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हिंदी मात्र राजभाषा या राष्ट्रभाषा नहीं है, यह भारत की अस्मिता है: जेबी पांडेय

Balangir. हिंदी भारत मां की बिंदी है. यह मात्र राजभाषा या राष्ट्रभाषा नहीं है, अपितु यह भारत मां की अस्मिता है. यह भारत की  बिंदी है. हिंदी नवलेखन शिविर भारत मां की इसी बिंदी के प्रचार प्रसार का मूर्त रूप है. अंग्रेजी में पैर के लिए केवल एक शब्द लेग(Leg) है,जबकि हिन्दी में अनेक. जैसे छू लो तो चरण, अड़ा दो तो टांग, धंस जाए तो पैर,फिसल जाए तो पांव,आगे बढ़ाना हो तो कदम,रा ह में चिह्न छोड़े तो पाद,बाप की हो तो लात, गधे की हो तो दुलत्ती,घुंघरू बांध लो तो पग,खाने के लिए लंगडी, और खेलने के लिए लंगडी. है न हमारी हिंदी नायाब, लाजबाब और कामयाब. इसीलिए तो हम कहते हैं-
कोटि कोटि कंठों की भाषा,
जन-मन की मुखरित अभिलाषा.
हिंदी है पहचान हमारी,
हिंदी हम सब की परिभाषा.
मंगलवार को ये बातें रांची विश्वविद्यालय पीजी हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.जे बी पांडेय ने कहीं. वे राजेंद्र विश्वविद्यालय बलांगीर और केंद्रीय हिंदी निदेशालय नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आठ दिवसीय नव लेखन शिविर के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व के 140 देशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है. यह हिन्दी की सामर्थ्य का द्योतक है.

 

नव लेखन शिविर की अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र विश्वविद्यालय बलांगीर के कुलपति डॉक्टर यू.बी महापात्रा ने कहा कि नव लेखन शिविर से नवयुवकों को नवलेखन की प्रेरणा प्राप्त होगी, लेकिन हमारी सलाह है कि नव लेखन से पहले आज की पीढ़ी को खूब पढ़ना चाहिए. बगैर पढ़े सोचे विचारे नव सृजन संभव नहीं है.आज की पीढी अध्ययन से विमुख हो रही है. नव लेखन शिविर उन्हें अध्ययनोभिमुख करेगा, ऐसा विश्वास है. नवलेखन शिविर के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय हिंदी निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ शैलेश विडालिया ने कहा कि केंद्रीय हिंदी निदेशालय की स्थापना 1 मार्च 1960 को भारत सरकार के द्वारा की गई थी. इसका उद्देश्य हिंदी का प्रचार प्रसार करना है. केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा वर्ष भर में कई योजनाएं चलाई जाती हैं ,जिसमें छात्रों का यात्रा भ्रमण, अतिथि व्याख्यान माला आयोजन,शब्दकोश निर्माण, पत्रिका का प्रकाशन और लेखन शिविर का आयोजन आदि प्रमुख हैं.प्राय: अहिंदी भाषा भाषी क्षेत्रों में नव लेखन शिविर का आयोजन किया जाता है. इस शिविर के माध्यम से नव युवकों को साहित्य की विभिन्न विधाओं यथा कविता ,कहानी, नाटक उपन्यास निबंध आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण टिप्स दिए जाते हैं. इस अवसर पर हिंदी विशेषज्ञ के रूप में डॉ. जे के शर्मा (संबलपुर)और डॉ सीमा असीम सक्सेना(बरेली) ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए. इस शिविर में उड़ीसा एवं झारखंड के रांची विश्वविद्यालय केअनेक प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया .कुल 30 प्रतिभागी सम्मिलित हुए ,जिसमें 10 रांची विश्वविद्यालय से हैं(दयानन्द राय,अशोक कुमार प्रमाणिक, अंगद प्रमाणिक, लाल मोहन महतो,उमा शंकर महतो, राम कुमार प्रसाद, प्रियंका कुमारी, आरती कुमारी) शेष उडीसा के हैं. कार्यक्रम का श्री गणेश सुश्री स्वरूपा सिंह एवं अशोक कुमार प्रमाणिक ने सरस्वती वंदना से किया. आगत अतिथियों का भव्य स्वागत एवं संचालन विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ संजय कुमार सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन केंद्रीय हिंदी निदेशालय के लेखापाल विनोद शर्मा ने किया. इस अवसर पर डा जे बी पाण्डेय ने डा शैलेश विडालिया,डा संजय कुमार सिंह,डा सुजाता दास,डा सीमा असीम सक्सेना, डा जे के शर्मा , विनोद शर्मा ,स्वरूपा सिंह को कुलपति के कर कमलों से राष्ट्र सृजन अभियान द्वारा प्रदत करोना कर्मवीर सम्मान तथा शाल ओढ़ाकर सम्मानित कराया. राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ.

 

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