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हेमंत सरकार ने सभी को निराश किया, अब रघुवर सरकार को याद कर रहे हैं लोगः नीलकंठ मुंडा

Ranchi : पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री और विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने हेमंत सरकार को हर क्षेत्र में विफल बताया है. सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को दो साल बीत गये हैं. पर गरीबों, गांव किसान के विकास के लोक लुभावन वादे कर सत्ता में आयी सरकार ने सभी को निराश किया है. अब लोग दो साल पहले की रघुवर दास सरकार के कार्यकाल को याद कर रहे हैं. राज्य की 80 फीसदी आबादी अब भी गांव में रहती है. पर उनके हित में पीएम आवास, ग्रामीण सड़क और राज्य संपोषित योजनाओं का हाल चिंतनीय है. प्रेस कांफ्रेंस में डाल्टनगंज विधायक आलोक चौरसिया भी उपस्थित थे.

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रघुवर सरकार में हर साल 30 फीसदी तक बढ़ोत्तरी

नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि दो साल पूर्व रघुवर सरकार में जो काम हो रहे थे, उसकी तुलना में यह सरकार फेल साबित दिख रही है. सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अन्य मोर्चों पर भी इस सरकार से राज्य का हित नहीं हो सकता. बगैर ग्रामीण विकास के राज्य का विकास संभव नहीं.

ऱघुवर सरकार में बजट भी इसी अनुरूप रखा जाता था. 59 हजार करोड़ के आसपास बजट रखा जाता था. हर साल 30 से 35 फीसदी तक बजट में बढ़ोत्तरी की जाती थी.

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पुल पुलिया के लिए अलग से 2200 करोड़ तक का बजट रखा जाता था. राज्य संपोषित योजना में भी 1800 करोड़ तक की राशि रखी जाती थी. अभी स्थिति यह है कि रोड बनाने को पौने 5 हजार करोड़ का बजट है और सरकार खर्च नहीं कर पा रही.

2020-21 में पीएम आवास के लिए 4 लाख 31 हजार 504 का लक्ष्य तय किया गया था. अब बजट सत्र मार्च में खत्म होनेवाला है. इनमें से अभी तक मात्र 3 लाख 62 हजार को ही स्वीकृति मिली है. मात्र 5140 आवास का निर्माण ही पूरा हो पाया है. ऱघुवर के समय राज्य में 24 लाख आवासहीन लोगों की पहचान की गयी थी. केंद्र का लक्ष्य 2024 तक सभी आवासहीनों को पक्का मकान दिलाने का था.

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इसकी तुलना में राज्य में सारे आवासहीन लोगों को 2022 तक ही आवास मुहैया कराने का इरादा था. पर अभी जो गति दिख रही है, उससे अगले 10-15 सालों में भी यह सरकार सबों को आवास का लाभ नहीं दे पायेगी.

हेमंत सरकार ने पीएम आवास में साढ़े तीन लाख तक देने की बात कही थी. साथ ही आवास बनाने को अलग से 50 हजार देने की घोषणा पिछले ही बजट सत्र में की थी. एक को भी इसका लाभ उसने नहीं दिया है. आज मनरेगा पूरी तरह विफल है. राज्य में ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ाने को जलछाजन मिशन के जरिए पहल हुई थी.

5000 हेक्टेयर के आसापास एक प्रोजेक्ट देते थे. खेत का पानी खेत में ही रहे, बारिश का पानी नाले में ना जाये, इसके लिए मिशन के तहत करीब 28 प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गयी थी. हेमंत सरकार ने सभी प्रोजेक्ट को बंद कर दिया.

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रघुवर सरकार में 23 हजार किमी सड़क निर्माण कराया था. अभी की सरकार दो वर्षों में किसी भी विधानसभा क्षेत्र में 5-6 किमी तक की सड़क निर्माण योजना को स्वीकृति नहीं दे सकी है.

अभी सड़क निर्माण के लिए 400 करोड़ रखे हैं. एक किमी भी बनेगा कि नहीं, इसमें संदेह है. 2015-2019 के दौरान 2 लाख 67 हजार सखी मंडलों का गठन किया गया था. यह सरकार दो साल में मात्र 3 हजार सखी मंडल का ही गठन कर सकी है.

महिलाओं, बच्चों, किसानों हर किसी को इस सरकार ने ठगा है. राज्य में जानबूझकर पंचायत चुनाव नहीं करा रही है जबकि दूसरी जगहों पर चुनाव हो रहे हैं. इससे ग्रामीण विकास में केंद्र से मिलनेवाली मदद प्रभावित हो रही है.

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