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नक्सली हमले का मास्टर माइंड हिडमा एके-47 का है शौकीन, पत्नी राजे भी करती है लीड

Chhattisgarh: बीजापुर-सुकमा में हुए नक्सली हमले का मास्टर माइंड हिडमा है. छोटे कद का हिडमा 1990 में नक्सली संगठन से जुड़ा था. कम वक्त में ही उसने संगठन में अपना इतना प्रभुत्व जमा लिया कि उसे सेंट्रल कमिटी का सदस्य बना दिया गया. 2010 में दंतेवाड़ा में हमला कर 76 सीआरपीएफ जवानों की हिडमा की बटालियन ने ही घटना को अंजाम दी थी. उसके बाद संगठन में उसका कद बढ़ता गया.पुलिस के पास अभी हिडमा की कोई पहचान नहीं है. हिडमा एके-47 का शौकीन है. यही वजह है कि सुकमा नक्सली मुठभेड़ में भी शहीद जवानों से एके-47 लूटे गये.

हिडमा की पत्नी राजे भी नक्सली है

हिडमा की पत्नी राजे भी नक्सली है. वह भी डिवीजनल कमिटी की सदस्य है. हिडमा के साथ वह भी नक्सली हमले को लीड करती है. कहा जाता है कि हिडमा हमेशा सामने से भिड़त में विश्वास रखता है.

एक हाथ में बंदूक और दूसरी में नोटबुक लेकर चलता है हिडमा

कुख्यात नक्सली हिडमा एक हाथ में बंदूक और दूसरी में नोटबुक लेकर चलता है. नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद ही हिडमा ने अपने पढ़े लिखे साथियों से अंग्रेजी सीखी थी. इसके साथ ही उसकी दूसरी पहचान है कि उसके बाएं हाथ की एक अंगुली कटी हुई है. पुलिस के पास अभी उसकी कोई दूसरी पहचान नहीं है. वर्षों पुरानी एक तस्वीर के सहारे ही पुलिस उसे ढूंढ रही है.

चार चक्रीय सुरक्षा घेरे में रहता है

हिडमा की बटालियन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है. उस तक पहुंचना किसी के लिए मुश्किल है, क्योंकि वो चार चक्रीय सुरक्षा घेरे में रहता है. ऐसे में पुलिस के लिए भी इस तक पहुंचना आसान नहीं है. यह पीएलजीए बटालियन-नंबर एक का हेड है. साथ ही जंगल में कनेक्टिविटी की दिक्कत होने की वजह से पुलिस की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं.

हिडमा के कई नाम

हिडमा को कई नामों से जाना जाता है. इसे संगठन में देवा और भीमा के नाम से भी जाना जाता है. कुछ सरेंडर कर चुके नक्सली नेता बताते हैं कि एक नेता के संगठन में दर्जनों उपनाम होते हैं.

फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलता है हिडमा

बताया जाता है कि हिडमा की बटालियन ही सभी बड़ी वारदातों को अंजाम देती है. इसे नक्सलियों का बटालियन नंबर एक कहा जाता है. इस बटालियन का सबसे बड़ा कमांडर हिडमा ही है. दंतेवाड़ा से लेकर झीरमघाटी तक में खूनी खेल हिडमा की बटालियन ने ही खेला है. वह सुकमा जिले के पुवार्ती गांव का रहने वाला है. सुकमा के जगरगुंडा इलाके में इसका काफी प्रभुत्व है. दसवीं तक की पढ़ाई पूरी कर नक्सल आंदोलन में शामिल होने वाला हिडमा फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलता है. इसकी वजह से अर्बन नक्सली नेताओं का वह चहेता है.

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