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राज्य के खाते से 1418 करोड़ काटने पर बिफरे हेमंत, बोले- केंद्र की घिनौनी साजिश

  • पहले से रोक रखा है जीएसटी का 2500 करोड़, मार रहे हैं हमारा हक

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र की मोदी सरकार के रवैये से नाराज हैं. यह नाराजगी मोदी सरकार द्वारा डीवीसी की बकाया राशि वसूलने के नाम पर कोरोनाकाल में आर्थिक मुसीबत के बीच झारखंड के आरबीआई खाते से करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये काट लिये जाने की वजह से है. हेमंत सोरेन ने तो मोदी सरकार के इस कदम को झारखंड के खिलाफ घिनौनी साजिश बताया है.

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जानिये पूरा मामला

डीवीसी की बकाया राशि की वसूली को लेकर केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है. पूर्व के दिये नोटिस के आलोक में केंद्र ने राज्य के आरबीआई खाते से करीब 1418 करोड़ रुपये काट लिये हैं. यह राशि पहली किस्त के रूप में है. केंद्र के निर्देश के बाद बुधवार को आरबीआई ने राज्य के खाते से इंटर अकाउंट ट्रांसफर द्वारा राशि काटकर ऊर्जा मंत्रालय को दे दी है.

इससे राज्य की वित्तीय स्थिति अचानक संकट में आ गयी है. क्योंकि आरबीआई के खाते में राज्य के हिस्से के तौर पर अब केवल 513 करोड़ रुपये ही बचे हैं. इस कदम को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र की एक घिनौनी साजिश करार दिया है.

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बता दें कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को डीवीसी से खरीदी गयी बिजली का 5608.32 करोड़ रुपये का बकाया 15 दिन में चुकाने के लिए नोटिस दिया था. नोटिस 11 सितंबर को जारी हुआ था. यानी 26 सितंबर तक ही राज्य को नोटिस का जवाब देना था. नोटिस में ऊर्जा मंत्रालय ने राज्य सरकार को स्पष्ट किया था कि यदि जेबीवीएनएल ने दिये गये समय में डीवीसी का बकाया भुगतान नहीं किया, तो 2017 में हुए त्रिपक्षीय समझौते की शर्तों के तहत राज्य सरकार के आरबीआई खाते से यह बकाया 1417.50 करोड़ की चार किस्तों में वसूल ली जायेगी. पहली किस्त अक्टूबर में वसूली जायेगी. दूसरी किस्त अगले वर्ष जनवरी, तीसरी अप्रैल और चौथी जुलाई में वसूल की जायेगी. वसूली गयी राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा होगी. इसी के तहत आरबीआई ने राशि काटकर केंद्र को दे दी है.

केंद्र की घिनौनी साजिश : CMO

केंद्र के इस कदम को एक घिनौनी साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कोविड-19 से लड़ाई लड़ते हुए पहले से ही राज्य को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. जीएसटी मद का करीब 2500 करोड़ रुपये पहले से ही केंद्र ने रोक रखा है. ऊपर से अब डीवीसी की बकाया राशि को लेकर राज्य का जो हिस्सा आरबीआई के पास जमा था, उसे भी केंद्र ले रहा है. जबकि, हकीकत यही है कि पूर्व की रघुवर सरकार ने 2017 में एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत ही सहकारी संघवाद के बुनियादे ढांचे को नष्ट करने की नींव रखी थी. ऐसा कर केंद्र घिनौनी साजिश रच रहा है.

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