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हाय राजद…बाय राजद…!

समर्पित और सृजन की सोंच से लैस तथा कायदे की पढ़ाई व अनुभव समेटे कार्यकर्ता हाशिए पर ढकेल दिये गये.

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Surendranaath Mishra

कोडरमा की राजनीतिक बदलाव की बुनियाद कुछ ही महीनों पहले धनबाद सर्किट हाउस में रख दी गई थी. कोडरमा सांसद के सर्मथकों की एक टोली ने सर्किट हाउस में रघुवर दास को तथ्यों और तर्कों की रौशनी में अन्नपूर्णा देवी की जमीनी पकड़ और क्षेत्र की बड़ी यादव नेता होने के सभी संदर्भों से अवगत कराया था.

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कोडरमा सांसद और विधायकों ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हर मौके पर गुटबाजी को हवा दी. समर्पित और सृजन की सोच से लैस और कायदे की पढ़ाई व अनुभव समेटे कार्यकर्ता हाशिए पर धकेल दिए गए. इनमें से कई को अपमान बोध हुआ. लिहाजा ज्यादातर ने अलग रास्ता अख्तियार कर लिया और कुछ चुप बैठ गए.

तमाम हालिया घटनाओं पर मुख्यमंत्री की पैनी नजर थी. कोडरमा की पढ़ी लिखी विधायक ने बीच-बीच में अपनी बेवकूफियों की बानगी पेश कर मीडिया और सोशल मीडिया में ढेर सारी सूर्खियां बटोरी.

ऐसे प्रश्नों के बाद भी उन्हें सूबे की शिक्षा महकमे की कमान संभालने देते रहने की कौन सी राजनीतिक विवशता रघुवर दास के पास थी ?

ऐसा प्रतीत होता है कि कोडरमा सांसद के प्रभावशाली करीबियों ने धनबाद सर्किट हाउस के बंद कमरे में मुख्यमंत्री के समक्ष अन्नपूर्णा देवी की खूबियों का बखान कर रवींद्र राय का नुकसान ही कर दिया.

बहरहाल अन्नपूर्णा देवी को अपनी टीम में शामिल कर रघुवर दास ने एक साथ कई लोगों को दमदार मैसेज तो दे ही दिया है.

दूसरी तरफ झारखंड में राजद की तेजी से सिमटते दायरे के दौरान अन्नपूर्णा देवी जैसी मजबूत स्तंभ को दूसरे उखाड़ ले गए. इसकी वजह है, लालू यादव के परिवार वालों ने अन्नपूर्णा देवी को उचित तरजीह देने में कोताही बरतनी शुरू कर दी होगी. तो वहीं दूसरी ओर झारखंड में डूबती नाव की पतवार संभालने से देवी जी ने इंकार ही नहीं किया बल्कि पार्टी को बेसहारा भी कर गयी. जसके बाद सत्ता के दलालों को राजनीति का जोर का झटका धीरे से लगना शुरू हो गया. आगे-आगे देखिये होता है क्या…

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