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पीएम मोदी से हेमंत ने कहा – मनरेगा की मजदूरी दर में 50 प्रतिशत वृद्धि की जाये

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  • कोरोना संकट और लॉकडाउन को लेकर पीएम मोदी के साथ सीएम की हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग

Ranchi : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि लॉकडाउन के बाद की स्थिति को देखते हुए मनरेगा श्रम मजदूरी दर में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाये. सीएम ने कहा है कि लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार को चिंता है. लेकिन केंद्र को भी राज्य की हर संभव मदद करनी चाहिए. सीएम सोरेन ने कोरोना संकट और लॉकडाउन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वीडियो कांफ्रेंसिंग में विचार व्यक्त किये.

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मनरेगा मजदूरी में बढ़ोतरी सहित जीएसटी के बारे में पीएम के साथ हुई बातचीत

बैठक के बाद सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अल्प समय की बैठक में उन्होंने मजदूरों की बातों को प्रमुखता से रखा. पीएम से उन्होंने मजदूरों की मदद हेतु और कदम उठाने, मनरेगा मजदूरी एवं श्रम दिवस में बढ़ोत्तरी, जीएसटी भुगतान, कर प्रणाली में संशोधन कर राज्य की धन संग्रह शक्ति बढ़ाने में मदद, रोजगार एवं लोगों के जीवन को बचाने को सर्वोपरी रखने की बात भी कही.

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पीएम से बातचीत में सीएम ने रखी निम्न बातें

  • औरंगाबाद ट्रेन दुर्घटना में मारे गये मजदूरों की बात करते हुए सीएम सोरेन से पीएम से कहा कि वे झारखंड के प्रवासियों की वापसी शीघ्र और सुरक्षित लौटने की व्यवस्था करें.
  • झारखंड में होने वाले रिवर्स माइग्रेशन (लगभग 6 लाख) के मद्देनजर, सीएम ने अगले एक साल के लिए मौजूदा मनरेगा श्रम मजदूरी में 50 प्रतिशत की वृद्धि का अनुरोध किया. इसके अलावा, उन्होंने वर्तमान वेतन भुगतान मानदंडों को शिथिल करने और मनरेगा मजदूरों के दैनिक भुगतान को दैनिक आधार पर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया.
  • सीएम ने वित्त वर्ष 2015-20 के लिए श्रम मंत्रालय द्वारा दिये श्रम बजट में कम से कम 50 प्रतिशत वृद्धि की भी मांग पीएम से की.
  • सीएम सोरेन ने पीएम को कहा कि राज्य सरकारें मनरेगा के तहत बेरोजगारी भत्ते का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं. लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार योजना के केंद्रीय हिस्सा से ही मनरेगा मजदूरों को बेरोजगारी भत्ते का भुगतान करे.
  • लॉकडाउन के कारण गिरते राजस्व और राजकोषीय स्थिति को देख सीएम ने मांग की है.
  • केंद्र सरकार राज्य को मिलनेवाले जीएसटी का भुगतान जल्द करे.
  • खनन पर लगने वाले विशेष उपकर/कर लगाने के लिए अतिरिक्त शक्तियों को विशेष अधिकार राज्य को मिले.
  • केंद्र सरकार द्वारा लिये गये ऋण/ऋण अदायगी के लिए राज्य सरकार को एक वर्ष का समय (केंद्र सरकार / सार्वजनिक संस्थानों द्वारा शून्य ब्याज सहित) दिया जाये.

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केंद्र की एडवाइजरी का झारखंड ने किया है पालन, आगे भी होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किये बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि कोरोना संकट और लॉकडाउन को लेकर केंद्र द्वारा जारी एडवाइजरी का झारखंड सरकार ने पालन किया है. कोरोना से लड़ने के लिए केंद्र जो भी आगे निर्णय लेगी, उसका भी राज्य सरकार पालन करती रहेगी. बातचीत में पीएम ने यह भी कहा कि लॉकडाउन को लेकर अपने राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप सरकारें रेड जोन, ऑरेंज जॉन या ग्रीन जोन में तब्दील कर छूट को लेकर निर्णय ले सकती हैं. बैठक में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता,  मुख्य सचिव सुखदेव सिंह,  मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का,  स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी,  एडीजी पीआरके नायडू सहित कई अधिकारी उपस्थित थे.

लोगों की जान बचाना है सर्वोच्च प्राथमिकता :  हेमंत

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा की कोरोना संकट की इस मुश्किल घड़ी में लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है. हालांकि आर्थिक मजबूती भी बेहद जरूरी है. ऐसे में जीवन और जीविका के बीच संतुलन बनाकर हमें कार्यों को अंजाम देने के लिए आगे आना होगा. इसमें केंद्र सरकार का सहयोग अपेक्षित है. उन्होंने प्रधानमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि झारखंड में कोरोना से रिकवरी रेट 50% तक पहुंच चुकी है.

सभी राज्यों को रोड मैप तैयार करने को कहा पीएम ने

प्रधानमंत्री ने 17 मई के बाद लॉकडाउन का स्वरूप कैसा होना चाहिए. इस पर क्या-क्या रियायतें दी जानी चाहिए.  इसे लेकर सभी राज्यों से 15 मई के पहले रोड मैप तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश भी दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य द्वारा मिले सुझाव के अनुरूप चौथे चरण के लॉकडाउन की रणनीति केंद्र सरकार तैयार कर सके.

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प्रवासी मजदूरों के आने से बढ़ रही है चुनौतियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के वापस आने से राज्यों की चुनौतियां बढ़ रही हैं. सबसे बड़ी चुनौती उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना है. ऐसे में केंद्र सरकार से पर्याप्त सहयोग की उम्मीद है. उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया कि प्रवासी मजदूरों के लौटने का सिलसिला जारी है. अभी झारखंड में मात्र 50 से 55 हजार प्रवासी मजदूर ही लौट पाये हैं,  जबकि इनकी संख्या लगभग 7 लाख है. ऐसे में प्रवासी मजदूरों को इन विषम परिस्थितियों में उनके घर तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार कोई ठोस उपाय करें ताकि उन पर पनप रहे भय को भी दूर किया जा सके.

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