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हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता 634 पदों पर नियुक्ति में सवर्णों को 10 % आरक्षण को सही ठहराया, एकलपीठ का आदेश खारिज किया

सरकार के निर्णय को सही ठहाराया और JPSC को नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने का दिया निर्देश

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक अभियंताओं को नियुक्ति में सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को सही बताते हुए एकलपीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया है,जिसमें पिछली रिक्तियों में सवर्णों को आरक्षण नहीं देने का निर्देश देते हुए सहायक अभियंताओं की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी थी.

पहले की रिक्तियां भी नए नियम से भरी जायेंगी

शुक्रवार को जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सरकार की अपील याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया जिस दिन से शुरू होती है उसी समय का नियम लागू होता है.पहले की रिक्तियां भी नए नियम के तहत भरी जातीं हैं.

अदालत ने सरकार के निर्णय को सही ठहाराया और जेपीएससी को नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया. इसके पहले अदालत ने अपील याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद 23 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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जेपीएससी अब मुख्य परीक्षा का करेगा आयोजन

कोर्ट के इस फैसले के बाद जेपीएससी अब अभियंताओं की नियुक्ति के लिए मुख्य परीक्षा का आयोजन करेगा. पहले यह परीक्षा 22 जनवरी को होनी थी, लेकिन 21 जनवरी को हाईकोर्ट के एकलपीठ ने सवर्णों को पिछली रिक्तियों में आरक्षण देने को गलत बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी थी. जेपीएससी ने सहायक अभियंताओं के कुल 634 पद पर नियुक्ति के लिए 2019 में विज्ञापन निकाला था.

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2019 में प्रकाशित किया था विज्ञापन

बता दें,जेपीएससी सहायक अभियंताओं की 634 पदों पर नियुक्ति कर रहा था. नियुक्ति के लिए विज्ञापन 2019 में विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. इस नियुक्ति में वर्ष 2015 से 2019 तक की रिक्तियां शामिल की गयी थीं और सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण भी दिया जा रहा था.

सरकार के इस आदेश को रंजीत कुमार सिंह और अन्य ने एकलपीठ में चुनौती दी थी. इसमें कहा गया था कि इस नियुक्ति में नियुक्ति में 2015 से 2019 तक की रिक्तियां शामिल हैं.

ऐसे में सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में सवर्णों को आरक्षण देने का निर्णय लिया है. ऐसे में पिछली रिक्तियों के आरक्षण को शामिल नहीं किया जा सकता.

एकलपीठ ने लंबी सुनवाई के बाद प्रार्थी के दलीलों को सही माना और जेपीएससी की ओर से निकाले गए विज्ञापन को यह कहते हुए रद्द कर दिया की नियम बनने के पहले की रिक्तियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. एकलपीठ ने जेपीएससी को फिर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया.

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एकलपीठ के आदेश को सरकार ने चुनौती दी

एकलपीठ के इस आदेश को सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी. सरकार की ओर से कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया जिस दिन से शुरू होती है उसी समय का नियम लागू होता है. पहले की रिक्तियां भी नए नियम के तहत भरी जातीं हैं. इसके समर्थन में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश भी पेश किए गए.

जबकि जेपीएससी का कहना था कि उसने सरकार के नियमों के अनुसार ही विज्ञापन निकाला था. सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने 23 जुलाई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

शुक्रवार को सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया और जेपीएससी को नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया.

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