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नियोजन नीति पर रघुवर की आलोचना से नहीं डरने वाली हेमंत सरकार, आदिवासी मूलवासियों को ही मिलेगी नौकरीः झामुमो

Ranchi: झामुमो के मुताबिक पूर्व सीएम रघुवर दास अब नयी नियोजन नीति को लटकाने के फेर में हैं. कोर्ट में जाकर इस नीति को चुनौती देने की उनकी मंशा इसी का सबूत है. पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में रघुवर को घेरते हुए कहा कि आदिवासियों मूलवासियों का हित उनके मंसूबे में नहीं रहा है. नयी नीति पर उन्हें छोड़कर किसी का विरोध नहीं है.

नियुक्ति वर्ष में प्रक्रिया शुरू होने में थोड़ा विलंब हुआ है पर इसका लाभ यहीं के आदिवासियों मूलवासियों को मिलेगा. इसमें अड़ंगा डालने वाले झारखंड विरोधी हैं.

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फर्जी इन्काउंटर कराने वाले चला रहे जुबान

सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक रघुवर सरकार में लाखों नौकरियों दिये जाने की बात कही गयी. सरकारी शिक्षकों के 927 पदों में से मात्र 7 झारखंडी और बाकी बनारस और बिहार के लोगों को नौकरी दी गयी.

आदिवासी मूलवासी की बात कहने वाली इस सरकार के दौरान कई फर्जी इन्काउंटर हुए जिनमें नक्सली, अपराधी के नाम पर निर्दोषों को गोलियां मारी गयीं.

मोती लाल बास्के (गिरिडीह) सहित मिन्हाज अंसारी, बलराम महतो, अब्राह्म मूंडू, रोशन होरो सहित कई ऐसे नाम इस लिस्ट में हैं. ऐसे में ताज्जुब है कि पूर्व सीएम अब नियोजन नीति के मसले पर झारखंडी मूलवासियों के बीच भ्रम फैलाने में क्यों लगे हैं.

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लूटा खजाना निकालने में लगी सरकार

आदिवासियों के हित की बात करने वाली रघुवर सरकार में नौकरियां भी बाहरी को बांटी गयी. 514 आदिवासी मूलवासी युवकों को फर्जी नक्सली बताकर दिगदर्शन संस्था द्वारा सरेंडर कराया गया. इसमें 100 से अधिक साहू समाज के ही लड़के थे. 2014 में तत्कालीन राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की. फिर रघुवर सरकार राज्य में आय़ी.

उसने कोर्ट में हलफनामा दिया कि उसकी पुलिस एजेंसी ही जांच कर लेगी. तत्कालीन पुलिस अधिकारी एम.वी राव ने इस मामले में पड़ताल की थी. बाद में जांच को प्रभावित किया गया.

2015 में बकोरिया कांड में पांच नाबालिग को गोली मारी गयी. ऐसे कई मामले हैं जिनमें रघुवर सरकार में राज्य का खजाना लूटा गया. स्थापना दिवस के नाम पर चॉकलेट, टॉफी, टी-शर्ट बांटने के नाम पर गबन हुआ. अब राज्य सरकार इस खजाने को सामने लाने में लगी है तो रघुवर को दर्द हो रहा है.

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