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अनुकंपा पर सरकारी नौकरी पाने में हिंदी टाइपिंग अब जरूरी नहीं

  • मिलेगी आश्रितों को तत्काल सहायता
  • कार्मिक विभाग ने नियमों को किया शिथिल

Ranchi: झारखंड के सरकारी कर्मियों की मृत्यु होने जाने के बाद उनके आश्रित को अनुकंपा पर नौकरी प्राप्त करने के लिए हिंदी टाइपिंग की अनिवार्यता के नियम को शिथिल कर दिया गया है.

अब किसी सरकारी कर्मचारी का असमायिक निधन हो जाता है तो उनके आश्रित को नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं अर्हता प्रस्तावित पद के लिए नियुक्ति नियमावली के अनुसार रहेगी, पर हिंदी टाइपिंग जानने की शर्त नियुक्ति के समय अनिवार्य नहीं रहेगी.

हालांकि, नियुक्ति के बाद उन्हें हिंदी टाइपिंग सीखनी होगी. कार्मिक विभाग ने एक दिसंबर 2015 को निकाले गये आदेश में संशोधन कर दिया गया है. इसकी जानकारी सभी विभागों को दी गयी है.

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अनुकंपा पर नौकरी पाने के बाद हिंदी टाइपिंग सीखना होगा जरूरी

नियुक्ति के बाद हिंदी टाइपिंग सीखना जरूरी होगा. हिंदी टाइपिंग की निर्धारित गति भी प्राप्त करनी होगी. जब तक हिंदी टाइपिंग की गति प्राप्त नहीं कर ली जाती और विभागीय टंकण परीक्षा उतीर्ण नहीं हो जाते तब तक उसकी सेवा संपुष्टी नहीं की जायेगी.

इसके अभाव में वेतन वृद्धि भी अनुमान्य नहीं होगी. टंकण परीक्षा में उतीर्ण होने के पूर्व की स्थगित वेतन-वृद्धि वैचारिक रूप से अनुमान्य होगी, परंतु बकाया राशि नहीं मिलेगी.

क्यों नियमों को किया गया शिथिल

कार्मिक विभाग के अनुसार अनुकंपा आधार पर नियुक्ति मामले में सीधी भर्ती नियमावली की शर्तों को लागू करना न्यायोचित नहीं है क्योंकि भर्ती नियमावली सीधी नियुक्ति के मामले में गठित की जाती है.

जबकि अनुकंपा से संबंधित मामले सीधी नियुक्ति के मामले नहीं है. यदि सीधी नियुक्ति के मापदंड को अनुकंपा के मामले में लागू किए जायेंगे तो हिंदी टाइपिंग अनिवार्य शैक्षणिक अर्हता होने पर अनुकंपा का लाभ मृतक के आश्रित परिवार को जल्द दिया जाना कठिन हो जायेगा.

ऐसा इसलिए कि हिंदी टाइपिंग तकनीकी दक्षता की चीज है जिसे प्राप्त करने में मृत सरकारी सेवक के आश्रित को समय लग सकता है.

सेवाकाल में सरकारी सेवकों के असामयिक निधन के बाद उनके आश्रित परिवार के जीविकोपार्जन का आधार अचानक समाप्त हो जाने के कारण उस परिवार को आर्थिक संकट से उबारने तथा परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता पहुंचाने के सरकार के उदेश्य पूर्ति नहीं होने के कारण सह मामला सरकार के समक्ष विचाराधीन था.

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