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हिंडालको पब्लिक हियरिंग आज, 50 सालों में किए गए विकास कार्यों का हिसाब पूछेगी जनता

Bishunpur : बिशुनपुर प्रखंड में करीब 50 सालों से बॉक्साइट उत्खनन कर रहे हिंडाल्को कंपनी प्रखंड के पश्चिमी पठार में न्यू आमतिपानी बॉक्साइट माइंस खोलने जा रही है. जिसके लिए रविवार को बनारी स्थित पांचो पांडव मैदान में पब्लिक हियरिंग का आयोजन किया गया है. जहां प्रखंड के लोग हिंडालको द्वारा किए गए विकास कार्यों से कितना संतुष्ट हैं या नहीं इसके बारे में अपनी बातें रखेंगे.

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क्या कहना है ग्रामीणों का

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इस संबंध में कई ग्रामीणों ने बताया कि हिंडालको 50 सालों से क्षेत्र में बॉक्साइट उत्खनन का काम कर रही है. उसने इतने सालों से लेकर आज तक क्षेत्र का शोषण करने का काम किया है. विकास के नाम पर यहां के आदिवासियों और आदिम जनजातियों को कंपनी द्वारा छला गया है. इसलिए इस बार ग्रामीण हिंडालको के वरीय पदाधिकारियों से पूछेंगे कि वे 50 सालों में क्षेत्र के विकास के लिए कौन-कौन सी योजना चलाए हैं. अगर कोई योजना चलायी गयी है तो वह धरातल पर कहां है. जबकि उत्खनन करने से पहले कंपनी ने क्षेत्र का चहुमुखी विकास करने के लिए और तमाम बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ इकरारनामा भी किया था.

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लोगों में जगी थी उम्मीद

जब बिशुनपुर प्रखंड के पठारी क्षेत्र में हिंडाल्को द्वारा बॉक्साइट उत्खनन करने के लिए जमीन लीज पर ली गयी तो यहां के लोगों में काफी उम्मीद जगी थी. लोगों को लगा कि अब क्षेत्र से पलायन नहीं होगा. लोगों को रोजगार मिलेगा. साथ ही क्षेत्र में बुनियादी सुविधा उपलब्ध होगी. लेकिन लोगों का यह सपना हिंडालको ने कभी पूरा नहीं किया. यहां के जमीन मालिक आज हिंडालको के दैनिक मजदूर बनकर रह गए हैं.  उनको अब तक परमानेंट भी नहीं किया गया है.

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क्षेत्र में हुआ आधा-अधूरा काम

क्षेत्र में विकास करने के नाम पर मिशनरी स्कूल में दो शिक्षक दे दिए गए हैं. वहीं अस्पताल के नाम पर एक भवन तो बना दिया गया है. जिसका मुख्य द्वार हमेशा बंद रहता है. साथ ही अस्पताल में दवा और डॉक्टरों का घोर अभाव रहता है. कहने को लोगों की सुविधा के लिए कंपनी द्वारा एंबुलेंस की व्यवस्था भी दी गई है. जिसे मरीज नहीं कंपनी के कर्मचारी अपनी सुख-सुविधा के लिए उपयोग करते हैं. वहीं पोल पोल पाठ में एक प्रशिक्षण भवन का निर्माण कराया गया है. जहां आज तक एक भी व्यक्ति ने प्रशिक्षण नहीं लिया है. जबकि उसी गांव में बाल विद्या केंद्र का भी निर्माण किया गया है. लेकिन जगह काफी कम है.

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सड़क और पानी का हाल है बेहाल

सड़क मर्मती का काम कंपनी ने जिसे दिया है वह सड़क की मरम्मती का काम भी नहीं करते हैं. जबकि सड़कों पर घुटना भर गड्ढा बना हुआ रहता है. जिसकी वजह से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है. क्षेत्र में पेयजल का घोर अभाव है. लोग आज भी कई किलोमीटर की दूरी तय कर नाले से पानी लाकर पीते हैं.

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