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झारखंड सरकार को हाई कोर्ट का निर्देश- सीओ, सीआई और अमीन की कारगुजारियों पर रखें नजर

अंचल कार्यालयों से लोगों को परेशान करने पर दर्ज की गयी थी याचिका

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Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अंचल अधिकारियों, अंचल निरीक्षकों और अमीन पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने क्वाशिंग मैटर (66/2019) पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है. फैसले में कहा गया है कि राज्य सरकार अंचल कार्यालयों की ओर से आम लोगों पर अनावश्यक कार्रवाई करने की काफी शिकायतें आ रही हैं. अंचल कार्यालयों के कर्मी और अधिकारी गलत वाद में लोगों को परेशान करते हैं.

अदालत ने कहा कि यदि कोई भी सरकारी अमीन अपनी रिपोर्ट देता है, तो उसकी जांच संबंधित अंचल के अंचल निरीक्षक और अंचल अधिकारी को करना जरूरी है. अंचल अधिकारियों को किसी भी तरह का आदेश निर्गत करने के पहले विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए. अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि एक अंचल अधिकारी की रिपोर्ट पर जिला प्रशासन के उच्च पदस्थ अधिकारी एकतरफा कार्रवाई की अनुशंसा कर देते हैं.

क्या है मामला

अधिवक्‍ता राजेश कुमार की तरफ से अरगोड़ा अंचल के अंचल अधिकारी वंदना भारती की गलत रिपोर्ट पर उनके मुवक्किल को परेशान किये जाने की याचिका दायर की गयी थी. इसमें अंचल अधिकारी ने एक गलत सीमांकन वाद में बिना किसी सूचना के हिनू निवासी आर सिंह और उमाकांत पासवान का मकान तोड़ने का आदेश निर्गत कर दिया था. 29 दिसंबर 2018 को इस पर सदर अनुमंडल अधिकारी से पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने की अनुशंसा भी करा ली गयी थी. इतना ही नहीं अंचल के अमीन ने फर्जी रिपोर्ट दिखलाकर उपरोक्त लोगों को अतिक्रमणकारी भी घोषित कर दिया था. 31 दिसंबर 2018 को अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षक और अमीन मो अबदुल्ला समेत कई ने बाउंड्री तोड़ने के लिए पुरी प्रशासनिक ताकत दिखलायी. इसके बाद न्यायालय में पीड़ित पक्ष की तरफ से अंचल अधिकारी के आदेश को निरस्त करने की याचिका दायर की गयी. अंचल अधिकारी पर पीड़ितों को अतिक्रमणकारी घोषित करने के आदेश को रद्द करने की मांग भी की गयी थी.

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