न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

हिमाचल प्रदेशः आय से अधिक संपत्ति मामले में पूर्व सीएम वीरभद्र ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

998

New Delhi: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति (डीए) एकत्र करने के मामले में आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश को बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी. कांग्रेस के 82 वर्षीय नेता और उनकी पत्नी ने निचली अदालत के 10 दिसंबर 2018 के आदेश रद्द करने का अनुरोध किया है. अदालत ने सिंह, उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था.

याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी. निचली अदालत द्वारा औपचारिक तौर पर दंपती के खिलाफ आरोप तय किया जाना बाकी है. और मामला 29 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.

क्या था निचली कोर्ट का फैसला

ज्ञात हो कि निचली अदालत ने दिसंबर के अपने आदेश में कहा था कि पूर्व सीएम बिना हिसाब की रकम को सेब की बिक्री से मिली राशि के तौर पर पेश करके, कर प्राधिकारियों को नुकसान पहुंचाना चाहते थे. अदालत ने कथित तौर पर अपराध को उकसावा देने के मामले में उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोप तय करने का आदेश दिया था.

मामले के अन्य सात आरोपियों में एलआईसी एजेंट आनंद चौहान, चुन्नी लाल चौहान, जोगिंदर सिंह घाल्टा, प्रेम राज, वी चंद्रशेखर, लवन कुमार रोच और राम प्रकाश भाटिया शामिल हैं.

अदालत ने अपने 105 पृष्ठ के आदेश में कहा था कि वीरभद्र सिंह और आनंद चौहान ने एक एमओयू पर पूर्व की तारीख देकर ‘कपटपूर्ण तरीके और बेईमानी’ से हस्ताक्षर किया था, ताकि यह धारणा बनाई जा सके कि उन्होंने 15 जून 2008 को इसपर हस्ताक्षर किया था. इसमें कहा गया था कि चूंकि दस्तावेज को बिना हिसाब के धन को सेब की बिक्री से हुई आय के तौर पर दिखाने के लिये तैयार किया गया था इसलिए वे जालसाजी के लिये आरोपित किये जाने के लिये भी जिम्मेदार हैं.

सीबीआई ने दर्ज किया था केस

Related Posts

जम्मू-कश्मीर : राज्य सचिवालय भवन से जम्मू-कश्मीर का झंडा हटा,  सिर्फ तिरंगा लहराया

जम्मू कश्मीर में अब तक अलग निशान (झंडे) और अलग विधान की परंपरा चली आ रही थी.

SMILE

ज्ञात हो कि सीबीआई ने यूपीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहने के दौरान सिंह के कथित तौर आय के ज्ञात स्रोतों से करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा करने के मामले में उनके और अन्य के खिलाफ मामला दायर किया था.

500 पृष्ठों से अधिक का आरोप पत्र अदालत में दायर किया गया. जिसमें दावा किया गया था कि सिंह ने करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की जो केन्द्रीय मंत्री के उनके कार्यकाल के दौरान उनकी कुल आय से 192 प्रतिशत तक अधिक है.

नौ लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 109 (उकसाने) और 465 (जालसाजी के लिए सजा) और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत दंडनीय अपराधों के लिए अंतिम रिपोर्ट दायर की गई. 442 पन्नों के आरोप पत्र में तकरीबन 225 लोगों को गवाह बनाया गया था.

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के पास स्थानांतरित कर दिया था. हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने छह फरवरी 2016 को सीबीआई से सिंह को गिरफ्तार नहीं करने और उन्हें (सिंह) जांच में शामिल होने का आदेश दिया था.

सीबीआई ने सिंह की गिरफ्तारी पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के रोक लगाने के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. उच्चतम न्यायालय ने सिंह की याचिका हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से दिल्ली उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दी थी.

इसे भी पढ़ेंः आंकड़ों से समझें कैसे खोखला है 2020 तक सभी बेघरों को आवास देने का सीएम रघुवर दास का दावा ?

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: