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झारखंड के रग-रग में हॉकी, हर स्तर पर खिलाड़ियों का जलवा

Amit Jha

Ranchi: झारखंड के रग-रग में हॉकी अरसे से रही है. पिछले 5 माह में देश में खेली गयी हॉकी की नेशनल चैंपियनशिप में यह साबित होता भी दिखा है. हॉकी के नेशनल टूर्नामेंटों में हॉकी झारखंड का जलवा देखते ही बन रहा है. जनवरी से अब तक देश में सब जूनियर (लड़का, लड़की), जूनियर (लड़का, लड़की) और सीनियर (लड़का, लड़की) में झारखंड की टीम देश की टॉप तीन टीमों में अपना हुनर साबित कर चुकी है. अभी तमिलनाडु में चल रही 12वीं हॉकी इंडिया राष्ट्रीय जूनियर पुरुष हॉकी चैंपियनशिप में झारखंड की टीम ने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय कर दिखाया.

इस तरह से हॉकी झारखंड की यह छठी टीम बनी जिसने इस वर्ष राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इस स्तर तक जगह बनाई है. झारखंड के अब तक के 22 सालों के खेल इतिहास में यह पहली मर्तबा देखने को मिला है जब एक साल के भीतर सब जूनियर से सीनियर लेवल तक यहां की हॉकी टीम ने कम से कम क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह तय की. यह हॉकी में झारखंड के चमकदार भविष्य की उम्मीद बांधती है.

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दमखम और तकनीक का उदाहरण

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इस साल अलग अलग स्तर पर खेले गये हॉकी टूर्नामेंटों में झारखंड की टीमों ने अपनी छाप छोड़ी है. सब जूनियर महिला एवं पुरुष में वह फाइनल तक पहुंची. रजत पदक हासिल किया. जूनियर (महिला) टीम ने रजत पदक पर कब्जा जमाया. सीनियर महिला टीम के हाथ कांस्य पदक लगा. इस तरह से टोटल चार टूर्नामेंटों में मेडल हासिल किये. इसके अलावा जूनियर और सीनियर (पुरुष) टीम ने क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफलता पायी थी. हॉकी सिमडेगा के प्रमुख मनोज कोनबेगी के मुताबिक हालिया समय में हॉकी में झारखंड की टीम और बेहतर हुई है.

यही वजह है कि खिलाड़ियों की बेहतर तकनीक और उसका दमखम टूर्नामेंटों में देखने को मिल रहा है. हरियाणा, ओड़िशा जैसी देश की टॉप टीमों की राह पर यहां के प्लेयर्स सबों का ध्यान खींच रहे हैं. दूसरे राज्यों की टीमें सिमडेगा आकर हॉकी की बारीकियों को सीखने में दिलचस्पी दिखा रही हैं.

नंगे पैरों से सितारा बनने का सफर

राज्य में सिमडेगा, खूंटी जैसे इलाकों से लगातार ओलंपियन, इंटरनेशनल, नेशनल प्लेयर्स सामने आते रहे हैं. अमूमन बगैर सुविधाओं के ही कई खिलाड़ी सुदूरवर्ती गांवों, कस्बों से आगे बढ़े और अपनी पहचान बनायी है. ओलंपियन सलीमा टेटे, निक्की प्रधान ने तो हालिया टोक्यो ओलंपिक तक अपना जादू दिखाया. हॉकी का क्रेज गांव गांव में ऐसा है कि नंगे पैर ही छोटे छोटे बच्चे हॉकी स्टिक या बांस का डंडा लेकर हॉकी का गुर सीखने में लग जाते हैं.

अभी भोपाल में खेले गये 12वीं हॉकी इंडिया राष्ट्रीय सीनियर महिला हॉकी चैंपियनशिप में हॉकी झारखंड ने कांस्य पदक जीता. इस टीम की एक रोचक बात यह थी कि इसके सभी 18 खिलाड़ी बेरोजगार हैं. टीम के 6 खिलाड़ियों ने तो कोरोना काल में अपने अपने गांव में रहकर ही तैयारी की थी. इसके अलावा सिमडेगा के आवासीय हॉकी सेंटर में एक भी पुरुष कोच नहीं. खूंटी में भी यही स्थिति है. मतलब साधन, संसाधनों के अभावों के बीच भी हॉकी की शानदार पौध यहां तैयार हो रही है.

टीम तैयार करने में साधना

हॉकी झारखंड के अध्यक्ष भोला नाथ सिंह कहते हैं इस वर्ष सब जूनियर, जूनियर एवं सीनियर तीनों फॉर्मेट के महिला एवं पुरुष वर्गों में झारखंड की कुल 6 टीमों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया. सभी टीमें क्वार्टर फाइनल तक पहुंची. चार को तो पदक भी मिला. इसके लिए सभी खिलाड़ी, टीम के प्रशिक्षक और मैनेजर बधाई के पात्र हैं. टीम के चयनकर्ताओं का भी योगदान अहम है.

उन्होंने कड़ी मेहनत की. टीम चयन करते समय उन्होंने काफी बारीकी से खिलाड़ियों पर ध्यान रखा. पिछले एक साल से वे एक-एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर नजर रखे हुए थे. प्रैक्टिस मैचों, कैंपों में अच्छा खेलने वालों को मौका दिया गया. बड़े मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पहचान की और इस आधार पर झारखंड टीम का गठन किया.

 

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