कोरोना के मरीज इलाज से लेकर खबरें और उससे जुड़ी अफवाहें हर चीज ऑनलाइन देख रहे हैं, जिसका उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है.

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104 पर हर दिन आ रहे 30 कॉल्स

104 हेल्पलाइन नंबर हेल्थ डिपार्टमेंट ने जारी किया है, जहां पर लोग किसी भी बीमारी से ग्रसित होने पर ऑनलाइन डॉक्टर से कंसल्ट कर सकते हैं.

अन्य बीमारियों की तरह है अब मेंटल हेल्थ के मरीज भी कॉल कर डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं. हर दिन 30 कॉल केवल मेंटल हेल्थ से जुड़े होते हैं. कोविड के मरीज स्ट्रेस में होते हैं और इससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में पूछ रहे हैं

केस 1

बोकारो के रहने वाले पी शर्मा 75 साल के हैं. उन्हें कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया 3 दिनों तक हॉस्पिटल में उन्हें एडमिट कर इलाज किया गया. स्थिति नॉर्मल हुई तो डॉक्टर ने उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया.

होम आइसोलेशन के दौरान वह लगातार अपने कमरे में रहे और दिन भर मोबाइल पर कोरोना से जुड़ी हर चीज को खंगाल दिया. इसका उनके दिमाग पर ऐसा असर पड़ा कि कोरोना के अलावा कुछ और बात ही नहीं कर रहे. परिजनों ने साइकियाट्रिस्ट को कॉल कर मदद मांगी.

केस 2

रांची के 29 साल के सूरज को कोविड के सिम्पटम्स थे. ऑफिस में एक साथी पॉजिटिव होने से वह काफी डर गया. उसे लगने लगाने लगा कि अब उसका क्या होगा. वह अपने सर्किल में कॉल कर पूछने लगा कि उसे बेड कैसे मिलेगा.

ऑक्सीजन मिलेगा कि नहीं. इस चक्कर में वह कई दिनों तक सो नहीं पाया. बाद में फैमिली मेंबर्स ने साइकोलॉजिस्ट से उसकी काउंसलिंग कराई. अब वह थोड़ा ठीक है और उसमें काफी बदलाव देखने को मिल रहा है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ भाग्यश्री कर की माने तो इस बार कोरोना लोगों के दिल और दिमाग पर हावी है. वही सोशल मीडिया पर मिल रही जानकारी से वह ज्यादा परेशान है.

इसलिए सोशल मीडिया पर मिली जानकारी को पहले जांच लें उसके बाद ही उस पर भरोसा करें. हमारे पास हर दिन 10 कॉल आते हैं तो उसमें 9 मामले कोरोना से जुड़े होते हैं.

न्यूरो साइकियाट्रिस्ट डॉ केशव की माने तो इस बार कोरोना का डर लोगों के मन में समाया हुआ है. स्ट्रेस की वजह से वह कुछ भी समझ नहीं पा रहे. हर दिन के केस, ऑक्सीजन की कमी, मौत के आंकड़े यह चीजें देखने के बाद उनमें डिप्रेशन की समस्या काफी हो गई है.

कोरोना होने के बाद तो लग रहा है कि जैसे उनका सब कुछ खत्म हो गया हो. इसलिए डरने की जरूरत नहीं है. काउंसलिंग से उनकी समस्या दूर की जा सकती है.

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