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हेमंत ने कहा- झारखंड भी मनायेगा विश्व आदिवासी दिवस, सीता सोरेन ने की सार्वजनिक अवकाश की मांग

  • पूरे विश्व में 9 अगस्त को मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस

Ranchi  :  झाऱखंड में इस साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जायेगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है. इससे पहले जेएमएम नेता सह जामा विधायक सीता सोरेन ने भी मुख्यमंत्री से मांग कर कहा है कि विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश हो.

सीता सोरेन ने कहा है कि विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में आगामी 9 अगस्त को राजस्थान और छत्तीसगढ़ ने सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया है. झारखंड में पूर्णरूपेण आदिवासी बहुल राज्य है. ऐसे में मांग है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इसे राज्य में लागू करें.

उल्लेखनीय है कि एक दिन के पहले उपराजधानी दुमका में ग्रामीणों ने एक बैठक कर इस दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग की थी. हालांकि सीएम के ट्वीट से अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि राज्य में इस दिन सार्वजनिक अवकाश होगा, लेकिन सीएम के किये ट्वीट से इस बात की संभावना काफी बढ़ गयी है.

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ग्रामीणों ने की मांग, कहा- दुमका उपचुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियों से पूछा जायेगा

रविवार को दुमका के चांद-भैरो मुर्मू जुवन आखड़ा ने राज्य में राजकीय अवकाश की मांग को लेकर दुमका प्रखंड के सरवा पंचायत के करमडीह में ग्रामीणों ने बैठक की थी. ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड राज्य आदिवासियों के “अबुवा दिवस अबुवा राज” के नाम पर बना था. लेकिन अफसोस है कि इतने वर्ष होने के बाद भी अबुवा दिवस अबुवा राज का सपना अब तक साकार नहीं हुआ. जबकि अन्य आदिवासी बहुल राज्यों में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर राजकीय अवकाश है.

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि दुमका उपचुनाव पर सभी राजनीतिक पार्टियों से यह पूछा जायेगा कि आखिर 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर राजकीय अवकाश क्यों नहीं है.

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पीएम से भी की गयी है सार्वजनिक अवकाश करने की मांग

9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के रूप में पहचाना जाता है. इस दिन संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) ने आदिवासियों के भले के लिए एक कार्यदल गठित किया था जिसकी बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी. उसी के बाद से यूएनओ ने अपने सदस्य देशों को प्रतिवर्ष 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ मनाने की घोषणा की. पूरे देश में भी इस दिन सार्वजनिक अवकाश करने की मांग बीते जुलाई माह को उठी थी.

आदिवासी समुदाय के लोगों और आदिवासी चिंतक ने ट्विटर के ज़रिये पीएम नरेंद्र मोदी से यह मांग कर रहे है. TribalArmy नाम से चलने वाले ट्विटर पर भी पीएम से अपील की गयी है कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ने आधिकारिक तौर पर हर वर्ष इस दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. ऐसे में केंद्र व तमाम राज्य सरकार इस बार यहां “राष्ट्रीय अवकाश” के रूप में मनाने का निर्देश दिया जाना चाहिए.  आखिर भारत के आदिवासियों के साथ ये भेदभाव क्यों?

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