JHARKHAND TRIBES

सांस्कृतिक वैभव का अलख जगाता हिजला मेला

Dumka: दुमका प्रखंड के सरवा पंचायत स्थित हिजला गांव में 129 वर्ष पुराने राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव को और भी भव्य एवं आकर्षक रूप दिया गया है. 129 वर्ष पुराना यह राजकीय जनजातीय मेला है, जो झारखंड के लिए गौरव की बात है.

यह मेला यहां के आदिवासियों के लिए सिर्फ मेला नहीं है. इससे यहां के आदिवासियों का सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव है. इसका समयानुसार अपेक्षित प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया. इसके बाद भी हिजला मेला संथाल समुदाय में अपनी खास संस्कृतिक महत्व को बनाये रखने में सफल रहा है.

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कब हुई थी मेले की शुरुआत

झारखंड के संथालपरगना क्षेत्र में जनजातीय समुदाय के लोगों के रास-रंग को प्रदर्शित करनेवाले हिजले मेला की शुरुआत वर्ष 1890 में दुमका के तत्कालीन अंग्रेज उपायुक्त आर कास्टेयर्स ने की थी.

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ वर्ष 1855 में संथाल विद्रोह हुआ था, जिसका अंग्रेज प्रशासन ने दमन कर दिया था. इससे प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच बनी दूरी को कम करने के लिए इस मेले की शुरुआत की गयी थी.

तब से यह मेला हर साल इसी स्थान पर लगता आ रहा है. इस मेले की खास बात यह है कि आजादी के पहले तक यह मेला संथालपरगना के विकास के लिए नियम और योजना बनाने के महत्वपूर्ण अवसर माना जाता था.

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शुक्रवार को हुआ मेला का शुभरंभ

झारखंड के दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के मनोरम तट पर 129 वर्ष पुराना प्रसिद्ध जनजातीय हिजला मेला शुक्रवार को परम्परागत रीति-रिवाज एवं गीत-नृत्य के बीच शुरू हुआ. दुमका अंचल क्षेत्र के हिजला गांव के प्रधान सुनीराम हांसदा ने परम्परागत गीत नृत्य के साथ आयोजित भव्य समारोह में नारियल फोड़ कर और फीता काट कर इस ऐतिहासिक हिजला मेले का विधिवत उद्घाटन किया.

इस दौरान डीआइजी राजकुमार लाकड़ा, उपायुक्त राजेश्वरी बी, पुलिस अधीक्षक वाइएस रमेश, डीडीसी शेखर जमुआर, धुनी सोरेन, जिला परिषद अध्यक्ष जायस बेसरा व एसडीओ राकेश कुमार मौजूद रहे.

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क्या है मेले में खास आकर्षण

मेला में स्थानीय खेल को विशेष स्थान दिया गया है. सात दिनों तक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है. इसके अलावा मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. इसमें संथालपरगना की संस्कृति, लोक गीत एवं नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं अन्य कार्यक्रम होंगे.

यह मेला संथालपरगना के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहनेवाले जनजातीय समुदाय के लोगों के रास-रंग को प्रदर्शित करने का माध्यम बन गया है.

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