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कोरोना काल में हेमंत सरकार ने किया मिसमैनेजमेंट, टीकाकरण से लेकर बेड देने में भी नाकामः जफर इस्लाम

Ranchi: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने कोरोना काल में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया. शनिवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शुक्रवार को कांग्रेस लीडर सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक हुई. इसे विपक्षी एकता के तौर पर प्रसारित किया गया. वास्तव में इसका एक ही उद्देश्य है- मोदी हटाओ, सत्ता में वापस आओ. कांग्रेस सहित विपक्षी दल लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं. बस मोदी हटाओ मुहिम में लगे रहते हैं. झारखंड में हेमंत सरकार भी अपने असल काम छोड़कर विपक्षी दलों के साथ गलबहियां करती रहती है. कोरोना काल में टीकाकरण, बेड, ऑक्सीजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था गंभीरता से करने की बजाये अपना निकम्मापन ही दिखाया है. टीकाकरण के मामले में पूरी दुनिया में सबसे खराब से खराब देश भी झारखंड से आगे रहे हैं. वहां 5-10 फीसदी तक वेस्टेड हुआ, झारखंड में यह आंकड़ा 35 फीसदी का है जो शर्मनाक है. यह हेमंत सरकार के मिसमैनेजमेंट के कारण हुआ. प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश भी मौजूद थे.

 

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टीकाकरण पर फैलाते रहे भ्रम

Sanjeevani

जफर इस्लाम ने कहा कि टीकाकरण पर सत्ता पक्ष के लोग, मंत्रीगण भ्रम ही फैलाते रहे. कभी इसे भाजपा का टीका बताया. इसमें खामियां बताते रहे. जब दूसरी लहर आयी तब यही लोग अपने जान की परवाह करने को टीका लेने को दौड़े. लोगों को कैसे सुविधा मिल सकेगी, इस पर राजनीति करते रहे. 35 फीसदी से अधिक टीका बर्बाद हुआ. यह सब देखने की बजाये कांग्रेस के साथ मिलकर केंद्र पर दोषारोपण करने और राजनीति करते रहने में समय बर्बाद किया है.

सत्ता में वापसी की छटपटाहट

कांग्रेस लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की बजाये ऐसे काम में लगी रहती है जिससे वह दिन पर दिन निचले स्तर पर जा रही है. केंद्र से बाहर हो चुकी है. कई राज्यों में भी उसकी हालत ठीक नहीं. सदन में भी जनता के सवालों, मुद्दों पर सार्थक बहस की बजाये शोर-शराबा, हंगामा, मारपीट करने को ही अपनी उपलब्धि बताती है. इससे उसका स्तर जनता की नजरों में गिरता जा रहा है. विपक्षी एकता के नाम पर सब एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं पर उनकी हालत कुएं के मेढ़क की तरह है. सब एक- दूसरे की टांग खींचने और अपना तथा अपने परिवार के हित की लालसा लिये बैठे हैं. सत्ता में वापसी को कांग्रेस छटपटाती दिख रही है. अपोजिशन की दूसरी पार्टियां भी भाजपा और केंद्र सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से घबराती नजर आ रही है.

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