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इंडिया रिपोर्ट कार्ड कंपनी को PR का काम देने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब 

गैरमुनासिब तरीके से किसी कंपनी को फायदा पहुंचाने की बू आती है.

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Ranchi: शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस डीएन पटेल की बेंच ने इंडिया रिपोर्ट कार्ड प्राइवेट लिमिटेड को मीडिया और पीआर का काम देने के मामले में सुनवाई की. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने पूरे मामले पर सरकार से जबाव मांगा है.

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झारखंड सरकार ने 2017 में कैबिनेट मीटिंग के जरिए केवल नॉमिनेशन बेसिस पर इंडिया रिपोर्ट कार्ड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को मीडिया और पीआर का काम 14.48 करोड़ में दे दिया था. याचिका कर्ता हाईकोर्ट की एडवोकेट रिंकी झा ने याचिका के जरिए कोर्ट को कहा है कि सरकार का यह फैसला गलत है. फैसला लेने में सीवीसी के नियमों की अनदेखी की गयी है.

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किसी तरह से कंपनी काम लेने लायक नहीं: रिंकी

रिंकी झा का कहना है कि किसी भी तरह से कंपनी यह काम लेने के लायक नहीं है. टेंडर के जरिए एक ऐसे कंपनी को काम दिया जाना था जिसके पास करीब 10 साल का तजुर्बा हो. इतना ही नहीं और भी कई नियमों को दरकिनार कर सरकार ने अपने खास लोगों को फायदा पहुंचाने का काम किया है. टेंडर के हिसाब से टेंडर का जो क्राइटेरिया है, उसमें कम से कम 10 साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए और तीन साल में 50 करोड़ का टर्न ओवर होना चाहिए.

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सरयू राय ने भी जतायी थी आपत्ति

मामले पर सरयू राय ने भी आपत्ति जतायी थी. उन्होंने कैबिनेट के फैसले को बदलने के लिए सीएम रघुवर दास को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने कहा था कि या तो फैसला बदल लिया जाए, या फिर कैबिनेट के इस फैसले में मेरी असहमति दर्ज की जाए. उन्होंने कहा था कि फैसला वापस नहीं हुआ तो सरकार पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया रिपोर्ट कार्ड मीडिया को काम देने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जो संलेख तैयार किया गया था, वह सेंट्रल विजिलेंस कमीशन और जुडिशल गाइडलाइन के खिलाफ है.

सरयू राय ने अपने पत्र में कहा है कि उनके लिए ऐसे फैसले का समर्थन करना संभव नहीं है. सरयू राय ने कहा है कि कैबिनेट का फैसला गलत है जिसमें गैरमुनासिब तरीके से किसी कंपनी को फायदा पहुंचाने की बू आती है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निर्णय को स्वीकार करने का मतलब है कि जानबूझकर मक्खी को निगल जाना.

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