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हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य की स्थिति को बताया गंभीर, कहा- अधिकारी सबक लें, एफिडेविट-एफिडेविट न खेलें

♦रिम्स में कोरोना जांच और स्वास्थ्य उपकरणों के मामले में हुई सुनवाई

♦स्वास्थ्य सचिव, रिम्स निदेशक हुए उपस्थित

Ranchi : रिम्स में सुविधाओं को लेकर हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य के सचिव सिर्फ एफिडेविट-एफिडेविट खेल रहे हैं. मामला स्वास्थ्य से जुड़ा है. लोग आक्रोशित हो जायेंगे. लेकिन राज्य के सचिव को कोई फर्क नहीं पड़ता. वहीं इस दौरान स्वास्थ्य सचिव, रिम्स निदेशक और सिविल सर्जन मौजूद थे. इस दौरान सरकार पक्ष की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी गयी. बताया गया कि सदर अस्पताल में व्यवस्था की गयी है. वहीं रिम्स के लिए सीटी स्कैन मशीन खरीदी जा रही है. कोर्ट ने इस दौरान कहा कि अधिकारियों को पहले घटित घटनाओं से सबक लेना चाहिए. वर्तमान स्थिति को कोर्ट ने गंभीर बताया. बीतें सोमवार को भी हाइकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. जिसमें कोर्ट ने सिविल सर्जन रांची को गलत बयानबाजी करने पर फटकार लगायी थी. कोर्ट ने सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि सिविल सर्जन गलत बयानबाजी न करें. ये अपराध की श्रेणी में आता है. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ने की.

रिम्स में कोरोना जांच के लिए उपकरणों और सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गयी थी. इसके पहले सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि रिम्स संसाधनों और उपकरणों की खरीद का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे. जिससे सरकार जल्द से जल्द खरीदारी कर सके. इसके पहले सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि रिम्स में कोरोना जांच के जितने भी सैंपल हैं, उनकी जांच जल्द से जल्द हो. इसमें आरटीपीसीआर मशीन और तकनीकि कर्मियों की नियुक्ति की बात भी की गयी है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने रांची सिविल सर्जन पर नाराजगी व्यक्त की थी. कोर्ट ने कहा था कि सैंपल जांच के लिए लिये जा रहे हैं लेकिन जांच नहीं हो रहा. इस मामले में कोर्ट ने सिविल सर्जन को फटकार लगायी थी. जिसमें कहा गया था कि सिविल सर्जन काम नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें दें. कोर्ट के लोगों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं तो आम लोगों के साथ सिविल सर्जन कैसा व्यवहार करते होंगे.

 

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