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हाइकोर्ट भवन निर्माण मामलाः 15 दिनों से सीएमओ में दबी है 697.32 करोड़ के इस्टीमेट को रद्द करने व अफसरों- इंजीनियरों पर कार्रवाई की फाइल

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Ranchi: हाइकोर्ट भवन निर्माण के 697.32 करोड़ के इस्टीमेट को रद्द करने और दोषी अफसरों व इंजीनियरों पर कार्रवाई की फाइल पिछले 15 दिनों से सीएमओ में दबी पड़ी है. सीएमओ ने अब तक कोई एक्शन नहीं लिया है. मामला हाइकोर्ट भवन निर्माण के नये इस्टीमेट (प्राक्कलन) से जुड़ा है. इसमें हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए सरकार ने विकास आयुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी. कमेटी की जांच में गड़बड़ी की पुष्टी हुई. कमेटी ने 30 अक्तूबर को जांच रिपोर्ट भवन निर्माण विभाग को भेज दी. 19 नवंबर को कार्रवाई की अनुशंसा के साथ रिपोर्ट मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) पहुंची. सीएमओ के स्तर से अब तक न तो इस्टीमेट रद्द हुआ, न ही अफसरों-अभियंताओं पर कार्रवाई हुई और न ही हाइकोर्ट भवन निर्माण करानेवाली कंपनी रामकृपाल कंस्ट्रक्शन पर कोई एक्शन लिया गया.

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तथ्य 

  • 267.66 करोड़ का इस्टीमेट बढ़ा कर 697.32 करोड़ कर दिया गया.
  • 366.03 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति को कम कर 267.66 करोड़ पर काम के लिए टेंडर किया.
  • टेंडर के लिए कम की गई राशि 98.43 करोड़ में 30.91 करोड़ का काम फिर उसी ठेकेदार रामकृपाल कंस्ट्रक्शन को दे दिया.

महत्वपूर्ण तारीख

  • 30 अक्तूबरः विकास आय़ुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने रिपोर्ट दी.
  • 19 नवंबरः कार्रवाई की अनुशंसा के साथ रिपोर्ट सीएमओ पहुंची.
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कमेटी ने 11 गड़बड़ियों को किया था उजागर

विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने इस्टीमेट और टेंडर से जुड़ी 11 गड़बड़ियों को उजागर किया था.  कमेटी ने हाइकोर्ट भवन निर्माण के 697.32 करोड़ के पुनरक्षित प्रस्ताव को निरस्त करने और समय सीमा के अंदर काम पूरा करने की बात कही थी. कमेटी ने नये कार्य का फिर से ओपेन टेंडर कराने की अनुशंसा की थी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी अनुशंसा की थी कि 30.91 करोड़ के काम को हटा कर मूल निविदा निकाली जाये. कमेटी की अनुशंसा यह भी थी कि ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के दोषी अफसरों और इंजीनियरों पर कार्रवाई होनी चाहिये.

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