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Jharkhand Sthaniya Niti: झामुमो और कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़, कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा की असहमत‍ि और न‍िर्दल व‍िधायक सरयू राय का आईना, ये तस्‍वीर कुछ कहती है

Rakesh Ranjan
Jamshedpur : एक कहावत है, राजनीत‍ि और जंग में सबकुछ जायज है. यहां कोई कि‍सी का दोस्‍त या दुश्‍मन नहीं होता. यहां र‍िश्‍ते वक्‍त के हिसाब से तय होते हैं. दोस्‍त कभी दुश्‍मन बन जाता है तो दुश्‍मन दोस्‍त. झारखंड गठन के बाइस बरस होने के करीब है. इस अवध‍ि में सूबे की जनता ने स‍ियासत के कई रंग देखे हैं. हर द‍िन बदलते हाल‍िया रंग को देखकर यह कयास लगाये ही जा रहे थे क‍ि अपने भव‍िष्‍य को लेकर हलकान हेमंत सोरेन सरकार कुछ ऐसा करेगी ज‍िससे उसकी च‍िंता थोड़ी कम हो. झारखंड कैब‍िनेट ने 1932 के खत‍ियान आधार‍ित डोमि‍साइल और ओबीसी को 27 प्रति‍शत आरक्षण देने के प्रस्‍ताव पर मुहर लगा दी है. इसे मास्‍टर स्‍ट्रोक बताते हुए यह भी बताया जा रहा है क‍ि सरकार ने अपना वादा पूरा कर द‍िया है. अब केवल वही झारखंडी माने जायेंगे ज‍िनके पास 1932 का खत‍ियान है. ओबीसी को 27 प्रत‍िशत आरक्षण म‍िल गया है. इसे जुड़े बहुतेरे सवाल हैं ज‍िसका जवाब आना बाकी है और जवाब आने तक अपने-अपने तरीके से समझने और समझाने की राजनीत‍ि के पास पूरा मौका है. लेक‍िन फ‍िलवक्‍त सबसे बड़ा सवाल तो यही है क‍ि हेमंत कैब‍िनेट के फैसले पर झामुमो की सहयोगी कांग्रेस में ही मतैक्‍य क्‍यों नहीं है.

हेमंत सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री बन्‍ना गुप्‍ता ने डोम‍िसाइल के मुद्दे पर स्‍पष्‍ट रूप से तो कुछ नहीं कहा है क‍ि इस बात का श्रेय पूरा खम ठोककर ले रहे हैं क‍ि वह और उनकी पार्टी एवं सरकार ने ओबीसी को 27 प्रत‍िशत आरक्षण का वादा पूरा कर द‍िया है. कैब‍िनेट की बैठक के बाद बन्‍ना गुप्‍ता ने ट्वीट क‍िया- 27 ओबीसी आरक्षण को लेकर मैंने सड़क से कैबिनेट तक आवाज उठाया था. आज कैबिनेट में ओबीसी को 27 प्रत‍िशत आरक्षण को स्वीकृति मिल गई है. मैंने एक पिछड़ा वर्ग का बेटा होने का फर्ज आज निभाया. सभी ओबीसी भाइयों और बहनों को बधाई और शुभकामनायें.  कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष राजेश ठाकुर ने अपने वक्‍तव्‍य में डोम‍िसाइल के मसले पर झेंपते हुए ही सही श्रेय लेने से परहेज नहीं क‍िया, लेक‍िन उनका पूरा जोर ओबीसी को 27 प्रत‍िशत आरक्षण का श्रेय लेने पर रहा. उन्‍होंने कहा क‍ि कांग्रेस ने इसके लि‍ए लंबी लड़ाई लड़ी और आज इसका पर‍िणाम सामने है.

Sanjeevani

लेकि‍न, इसके ठीक उलट कांग्रेस की कार्यकारी प्रदेश अध्‍यक्ष और स‍िंहभूम की सांसद कोड़ा ने पार्टी के उलट अपनी राय जाह‍िर की है. गीता कोड़ा पर 1932 का खत‍ियान आधार‍ित स्‍थानीयता नीत‍ि मंजूर नहीं है. वह इसे संशोधन चाहती है. गीता ने भी ट्वीट क‍िया- माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी आपका ध्यानाकृष्ट कराते हुए कहना चाहती हूं कि झारखंड में 1932 के खतियान को आधार मानते हुए स्थानीयता की परिभाषा को पारित किया गया है. इस निर्णय से झारखंड के कोल्हान क्षेत्र की आम जनता स्थानीय अर्थात झारखंडी होने से वंचित रह जायेगी.अपनी ही जन्मस्थली पर स्थानीय का दर्जा नहीं मिलने से इस क्षेत्र की जनता प्रवासी बनकर रह जायेगी. कोल्हान में सर्वे सेटलमेंट 1964, 65 और 70 में किया गया था. ऐसी परिस्थिति में 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. इसलिए मैं मांग करती हूं कि तत्काल इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए झारखंड राज्य के अंतिम सर्वे सेटलमेंट को ही स्थानीयता का आधार बनाया जाए.

इधर, सरकार में शाम‍िल कांग्रेस में उठते असहमत‍ि के सुर के बीच पूर्व मंत्री और जमशेदपुर पूर्वी के न‍िर्दलीय व‍िधायक सरयू राय ने भी हेमंत कैबिनेट के फैसले और उसके आलोक में सामने आ रही राय के समानांतर अपनी राय रखी है. इसमें फैसले की गहन मीमांसा भी है और सरकार के लएि आईना भी. सरयू ने ट्रवीट क‍िया है- हेमंत सोरेन ने गत विधानसभा में कहा कि 1932 खतियान आधारित स्थानीयता संभव नहीं. अब इसे लागू कर दिया! दो माह में ऐसा क्या हुआ? हाईकोर्ट के 5 जजों का निर्णय (2002) रहते हुए यह 9वीं अनुसूची में कैसे शामिल होगा?जबकि आधा झारखंड इसकी परिधि में नहीं आता. नीयत सही है तो सर्वेक्षण करा लें.

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