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फर्जी नक्सली सरेंडर मामले में हाई कोर्ट सख्त, गृह सचिव तलब, अगली सुनवाई 6 सितंबर को

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Ranchi : झारखंड में हुए फर्जी नक्सली सरेंडर मामले में हाई कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने गृह सचिव को अगली सुनवाई के दिन कोर्ट में सशरीर हाजिर होने को कहा है. अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी. हाई कोर्ट ने कैमरा प्रोसीडिंग करने का भी आदेश दिया है. सुनवाई के दौरान सिर्फ हाई कोर्ट के जस्टिस और गृह सचिव मौजूद रहेंगे. इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट में फर्जी नक्सली सरेंडर मामले पर 12 जुलाई को सुनवाई हुई थी. मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार के रवैये पर असंतुष्टि जतायी थी. कोर्ट ने सरकार के गृह सचिव को 7 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था. साथ ही यह भी कहा था कि अगर 7 अगस्त तक सरकार जवाब दाखिल नहीं करती है, तो गृह सचिव को कोर्ट में हाजिर होना होगा.

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कोर्ट पहले ही जता चुकी है नाराजगी

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बता दें कि पूरे मामले में पूर्व में केंद्र सरकार के जवाब पर कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया था. याचिकाकर्ता झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक के अधिवक्ता राजीव कुमार ने कोर्ट से कहा कि चार तिथियां दी गयीं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया. वर्ष 2019 में चुनाव होनेवाला है, तब तक इस मामले को लटकाकर रखा जायेगा और इस मामले से संबंधित कई अधिकारी रिटायर हो जायेंगे. राज्य सरकार की ओर से किसी प्रकार का कोई जवाब कोर्ट में पेश नहीं किया गया, जिसको लेकर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की थी.

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क्या है मामला

यह पूरा मामला रांची, खूंटी, गुमला व सिमडेगा के भोले-भाले 514 युवकों को नक्सली बताकर सरेंडर कराने का है. इस मामले में एजेंट और अफसरों ने सरेंडर करनेवाले युवकों से हथियार खरीदने के नाम पर लाखों रुपये वसूले, ताकि सरेंडर के समय उन्हें वे हथियार उपलब्ध कराये जा सकें. यहां उल्लेखनीय है कि जिस वक्त 514 युवकों को कोबरा बटालियन के जवानों की निगरानी में पुरानी जेल परिसर में रखा गया था और हथियार के साथ उनकी तस्वीरें ली जा रही थीं, उस वक्त सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के आईजी डीके पांडेय हुआ करते थे. डीके पांडेय अभी राज्य के डीजीपी हैं और इस मामले में डीजीपी डीके पांडेय, एडीजी एसएन प्रधान समेत सीआरपीएफ के अन्य अफसर संदेह के घेरे में हैं.

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झारखंड डेमोक्रेटिक संस्था ने दायर की थी जनहित याचिका

वहीं, मामले की जांच को लेकर रांची पुलिस पर लापरवाही बरतने का भी आरोप है. रांची पुलिस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उस रिपोर्ट पर गौर ही नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि पुलिस के सीनियर अफसरों ने सरेंडर का आंकड़ा बढ़ाने के लिए नक्सली सरेंडर पॉलिसी का दुरुपयोग किया. इस मामले को लेकर झारखंड डेमोक्रेटिक संस्था की ओर से झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी.

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