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बेटिकट हुए हेवीवेट उम्मीदवार थर्ड फ्रंट बनाने में जुटे, विधानसभा चुनाव में सबक सिखाने की तैयारी!

अलग-अलग दल में रहे, अब मिल रहे दिल और दिमाग, जारी है बैठकों का दौर

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Pravin kumar

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Ranchi: लोकसभा चुनाव के महासमर के बीच एक ऐसी खबर छन कर आ रही है, जिसे ना ही कयास कहा जा सकता है और न ही पक्की इबारत. झारखंड में कई हेवीवेट अब तीसरा मोरचा बनाने की जगुत में हैं. हालांकि यह अभी एकदम से प्राइमरी स्टेज में है. कहा जा रहा है कि कई दिल मिलने वाले हैं…मगर चुपके चुपके. जिस तरह से विभिन्न दलों के हेवीवेट एक दूसरे से दिल और दिमाग मिला रहे हैं, उससे साफ जाहिर होता नजर आ रहा है कि तीसरे फ्रंट के किले की नींव पड़ने वाली है. चर्चा यह भी है तीसरे फ्रंट के सूरमा आगामी विधानसभा चुनाव में अपना दम-खम दिखाने के साथ-साथ अपनी-अपनी पार्टी को मजा भी चखाने की कोशिश करेंगे. माना जा रहा है कि जिस तरह से लोकसभा चुनाव में कई विधायक और सांसदों को साइड लाइन किया गया है, उससे सबक लेकर पहले से ही तैयारी की जा रही है.

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बात विधानसभा की सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की

बात हो रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव में थर्ड फ्रंट राज्य की सभी सीटों पर अपना उम्मीदवार देगा. इस फ्रंट का ठोस स्ट्रक्चर रखने वाले हेवीवेट को कमजोर भी आंका नहीं जा सकता. वे काफी अनुभवी हैं. कई बार सांसद-विधायक भी रह चुके हैं. पांच बार तक सांसद रहने का रिकॉर्ड भी है. ये हेवीवेट कौन हैं, कहां से हैं, ये सब जानते हैं और पहचानते भी. लोकसभा में टिकट के दावेदार रहने के बाद भी पार्टी ने उनका टिकट काट दिया. ऐसे नेता पार्टी के आला नेताओं को कोस भी रहे हैं. पार्टी के द्वारा मान-मनव्वल भी जारी है.

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राजधानी के बाहर मिल रहे दिल

पुख्ता सूत्रों के अनुसार इन हेवीवेट का मिलन नौ अप्रैल की रात को राजधानी के बाहर एक फार्म में हुआ. जिसमें यूपीए और एनडीए दोनों दलों के नेता शामिल थे. इस मुलाकात के बाद भी गुपचुप तरीके से दिल और दिमाग का मिलन जारी है. कयास यह भी लगाया जा रहा है कि तीसरा फ्रंट जल्द ही एक पार्टी का रूप लेगा. पार्टी का नाम भी तय कर लिया गया है. लेकिन अब तक पार्टी का नाम इन हेवीवेट की जुबान तक ही सीमित है. उम्मीद जताई जा रही है कि लोकसभा चुनाव के बाद इसे डिस्क्लोज कर दिया जायेगा.

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अब जानिये बीजेपी से साइडलाइन हुए हेवीवेट को

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पहला नाम रांची के बीजेपी सांसद रामटहल चौधरी का है. उनके खाते में छह बार एमपी बनने का रिकॉर्ड भी है. इन्हें इस बार पार्टी ने साइडलाइन कर दिया. इसके बाद चौधरी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. पार्टी के आला नेताओं को कोसा भी. दूसरा नाम बीजेपी के सांसद रवींद्र पांडेय का है. हालांकि इन्होंने अब तक पार्टी नहीं छोड़ी है. ले्किन उनके सामने जायें तो कहां जायें वाली स्थिति है. फिलहाल वे अब तक असमंजस में हैं. तीसरा नाम बीजेपी के रवींद्र राय का है. इन्हें कोडरमा से टिकट नहीं मिला. फिलहाल ये खामोश हैं. अभी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं.

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कांग्रेस से साइडलाइन हुए ये हेवीवेट

कांग्रेस से साइडलाइन हुए हेवीवेट में पहला नाम प्रदीप बलमुचु का है. बलमुचु राज्यसभा सांसद और विधायक भी रह चुके हैं. खूंटी से टिकट के प्रबल दावेदार थे. लेकिन पार्टी ने कालीचरण मुंडा को टिकट देकर बलमुचु को साइडलाइन कर दिया. फिलहाल बलमुचु चुप्पी साधे हुए हैं. दूसरा नाम चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे का है. ये सांसद विधायक और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. धनबाद से टिकट के दावेदार थे. पर इन्हें भी टिकट नहीं मिला. फिलहाल पार्टी के खिलाफ कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं. तीसरा नाम फुरकान अंसारी का है. ये भी सांसद और विधायक रह चुके हैं. गोड्डा से अपनी दावेदारी पेश की थी. पर पार्टी ने इन्हें भी साइडलाइन कर दिया. इसके बाद रामेश्वर उरांव भी हैं. लोहरदगा से दावेदार थे, ले्किन पार्टी ने सुखदेव भगत पर भरोसा जताया.

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थर्ड फ्रंट में बीजेपी और कांग्रेस की जुगलबंदी के कयास

सूत्र बताते हैं कि थर्ड फंट में बीजेपी और कांग्रेस से किनारे किये गये हेवीवेट की जुगलबंदी देखने लायक होगी. विपरित विचारधारा के लोगों का एक मंच पर आना कहीं न कहीं कुछ और ईशारा भी कर रहा है. सूत्र यह भी बताते हैं कि जब दिल मिल जाये तो एक नई विचारधारा के साथ सामने आयेंगे. अनुभव भी काम आयेगा. वैसे तो पार्टी का नाम झारखंड विकास समता पार्टी रखने की सोची है. जिसमें प्रदेश के विकास के साथ समता भी होगी. यह आने वाला समय ही बतायेगा कि विकास और समता कितनी मजबूत होगी.

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