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झारखंड में ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए कूलियों, ऑटो और रिक्शा चालकों की ली जायेगी मदद

राज्य बाल आधिकार संरक्षण आयोग की बैठक में लिया गया निर्णय

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Ranchi : झारखंड में बढ़ती ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने की मुहिम से ऑटो चालक, रिक्शा चालक, रेलवे कूली को भी जोड़ा जायेगा. इनकी मदद से ही बच्चों को ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार होने से पहले बचाया जा सकता है. इससे राज्य से ह्यूमन ट्रैफिकिंग की घटनाओं को कम किया जा सकता है. यह फैसला बुधवार को उपायुक्त कार्यालय सभागार में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की एसडीपीओ, रेलवे पुलिस, महिला पुलिस सहित विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में लिया गया. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि ट्रैफिकिंग रोकने के लिए तत्पर संस्था द्वारा रेस्क्यू कर लोगों को छुड़ाया जाता है, लेकिन उसके बाद संबंधित विभाग में उसका एडमिशन नहीं हो पाता है. ऐसे में इन तमाम मुद्दों को लेकर संबंधित विभाग के साथ बैठक की जायेगी.

ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों की काउंसलिंग पर चर्चा

बैठक में झारखंड में ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने को लेकर चर्चा की गयी. इसमें एनजीओ और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने से जुड़े लोगों के बीच अहम मुद्दों पर बातचीत की गयी. बैठक के दौरान कमी को भी दूर करने और राज्य में बढ़ रही ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने को लेकर जानकारियां दी गयीं. साथ ही तस्करी के शिकार हो रहे बच्चों की किस तरह से काउंसलिंग की जाये, इस पर भी विशेष रूप से चर्चा की गयी.

ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने में रेलवे पुलिस की भूमिका अहम

बैठक में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने में रेलवे पुलिस की अहम भूमिका रहती है. ऐसे में ट्रैफिकिंग रोकने के लिए जितनी भी संस्थाएं हैं, उन सबों को रेलवे पुलिस के साथ समन्वय बनाकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने का काम करना चाहिए. साथ ही रेलवे प्लेटफॉर्म पर सीसीटीवी कैमरा लगाने और खराब पड़े सीसीटीवी कैमरा को दुरुस्त करने की बात कही गयी.

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