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होल्डिंग टैक्स : टारगेट से 7 करोड़ अधिक की वसूली, अब 60 करोड़ का टारगेट

Ranchi: रांची नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान करीब 49 करोड़ के राजस्व वसूली की है. इस राशि में 47 करोड़ होल्डिंग टैक्स और 2 करोड़ रुपये ट्रेड लाइसेंस के रूप में जमा हुए हैं. निगम ने इस वित्तीय वर्ष में टारगेट से 7 करोड़ रुपये अधिक की वसूली की है. टैक्स बढ़ोतरी को देखते हुए अब नगर आयुक्त ने इस वित्तीय वर्ष (2019-10) में 60 करोड़ रुपये टारगेट राजस्व शाखा के कर्मचारियों को दिया है.

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जून माह तक है 25 करोड़ का टारगेट

राजस्व शाखा की सिटी मैनेजर फरहत अनीसी की मानें, तो गत अप्रैल माह की शुरुआत में ही नगर आयुक्त ने राजस्व वसूली को लेकर एक समीक्षा बैठक की थी. इसमें उन्होंने शाखा को 60 करोड़ वसूलने का टारगेट दिया था. साथ ही इस जून माह तक ही 25 करोड़ रुपये होल्डिंग टैक्स के रूप में जमा सुनिश्चित करने को कहा है. राजस्व वसूली में आम लोगों को कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए उन्होंने सहायक नगर आयुक्त रजनीश कुमार की देखरेख में होल्डिंग टैक्स वसूलने की प्रक्रिया को सरल और सहज करने की बात कही है, ताकि लोगों से यह टैक्स वसूलने में सहूलियत हो सके.

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होल्डिंग टैक्स में निगम दे रहा है रीबेट

अधिकारी का कहना है कि टैक्स जमा करने के लिए लोगों को कई तरह की रीबेट भी दी जाती है. निगम के जन सुविधा केंद्र में अपने पूरे होल्डिंग टैक्स का भुगतान करने पर लोगों को 5 प्रतिशत तक की रीबेट दी जायेगी. वहीं ऑनलाइन टैक्स भुगतान करने पर लोगों को 10 प्रतिशत की रीबेट दी जायेगी. कंपनी का कर्मचारी अगर घर आकर टैक्स की वसूली करता है, तो उस दशा में लोगों को किसी तरह की कोई रीबेट नहीं दी जायेगी. इसके अलावा लोगों को पूरे वित्तीय वर्ष की चारों तिमाही में टैक्स देने की छूट दी गयी है. तय समय सीमा में टैक्स भुगतान नहीं करने पर लोगों से 1 प्रतिशत की पेनाल्टी (कुल 9 प्रतिशत) भी लेने की बात उन्होंने कही है. यह 9 प्रतिशत पेनाल्टी पहली तिमाही के बाद लिये जाने का प्रावधान है.

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ज्यादातर लोग ऑनलाइन टैक्स का करते हैं भुगतान

विभिन्न वार्डों में रहनेवाले लोगों से होल्डिंग टैक्स नहीं वसूलने की बात पर सिटी मैनेजर का कहना है कि टैक्स वसूलनेवाली कंपनी स्पेरो सॉफ्टेक को इस काम के लिए आउटसोर्स किया गया है. इनके कर्मचारी ही विभिन्न वार्डों में टैक्स वसूली का काम करते हैं. अगर कोई व्यक्ति यह कहता है कि उनके वार्ड में संबंधिक कंपनी के कर्मचारी टैक्स वसूलने नहीं जाते हैं, तो निगम को इतने राजस्व की वसूली संभव नहीं हो पाती. उन्होंने यह भी कहा कि आज राजधानी के ज्यादातर लोग ऑनलाइन टैक्स का भुगतान ही निगम को करते हैं.

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