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धरोहर: तीन सौ सालों से खड़ा है राजधानी में कल्पतरु, दुर्लभ वृक्ष को है संरक्षण की जरूरत

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Ranchi : कल्पतरू पेड़ का जिक्र पुराणों में है. मान्यता भी है कि कल्पतरू के नीचे बैठकर कुछ मांगा जाये, तो वह मुराद पूरी हो जाती है. जमीन में गहराई तक जड़ें, लंबी-लंबी टहनियां इस पेड़ की पहचान हैं. अपनी विशालकाय संरचना के साथ ये अपनी पौराणिक महत्वों और औषधीय गुणों के कारण भी जानी जाती है. साउथ अफ्रीका में इन वृक्षों की बहुलता है.

लेकिन राजधानी रांची में भी इसके तीन पेड़ मौजूद हैं. जो डोरंडा मुख्य सड़क के बीचों बीच है. आठ साल पहले इसी जगह चार पेड़ थे. लेकिन क्षेत्र में लगातार हो रहे निमार्ण कार्य और वाहनों के आवागमन से पेड़ की जड़ें कमजोर होती गयीं और पेड़ गिर गया.

वर्तमान में जो तीन पेड़ बचे हैं, उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है. पर्यावरणविदों के अनुसार, पेड़ की जड़ें लगातार कमजोर हो रही हैं. जिसका मुख्य कारण कंक्रीट की सड़कें हैं. हालांकि रांची वन प्रमंडल की ओर से इस दुर्लभ वृक्ष को बचाने के लिए इसके चारों ओर घेराबंदी किया है.

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तीन सौ साल पुराने हैं वृक्ष

कल्प का अर्थ हजार होता है और तरू का अर्थ वृक्ष. ऐसे में इस वृक्ष का नाम ही हजारों सालों तक जीवित रहने वाली पेड़ है. जानकारी मिली है कि रांची में ये पेड़ लगभग तीन सौ साल पुराने हैं. रांची के ही कुछ व्यापारियों ने साउथ अफ्रीका से लगाकर इस पेड़ को यहां लगाया था. तब डोरंडा एक खुला क्षेत्र हुआ करता था.

समय के साथ-साथ पेड़ों ने विशालकाय रूप लिया. जबकि एक पेड़ गिर गया. ऐसे में तीन पेड़ वर्तमान में बचे हुए हैं. इस पेड़ का उपयोग मलेरिया की दवाइयों में किया जाता है. ऐसे में इन पेड़ों को बचाना काफी जरूरी है.

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सड़क के कंपन और प्रदूषण से बढ़ रही परेशानी

पर्यावरणविद डॉ नीतिश प्रियदर्शी ने जानकारी दी कि तीनों पेड़ काफी दुलर्भ हैं. पूरे भारत में मात्र नौ पेड़ हैं. जिसमें से उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में एक-एक पेड़ है. जबकि रांची में तीन हैं. पौराणिक कथाओं को छोड़ दें तो इस पेड़ के औषधीय गुण भी हैं. ऐसे में इसे बचाना काफी जरूरी है.

उन्होंने कहा कि तीनों पेड़ मुख्य सड़क पर है. दुर्भाग्य है कि एक पेड़ आठ साल पहले गिर गया. ऐसे में अन्य तीनों पेड़ों को बचाना काफी जरूरी है. जबकि लगातार वाहनों के आवागमन से इन पेड़ों के जड़ों को साल दर साल कमजोर होते पाया गया है. जिसका मुख्य कारण वाहनों से होने वाले कंपन है. वहीं प्रदूषण में लगातार बढ़ोतरी के कारण भी पेड़ को काफी नुकसान हो रहा है.

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जनता जागरूक हो

बातचीत के क्रम में डॉ नीतिश ने कहा कि, पेड़ को बचाने के लिए जरूरी है कि जनता जागरूक हो. उन्होंने कहा कि कई बार पेड़ को देखने जाने से जानकारी हुई कि पेड़ में स्थानीय लोगों ने कील आदि ठोंक दिया है. जबकि कुछ कंपनियां व दुकानें अपने प्रचार के लिए भी पेड़ में कील ठोक रहे हैं.

जबकि पहले इस पेड़ की टहनियों को सड़क के आर पार देखा जाता था, अब पेड़ की टहनियां भी काफी सीमित रह गई हैं, क्योंकि लोग लकड़ी काट देते हैं.

ऐसे में जरूरी है कि लोग लकड़ी न काटे साथ ही पेड़ के महत्व को समझें. उन्होंने कहा कि वर्तमान में वन विभाग भी इस पेड़ को बचाने के लिए प्रयासरत हैं. अपनी नर्सरी में विभाग में ऐसे पेड़ों को लगाया है.

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