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पलामू में होगी हिमाचल के सेब की खेती, 99 प्रभेद के लिए मिट्टी व जलवायु उपयुक्त

Palamu : सेब के शौकीनों के लिए गुड न्यूज है. अब हिमाचल की तरह मेदिनीनगर से सटे जोरकट में सेब आसानी से मिल सकेगा. मंगलवार को पलामू प्रमंडल के आयुक्त जटा शंकर चौधरी ने जोरकट गांव में गोपाल लाल अग्रवाल, उमेश अग्रवाल एवं अखिलेश अग्रवाल द्वारा की जा रही सेब के हरिमन 99 प्रभेद के सेब की खेती का शुभारंभ किया.

मौके पर आयुक्त ने कहा कि पलामू के किसान भाई अब सेब की खेती भी सहजता से कर सकेंगे. गर्मियों का सेब कहा जाने वाला सेब का हरिमन 99 प्रभेद के लिए पलामू की मिट्टी व जलवायु उपयुक्त मानी जा रही है.

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पलामू के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी सलाह के बाद जिले के अलग-अलग स्थानों पर कुछ पौधों से ट्रायल के बाद जोरकट गांव में सेब की खेती प्रारंभ की गयी है.

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कहा कि पलामू के लिए पलामू के लिए सुखद बात है कि प्राइवेट इन्वेस्टर्स यहां कमर्शियल खेती करना प्रारंभ किया है. उन्होंने कहा कि वे शुरू से इसकी हिमायती रहे हैं कि सिर्फ किसानों के भरोसे व्यवसायिक खेती को नहीं छोड़ा जाए.

प्राइवेट इन्वेस्टर्स को कृषि के क्षेत्र में कदम बढ़ाने से बेहतर सफलता मिलेगी. इससे अन्य किसान एवं प्राइवेट इन्वेस्टर्स भी प्रेरित होंगे. उन्होंने कहा कि पलामू में सेब का पौधा लगाया जाना अच्छी बात है.

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क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि उनके मार्गदर्शन में यहां सेब की खेती की जा रही है.

हरिमन 99 का पौधा यहां के जलवायु के लिए उपयुक्त है. इस प्रभेद का पौधा 45 से 50 डिग्री तापमान पर भी फल देते हैं. इसके स्वाद तथा रंग में कोई अंतर नहीं होती. ठंडे प्रदेशों जैसा ही फल आता है. उन्होंने कहा कि हरिमन 99 पौधे लगाने का दिसंबर से जनवरी का महीना उपयुक्त है. यह ग्राफ्टेड पौधा लगाया जा रहा है, जो दो से ढाई साल में ही फल देना प्रारंभ कर देगा.

उन्होंने कहा कि पलामू के किसान भाई अगर टिश्यू कल्चर के पौधे लगाते हैं, तो वह डेढ़ साल में ही फल देना प्रारंभ करेगा. यहां दो पौधों के बीच की दूरी 12 फीट रखा गया है.

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सेब की खेती कर रहे अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि उनके परिवार द्वारा एक ही स्थान पर करीब एक एकड़ भूमि पर सेब की खेती की जा रही. उनके द्वारा हिमाचल से सेब के 100 पौधे मंगाये गये हैं. इसमें अच्छी आमदनी की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इसे विस्तारित भी किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि करीब 9 एकड़ की भूमि के अधिकांश भाग में उन्होंने फलदार पौधे की खेती कर रहे हैं. इसमें मुख्य रूप से टिश्यू कल्चर वर्मा टी, थाई वैरायटी का अमरूद, केसर आम, नागपुरी संतरा, मौसंबी, टिश्यू कल्चर नींबू एवं टिश्यू कल्चर बांस के पौधे लगाए हैं. अमरूद में फल भी आने लगे हैं. उन्होंने कहा कि फलदार पौधों की सफलता को देखते हुए ही उन्होंने सेब की खेती को मन बनाया है.

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मल्टीपरपस कोल्ड स्टोरेज की भी योजना

अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि उनके द्वारा एक मल्टीपरपस कोल्ड स्टोरेज का भी निर्माण कराया जा रहा है. यह कार्य प्रक्रिया में है. इसे बन जाने से पलामू में उत्पादित फलों एवं सब्जियों को रखने में सहुलियत होगी.

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